गोरखपुर हादसा: CM योगी के दौरे के बाद बच्चों के लिए ‘मसीहा’ बने डॉक्टर कफील खान हटाए गए

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उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्षेत्र गोरखपुर की बदहाल व्यवस्था को दर्शाने वाली घटना के सामने आने के बाद देश भर में हड़कंप मच गया है। बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में 48 घंटे के दौरान 33 और पिछले छह दिनों में 64 से अधिक मासूमों की मौत ने सबको झकझोर दिया है। इस बीच आलोचना का सामना कर रहे सीएम योगी ने हालात का जायजा लेने गोरखपुर के BRD अस्पताल पहुंचे और अस्पताल का दौरा किया।

(AFP)

सीएम योगी के साथ में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी मौजूद थे। प्रेस कॉन्फेंस के दौरान पत्रकारों से कहा कि BRD अस्पताल की घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चिंतित हैं, उन्होंने पूरी तरह से मदद का भरोसा दिया है। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि बच्चों की मौत पर सियासत की नहीं, संवेदना की जरूरत है।

हादसे के ‘हीरो’ कफील खाने हटाए गए

वहीं, सीएम योगी के BRD अस्पताल दौरे से ठीक बाद हादसे के बाद पीड़ितों के लिए मसीहा बने अस्पताल के वाइस प्रिंसिपल और सुपरिटेंडेंट डॉक्टर कफील खान को ड्यटी से हटा दिया गया है। बता दें कि इससे पहले मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल राजीव मिश्रा को निलंबित कर दिया गया था। डॉक्टर कफील खान BRD अस्पताल में इंसेफेलाइटिस विभाग के इंचार्ज थे। साथ ही उनके पास कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल और अस्पताल अधीक्षक भी जिम्मेदारी थी।

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कफील खान को हटाए जाने का अभी तक कोई कारण नहीं बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. कफील को BRD मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रिक्‍स विभाग के नोडल अफसर पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह डॉ भूपेन्‍द्र शर्मा को पीडियाट्रिक्‍स विभाग का नया नोडल अफसर नियुक्‍त किया गया है। वहीं, अंबेडकर नगर के राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल, डॉ पीके सिंह को बीआरडी मेडिकल कॉलेज का अतिरिक्‍त प्रभार सौंपा गया है।

हालांकि, इससे पहले शनिवार को सोशल मीडिया पर कफील खान की जमकर सराहना हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक हादसे के वक्त अगर डॉ. काफिल खान अस्पताल में मौजूद नहीं होते तो मरने वाले बच्चों की संख्या और भी बढ़ सकती थी। अंग्रेजी वेबसाइट डीएनए इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब अस्पताल में ऑक्सीजन खत्म हो गया तो कफील खान ने अपने दोस्त के नर्सिंग होम से ऑक्सीजन सिलेंडर मंगाये।

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वहीं, स्थानीय अखबारों में छपी खबरों कि माने तो गुरुवार की रात करीब 2 बजे अस्पताल से फोन आया कि ऑक्सीजन खत्म होने को है। उस वक्त अस्पताल में इन्सेफेलाइटिस से पीड़ित करीब 400 बच्चे भर्ती थे। यह शब्द सुनते ही कफील खान घबरा गए और अपने ड्राइवर को रात में ही जगाया।

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कफील आनन-फानन में अपने दोस्त के निजी क्लिनिक में पहुंचे। यहां से ऑक्सीजन का तीन जंबो सिलेंडर लेकर के सीधे बीआरडी अस्पताल पहुंचे। फटाफट ऑक्सीजन का सिलेंडर पाइप से जोड़ा गया और मौत से जूझ रहे बच्चों को राहत मिल गई। इतने सारे बच्चों के बीच महज तीन सिलेंडर कितनी देर चलता, सुबह होते-होते ऑक्सीजन फिर से खत्म हो गया।

भावुक हुए सीएम योगी

प्रेस कॉन्फेंस के दौरान सीएम योगी ने घोषणा करते हुए कहा कि बच्चों की मौत के मामले की गहन जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से इस मामले में कोई लापरवाही नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि बच्चों की मौत ऑक्सिजन की कमी के चलते नहीं हुई। योगी मीडिया से बात करते हुए भावुक भी हो गए।

मीडिया को दी नसीहत

इस दौरान सीएम योगी ने मीडिया कवरेज पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि ”आप सभी लोग सरकारी अस्‍पतालों में जाइए। बाहर से रिपोर्टिंग नहीं, मौके पर जाइए वार्ड में। मैं आपको इस बात की सुविधा देने जा रहा हूं। प्रत्‍येक पत्रकार को कैमरा के साथ भीतर जाने की इजाजत होगी। उन्‍होंने कहा कि बाहर रहकर फेक रिपोर्टिंग नहीं करनी चाहिए।

सभी पत्रकारों को वार्ड के अन्दर जाकर यथास्थिति की जानकारी लेनी चाहिए। मुझे इन्सेफेलाइटिज की पीड़ा है। सीएम ने कहा कि केंद्र व राज्‍य के कई अधिकारी गोरखपुर में मौजूद हैं। प्रधानमंत्री जी ने पूरी मामले की जानकारी लेने के लिए कुछ स्‍तरीय चिकित्‍सकों की टीम यहां भेजी हैं। उन्‍होंने अपना कार्य भी शुरू कर दिया है।

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दोषियों को ऐसी सजा मिलेगी जो मिसाल बनेगी

प्रेस कॉन्फेंस के दौरान सीएम योगी ने कहा कि इंसेफेलाइटिस के खिलाफ शुरू से हम लोग लड़ते रहे हैं। सीएम बनने के बाद यह बीआरडी मेडिकल कॉलेज का मेरा चौथा दौरा है। हर बार इंसेफेलाइटिस वार्ड का निरीक्षण करता हूं। उन्‍होंने कहा कि इस हादसे की जांच के लिए चीफ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है। रिपोर्ट के आने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई की जाएगी। दोषियों को ऐसी सजा मिलेगी जो मिसाल बनेगी।

पीड़ा के बारे में मुझसे ज्‍यादा कोई नहीं जान सकता

सीएम योगी ने कहा कि मैं 1996-97 से इस लड़ाई को लड़ रहा हूं। उन बच्चों के लिए मुझसे ज्यादा संवेदनशील कोई नहीं हो सकता। मैं इंसेफेलाइटिस के खिलाफ सड़क से संसद तक लड़ा हूं। उन्होंने कहा कि राज्य के 90 लाख बच्चों को वैक्सीन देकर इनसेफ्लाइटिस के खिलाफ लड़ाई का आगाज किया है। इस लिहाज से इस पीड़ा के बारे में मुझसे ज्‍यादा कोई नहीं जान सकता।

 

 

 

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