दहेज़ को प्रोत्साहन देने वाली वैवाहिक वेबसाइट होंगी प्रतिबंधित

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केंद्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट को सूचित किया है कि उसने राज सरकारों को दहेज़ को प्रोत्साहन देने वाली वैवाहिक वेबसाइटो को प्रतिबंधित करने के लिए दिशानिर्देश जारी कर दिए है। महाराष्ट्र समेत सभी राज्यों को दिशानिर्देश जारी किए है। अब यह पूरी तरह राज्यों की जिम्मेदारी है की वे इस फैसले को लागू करें। वकील प्रिसिलिया सैमुएल की जनहित याचिका पर अपने हलफनामे में केंद्र सरकार ने जवाब दिया।

सरकारी वकील अभय पटकी और एडवोकेट जनरल रोहित देव ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वे दिशानिर्देशों का पूरा पालन करेंगे। पटकी ने बताया कि वे दो हफ्ते के अंदर अपना हलफनामा दायर कर मामले पर हुई कार्रवाई की जानकारी देंगे। इसमें शिकायत निवारण के अलावा जिला स्तर पर परामर्श समितियां बनाना भी शामिल है।

मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस शांतनु केमकर और प्रसाद नाइक की बेंच ने अगली सुनवाई 10 जनवरी को करने का फैसला किया हो।

जनहित याचिका में दावा किया गया है कि 1961 में दहेज़ निवारण कानून के लागू होने के बावजूद सरकार ने इसे प्रभावशाली बनाने के लिए कुछ ख़ास नहीं किया है। याचिका में अपील की गई है कि शादी कराने वाले एजेंटों के गैर कानूनी धंधे पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए।

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