IIMC के पाठ्यक्रम से हटाई गई दिलीप मंडल की किताब ‘मीडिया का अंडरवर्ल्ड’

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देश के प्रख्यात मीडिया इंस्टिट्यूट ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ के मीडिया पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है। यहां पढ़ाई जाने वाली दिलीप मंडल की पुस्तक ‘मीडिया का अंडरवर्ल्ड’ को पाठ्यक्रम से बाहर कर दिया गया हैं। बताया जा रहा है संस्थान की विविधता खत्म करने और एक विशेष विचारधारा को थोपने के उद्देश्य से पाठ्यक्रम में छटनी शुरू कर दी गई है। इसी कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल की किताब ‘मीडिया का अंडरवर्ल्ड’ को पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है।

दिलीप मंडल

पत्रकार दिलीप मंडल ने फेसबुक वाल से अपनी बात को रखा है। उन्होंनें इस बारे में लिखते हुए कहा है कि…शर्मनाक!

भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अधीन काम करने वाले इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC), जिसे पत्रकारिता ट्रेनिंग का देश का सबसे बड़ा संस्थान कहा जाता है, ने अपने सिलेबस से मेरी किताब “मीडिया का अंडरवर्ल्ड” को हटा दिया है।

यह किताब काफी समय से वहां और और कई संस्थानों की रीडिंग्स में शामिल हैं। यहां आप देश सकते हैं कि पिछले साल तक यह किताब IIMC के सिलेबस का हिस्सा रही है। पेड न्यूज पर भारत की यह अकेली किताब है। इस किताब को केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने मीडिया क्षेत्र में देश के सर्वश्रेष्ठ लेखन के लिए भारतेंदु हरिश्चंद्र पुरस्कार दिया है। खुद मंत्री आए थे पुरस्कार देने। इसके लिए मुझे 75,000 रुपए भी सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने दिए हैं।

किसी किताब को सिलेबस में रीडिंग के तौर पर रखना या न रखना, उस संस्थान का विशेषाधिकार है। और इस बारे में मुझे कुछ नहीं कहना है। मेरी चिंता यह भी नहीं है कि किसी एक संस्थान के सिलेबस से हट जाने से मेरी किताब का क्या होगा। यह पुस्तक वहां से आगे बढ़ चुकी है। इसकी 10,000 से ज्यादा कॉपी बिक चुकी है और देश की सैकड़ों लाइब्रेरी में यह है। हर जगह से इसे हटाने में भी सरकार को काफी समय लगेगा।

मैं सत्ता प्रतिष्ठान के सिर्फ उस भय की ओर इशारा कर रहा हूं, जो नहीं चाहता कि लोग पढ़ें। इतने भय के साथ वे कैसे जी रहे होंगे? लिखे हुए शब्द से इतना डर? शर्मनाक!

जबकि बाद में उन्होंने लिखा कि IIMC वाले इतने ‘महान’ हैं कि उन्हें नहीं मालूम कि सिलेबस से मेरी किताब हटाने की वजह से उन्होंने मेरी किताब की तीन-चार हजार कॉपी और बिकने का इंतजाम कर दिया है।

किताब की पब्लिसिटी करने के लिए भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन का आभार। पब्लिसिटी के पैसे नहीं दूंगा।

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