बहराइच अस्पताल में बुखार से पीड़ित बच्चों की जांच कर रहे थे डॉ. कफील खान, पुलिस ने हिरासत में लिया

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर में बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में पिछले साल कथित रूप से ऑक्सीजन की कमी से बड़ी संख्या में बच्चों की मृत्यु मामले में आरोपी और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बर्खास्त डॉक्टर कफील खान को शुक्रवार (22 सितंबर) को बहराइच पुलिस ने हिरासत में ले लिया। कफील पर आरोप है कि वह जिला अस्पताल में भर्ती बच्चों की जबरन जांच कर रहे थे।

पुलिस के मुताबिक, गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कॉलेज से बर्खास्त डॉक्टर कफील को शनिवार को बहराइच जिला अस्पताल में अव्यवस्था फैलाने के आरोप में हिरासत में लिया गया। पुलिस अधीक्षक सभाराज सिंह ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि शनिवार को जनपद बहराइच के जिला अस्पताल से सूचना प्राप्त हुई कि एक व्यक्ति अस्पताल के वार्ड में घुसकर मरीजों की चिकित्सा में अव्यवस्था फैला रहा है एवं डॉक्टरों से नोंकझोंक कर रहा है।

सूचना पर प्रभारी निरीक्षक कोतवाली नगर प्रेम प्रकाश पांडे द्वारा मौके पर पहुंचकर चिकित्सा में व्यवधान डालने वाले व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया। एसपी ने बताया कि नाम पता पूछने पर गिरफ्तार व्यक्ति ने अपना नाम डॉ. कफील बताया जो गोरखपुर मेडिकल कॉलेज की सेवा से बर्खास्त हो चुके हैं।

अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि कफील अस्पताल में पत्रकारों को बुलाकर प्रेस वार्ता करना चाह रहे थे जिस पर पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें मना किया था लेकिन वह नहीं माने तब उन्हें हिरासत में ले लिया गया। बहराइच जाने से एक दिन पहले कफील ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा था, “कल बहराइच में रहूँगा..अगर कोई दोस्त बहराइच में है तो मुझे message करे…इतनी मासूमों की मौत पर हम चुप नहीं रहेंगे, योगी सरकार इस बार कोई बहाना बना कर बच नहीं सकती”

गौरतलब है कि ये वही डॉक्टर कफील हैं जिन्हें गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में गत वर्ष ऑक्सीजन की कमी से हुयी बच्चों की मौत के मामले में आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया गया था। साथ ही शासन ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया था। हालांकि बाद में अदालत ने उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया था।

‘जनता का रिपोर्टर’ से बातचीत में योगी सरकार पर लगाया गंभीर आरोप

बच्चों की मौत मामले में हीरो से विलेन बनने के सवाल पर डॉक्टर कफील खान ने हाल ही में ‘जनता का रिपोर्टर’ से कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने आप को बचाने के लिए किसी न किसी को ‘बलि का बकरा’ बनाना था, क्योंकि खुद उन्हें और हेल्थ मीनिस्टर को लेटर गया था। राजा को बचाने के लिए प्यादे को अपनी जान देनी होती है। तो किसी को तो बकरा बनाना था। जिस प्रकार से मीडिया ने दो दिन हमें फरिश्ता और भगवान का इमेज बना दिया, वह शायद उन्हें अच्छी नहीं लगी। इस वजह से उन्होंने पूरे मुद्दे को डायवर्ड कर दिया।

उन्होंने आगे कहा कि नहीं तो उस वक्त मीडिया और जनता पूछ रही थी कि हेल्थ मीनिस्टर क्या कर रहे हैं? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मामले में कैसे जवाबदेह नहीं है? तो अपने आप को बचाने के लिए किसी ना किसी को मारना था। और बाद में बच्चों की मौत का मामला दबाकर डॉ कफील के इर्द गिर्द की खबरें चलने लगी। कितने बच्चे मरे और उनका क्या हुआ सब लोगों ने बोलना छोड़ दिया और सबका ध्यान भटका दिया गया।

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