दिग्विजय सिंह ने मोदी सरकार से पूछी राफेल की कीमत, कहा- सच बताया तो चौकीदार जी की चोरी उजागर हो जाएगी

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राफेल विमान को लेकर एक बार फिर से मोदी सरकार पर निशाना साधा है। दिग्विजय सिंह ने राफेल की कीमत को लेकर सरकार से तमाम सवाल भी किए। इससे पहले लोकसभा चुनाव 2019 में ये सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरा था। राहुल गांधी समेत पूरी कांग्रेस इस विमान की डील में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था और पीएम नरेंद्र मोदी को घेरा गया था। बता दें कि, आज दोपहर तक 5 राफेल लड़ाकू विमान अंबाला पहुंचेंगे। अब जब राफेल आ रहा है तो कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कई ट्वीट किए हैं।

दिग्विजय सिंह

दिग्विजय सिंह ने अपने ट्वीट में लिखा, “आख़िर राफेल फाइटर प्लेन आ गया। 126 राफेल खरीदने के लिए कोंग्रेस के नेतृत्व में UPA ने 2012 में फैंसला लिया था और 18 राफेल को छोड़कर कर बाकि भारत सरकार की HAL में निर्माण का प्रावधान था। यह भारत में आत्मनिर्भर होने का प्रमाण था। एक राफ़ेल की क़ीमत 746 करोड़ रुपये तय की गई थी।”

उन्होंने आगे कहा, “मोदी सरकार आने के बाद फ़्रांस के साथ मोदी जी ने बिना रक्षा व वित्त मंत्रालय व केबिनेट कमेटी की मंज़ूरी के नया समझौता कर लिया और HAL का हक़ मार कर निजी कम्पनी को देने का समझौता कर लिया। राष्ट्रीय सुरक्षा को अनदेखी कर 126 राफ़ेल खरीदने के बजाय केवल 36 ख़रीदने का निर्णय ले लिया।”

दिग्विजय सिंह ने अपने ट्वीट में आगे लिखा, “एक राफेल की क़ीमत कांग्रेस सरकार ने 746 करोड़ तय की थी लेकिन “चौकीदार” महोदय कई बार संसद में और संसद के बाहर भी मांग करने के बावजूद आज तक एक राफ़ेल कितने में ख़रीदा है, बताने से बच रहे हैं। क्यों? क्योंकि चौकीदार जी की चोरी उजागर हो जाएगी!! “चौकीदार” जी अब तो उसकी कीमत बता दें!!”

दिग्विजय सिंह ने लिखा कि, “राष्ट्रीय सुरक्षा का आंकलन करते हुए रक्षा मंत्रालय ने 126 राफेल खरीदने की सिफ़ारिश की थी जो UPA ने स्वीकार कर सहमति दी। अब मोदी जी ने 126 के बजाय 36 राफेल खरीदने का फैसला क्यों लिया? यह पूछने पर भी कोई जवाब नहीं। क्या मोदी जी ने राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता नहीं किया?”

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने अपने ट्वीट में आगे कहा, “यदि हम इन प्रश्नों का उत्तर मांगते हैं तो मोदी जी की ट्रोल आर्मी और उनके “कठपुतली” मीडिया एंकर हमें राष्ट्रद्रोही बताते हैं!! क्या प्रजातंत्रीय व्यवस्था में विपक्ष को प्रश्न पूछने का अधिकार नहीं है?”

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