छत्तीसगढ़ में लोग दिवाली मनाने केलिए मवेशी बेचने को मजबूर

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छत्तीसगढ़ के ज्यादातर जिलों, तहसीलों में अल्पवर्षा के कारण इस बार ग्रामीणों के पास बेचने लायक अनाज भी नहीं है। बस्तर, सरगुजा में भी हालात ठीक नहीं हैं इसलिए राजा देयारी (दीवाली) मनाने वे बड़ी संख्या में अपने मवेशियों को बेच रहे हैं। इन दिनों दर्जनों ग्रामीण विभिन्न साप्ताहिक बाजारों में बछड़ा से लेकर बकरा बेचने पहुंच रहे हैं।

कुछ जगहों पर किसानों के आत्महत्या तक की खबरे हैं, वहीं मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने सूखा प्रभावित किसानों से आत्महत्या जैसे पीड़ादायक कदम नहीं उठाने की अपील की है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि विचलित होने की जरूरत नहीं है। सरकार प्राकृतिक विपदा की इस घड़ी में हर कदम पर किसानों का साथ देगी।

गौरतलब है कि सूबे में सूखाग्रस्त तहसीलों की संख्या 110 हो गई है। सभी 110 तहसीलों में किसानों और ग्रामीणों की मदद के लिए लगभग चार हजार करोड़ रुपये के राहत पैकेज का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।

बता दें की बारिश कम होने के कारण ग्रामीणों के घर इस बार अन्न का अभाव हो गया है। अधिकांश लोगों को बीज के लायक भी उपज नहीं मिली है। ऐसे में त्यौहार मनाने के लिए मवेशी बेचना मजबूरी हो गई है। इन दिनों दर्जनों ग्रामीण बकरी-बकरा के अलावा बछड़ा बेचने पाकेला, तोकापाल, कोडेनार और जगदलपुर, नानगूर, लोहंडीगुड़ा साप्ताहिक बाजार पहुंचने लगे हैं।

ग्रामीण बछड़ों को आठ सौ से लेकर दो हजार रुपए में बेच रहे हैं वहीं मांग अधिक होने के कारण बकरा-बकरी की इन्हें अच्छी कीमत मिल रही है। इन्हें दो हजार से लेकर आठ हजार तक में बेचा जा रहा है। जो मवेशी दलाल गीदम, तुमनार कटेकल्याण जैसे बाजारों में सक्रिय रहते थे वे इन दिनों उपरोक्त साप्ताहिक बाजारों में नजर आ रहे हैं।

मांझीगुड़ा के सहदेव बघेल, साड़गुड़ के नरसिंह कश्यप ने बताया कि त्यौहारों को बच्चों की खुशी के लिए मनाना उनकी मजबूरी है इसलिए वे बकरी बेचने संजय मार्केट पहुंचे हैं। इधर, बालीकोंटा के आशाराम सुनील कुमार और महादेव ने बताया कि कुछ दलाल मवेशी खरीदने घर तक पहुंचे थे। इसलिए वे गांव में ही अन्य ग्रामीणों के साथ अपने मवेशी बेच दिए हैं। यदि वे ऐसा नहीं करते तो शायद उनके हाथ राजा देयारी मनाने कुछ भी नहीं रहता।

इसी तरह मैदानीं इलाकों में भी स्थितियां निर्मित हो गई हैं। बेमेतरा, बलौदाबाजार इलाके में भी किसान अनाज के अभाव में मवेशी बेचने बड़ी संख्या में बाजार पहुंच रहे हैं।

राज्य सरकार ने राजस्व पुस्तक परिपत्र 6.4 में संशोधन करते हुए सूखा को प्राकृतिक प्रकोप के अंतर्गत सम्मिलित कर लिया है। अब सूखे से जनहानि, पशुहानि व फसल क्षति होने पर प्रभावित हितग्राहियों को सहायता अनुदान दिया जाएगा। राजस्व विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। इसके साथ ही यह लागू भी हो गया है।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने खरीफ फसलों के नजरी आनावारी के आधार 110 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक सूखा प्रभावित किसानों को असिंचित भूमि के लिए प्रति हेक्टेयर छह हजार 800 रुपए और सिंचित भूमि के लिए नौ हजार रुपये की दर से सहायता दी जाएगी।

राज्य सरकार की ओर से कलेक्टरों को भेजे गए परिपत्र में कहा है कि केंद्र सरकार ने सूखा को अब प्राकृतिक आपदा श्रेणी में रखा है तथा 33 फीसदी से अधिक फसल हानि के लिए राजस्व पुस्तक परिपत्र 6.4 में आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है।

राज्य में सूखा के लिए सहायता देने का पहले कोई प्रावधान नहीं था। सभी कलेक्टरों को सूखा प्रभावित क्षेत्र में 33 प्रतिशत से अधिक फसल हानि का सर्वेक्षण कराने कहा गया है।

सरकार हर कदम पर किसानों के साथ : रमन सिंह

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने सूखा प्रभावित किसानों से आत्महत्या जैसे पीड़ादायक कदम नहीं उठाने की अपील की है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि विचलित होने की जरूरत नहीं है। सरकार प्राकृतिक विपदा की इस घड़ी में हर कदम पर किसानों का साथ देगी। उन्होंने कहा है कि मैं स्वयं किसान परिवार से हूं इसलिए किसानों के दर्द को दिल की गहराइयों से महसूस करता हूं। अकाल पीड़ित किसानों की मदद के लिए सरकार पूरी तत्परता से हर संभव कदम उठा रही है।

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