गोरखपुर: BRD मेडिकल कॉलेज में हुई बच्चों की मौत मामले में गिरफ्तार डॉ. कफील खान को हाई कोर्ट से मिली जमानत

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर के बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में पिछले साल अगस्त महीने में हुई सैकड़ों नवजातों की मौत मामले में गिरफ्तार इंसेफलाइटिस वार्ड के प्रभारी रहे डॉक्टर कफील खान को बुधवार (25 अप्रैल) को जमानत मिल गई है। डॉ. कफील खान को इलाहाबाद हाई कोर्ट से करीब आठ महीने बाद जमानत मिली है।

(AFP)

बता दें कि बच्चों की मौत मामले में मीडिया में हीरो से जीरो बने डॉ कफील खान की जमानत को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ी हुई थी। डॉ कफील को पिछले साल सितंबर महीने में गिरफ्तार किया गया था जिसके बाद से ही वह गोरखपुर जेल में बंद थे।

इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 5 सितम्बर 2017 को उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। तब से वे जेल में बंद हैं। गौरतलब है कि पिछले साल अगस्त के महीने में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की सप्लाइ रुक जाने की वजह से सैकड़ों मासूम बच्चों की मौत हो गई थी।

पिछली 10-11 अगस्त की रात को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से 30 बच्चों की मौत हो गई थी, जबकि एक सप्ताह के दौरान 60 से अधिक बच्चों की मौत हो गई थी। इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 12 अगस्त को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी।

समिति ने गत 20 अगस्त को सरकार को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्रधानाचार्य डॉक्टर राजीव मिश्रा, ऑक्सीजन प्रभारी, एनेस्थिसिया बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर सतीश तथा एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम बोर्ड के तत्कालीन नोडल अधिकारी डॉक्टर कफील खान तथा मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की आपूर्तकिर्ता कंपनी पुष्पा सेल्स के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश की थी।

इसके अलावा समिति ने डॉक्टर राजीव मिश्रा और उनकी पत्नी डॉक्टर पूर्णमिा शुक्ला, मेडिकल कॉलेज के लेखा विभाग के कर्मचारियों तथा चीफ फार्मासिस्ट गजानन जायसवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार उन्मूलन अधिनियम के तहत कार्रवाई की सिफारिश की थी। अधिकतर बच्चों की मौतें कथित रूप से आक्सीजन की कमी से हुई थी, लेकिन योगी सरकार आक्सीजन की कमी के दावे को खारिज करती आ रही है।

मानवता की मिसाल बनकर उभरे डॉ. कफील अहमद

बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में 48 घंटे के दौरान 36 मासूमों की मौत ने सबको झकझोर दिया था। इस सारी घटना के दौरान डॉक्टर कफील अहमद का नाम उभरकर सामने आया था। उस वक्त मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि जब बच्चे ऑक्सीजन की कमी से दम तोड़ रहे थे, तो वहां कुछ डॉक्टर्स ऐसे भी थे जो उन्हें बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रहे थे। इन्हीं डॉक्टर्स की फेहरिस्त में एक नाम कफील अहमद का है। जो बच्चों को बचाने के लिए सारी रात जूझते रहे।

रिपोर्ट के मुताबिक रात के दो बज रहे थे। इंसेफेलाइटिस वार्ड के कर्मचारियों ने प्रभारी व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कफील अहमद को सूचना दी कि अगले एक घंटे बाद ऑक्सीजन खत्म हो जाएगी। इस सूचना के बाद ही डॉक्टर की नींद उड़ गई। वह अपने कार से मित्र डॉक्टर के अस्पताल गए और वहां से ऑक्सीजन का तीन जंबो सिलेंडर लेकर रात तीन बजे सीधे बीआरडी पहुंचे। तीन सिलेंडरों से बालरोग विभाग में करीब 15 मिनट ऑक्सीजन सप्लाई हो सकी।

उस वक्त मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि डॉक्टर कफील खान ने शहर के आधा दर्जन ऑक्सीजन सप्लायरों को फिर फोन लगाया था तब एक सप्लायर ने नकद भुगतान मिलने पर सिलेंडर रिफिल करने को तैयार हो गया तब डॉ कफील ने तुरंत एक कर्मचारी को अपना एटीएम कार्ड देकर रूपये निकालने भेजा और ऑक्सीजन की व्यावस्था की। डॉ. कफील अहमद को उस वक्त सोशल मीडिया में काफी सराहना की गई थी।

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