संघ के दावों की खुली पोल, परिजन बोले- ‘इस बात का कोई सबूत नहीं कि शहीद राजगुरु RSS के स्वयंसेवक थे’

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हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा स्वतंत्रता सेनानी शहीद राजगुरु को संघ का स्वयंसेवक बताए जाने के दावों की पोल खुल गई है। दरअसल, पूर्व संघ प्रचारक नरेंद्र सहगल की हाल ही में आई किताब में दावा किया गया है कि राजगुरु संघ की मोहिते बाड़े शाखा के स्वयंसेवक थे। बता दें कि नरेंद्र सहगल हरियाणा में RSS के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के संगठन मंत्री रहे हैं।

Photo: The Economic Times

इस बीच स्वतंत्रता सेनानी राजगुरु को आरएसएस स्वयंसेवक के रूप में दिखाए जाने पर रोष प्रकट करते हुए उनके परिजनों ने कहा है कि राजगुरु के संघ से संबद्ध होने का कोई सबूत नहीं है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व राष्ट्रीय प्रचारक और पत्रकार नरेंद्र सहगल द्वारा लिखी गई किताब में दावा किया गया है कि राजगुरु संघ के ‘स्वयंसेवक’ थे। राजगुरु को भगत सिंह और सुखदेव के साथ 23 मार्च 1931 को फांसी दे दी गई थी।

समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, क्रांतिकारी राजगुरु के भाई के पौत्रों सत्यशील और हर्षवर्धन राजगुरु ने पुणे में कहा कि, ‘इस बारे में कोई सबूत नहीं है कि राजगुरु आरएसएस के स्वयंसेवक थे और न ही हमारे दादा ने कभी हमें इस बारे में बताया।’ उन्होंने कहा कि, ‘हालांकि यह सही है कि नागपुर में उनके (राजगुरु) संक्षिप्त प्रवास के दौरान संघ के एक स्वयंसेवक ने प्रबंध किए थे।’ सत्यशील और हर्षवर्धन राजगुरु ने कहा, ‘राजगुरु समस्त देश के क्रांतिकारी थे और उनका नाम किसी खास संगठन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।’

वरिष्ठ आरएसएस नेता एमजी वैद्य ने कहा कि हो सकता है कि संघ संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में राजगुरु के प्रवास के लिए ‘गोपनीय प्रबंध’ कराए हों। यह पूछे जाने पर कि क्या राजगुरु ने नागपुर में आरएसएस की शाखा मोहिते बाग का दौरा किया था, वैद्य ने कहा कि, ‘आप पूछ रहे हैं कि क्या राजगुरु शाखा आए थे। हो सकता है, वह आए हों। क्या डॉ. हेडगेवार ने उनके लिए कुछ इंतजाम किए थे? हो सकता है उन्होंने किया हो।’

उन्होंने नागपुर में कहा, ‘जब अरुणा आसफ अली ( स्वतंत्रता संग्राम के दौरान) भूमिगत थीं तो वह दिल्ली के आरएसएस पदाधिकारी हंसराज गुप्ता के घर ठहरी थीं।’ वैद्य ने कहा कि, ‘यदि वह ( राजगुरु) आए होंगे तो संभावना है कि डॉ. हेडगेवार ने उनके प्रवास के लिए गोपनीय प्रबंध किए हों। यह संभव है क्योंकि डॉ. हेडगेवार एक क्रांतिकारी थे और क्रांतिकारियों से उनके संबंध थे।’

यह पूछे जाने पर कि क्या कभी संघ की बौद्धिक चर्चाओं में राजगुरु के बारे में चर्चा हुई, आरएसएस के पूर्व बौद्धिक प्रमुख वैद्य ने कहा, ‘कम से कम मैंने इस बारे में नहीं सुना है।’ दरअसल किताब में दावा किया गया है कि नागपुर के हाईस्कूल ‘भोंसले वेदशाला’ के छात्र रहते हुए राजगुरु का संघ संस्थापक हेडगेवार से घनिष्ठ परिचय था। इतना ही नहीं किताब में यह भी दावा किया गया है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस संघ से काफी प्रभावित थे।

इस किताब की भूमिका में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने लिखा है कि, ‘हेडगेवार का जीवन भी भारत की स्वतंत्रता, एकात्मता, अखंडता और परमवैभव के लिए समर्पित देशभक्त का जीवन रहा। पिछले 92 सालों में संघ के स्वयंसेवकों ने लौकिक प्रसिद्धि से दूर रहकर भारत की स्वतंत्रता और सर्वांगीण उन्नति के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है।’ भागवत ने इस किताब की अहमियत बताते हुए लिखा है कि यह किताब उन लोगों को जवाब देगी जो स्वतंत्रता संग्राम में संघ की भूमिका पर सवाल उठाते रहे हैं।

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