दिल्ली में डीजल टैक्सियों पर रोक का मामला लोकसभा में उठा, सरकार से हस्तक्षेप की मांग

0

दिल्ली में डीजल टैक्सियों के परिचालन पर रोक लगाए जाने का मामला आज लोकसभा में उठा और केंद्र सरकार से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करते हुए उच्चतम न्यायालय में अपील करने की मांग की गयी।
cabs-759

सदन में शून्यकाल में यह मामला उठाते हुए भाजपा के रमेश बिधूड़ी ने उच्चतम न्यायालय के इस आदेश को दिल्ली सरकार की लापरवाही बताया और कहा कि पिछले तीन साल से यह मामला अदालत में लंबित था और उसके बावजूद राज्य सरकार डीजल टैक्सियों का पंजीकरण करती रही।

Also Read:  बजट 2017: भारी हंगामें के बीच संसद से बजट पेश किया गया, वित्‍तमंत्री अरुण जेटली की आर्थिक घोषणाएं

उन्होंने कहा कि दिल्ली में 60 हजार टैक्सियां हैं जिनमें से 27 हजार पंजीकृत डीजल टैक्सियां हैं। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने प्रदूषण के आधार पर इन टैक्सियों के परिचालन पर रोक का जो आदेश जारी किया है वह दिल्ली सरकार की ऑड ईवन की नौटंकी का नतीजा है।

Also Read:  जीत से पता चलता है कि लोग PM मोदी को काम करने वाला व्यक्ति मानते हैं: अमेरिकी विशेषज्ञ

समाचार एजेंसी भाषा की खबर के अनुसार बिधूड़ी ने कहा कि आईआईटी दिल्ली ने भी अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि सर्वाधिक प्रदूषण पावर प्लांट से , इ’ट भट्ठों से और निर्माण गतिविधियों से होता है। उन्होंने बमि’घम यूनिवर्सिटी की एक रिपेार्ट का हवाला देते हुए कहा कि उसने भी कहा है कि वाहनों से केवल 14 से 18 फीसदी प्रदूषण होता है।

Also Read:  चुनाव आयोग की 'आप' को चुनौती कहा, EVM हैकिंग का डेमो विधानसभा में नहीं हैकाथॉन में हैक करके दिखाए

भाजपा सदस्य ने कहा कि आज दिल्ली में 27 हजार परिवार सड़कों पर हैं। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे और उच्चतम न्यायालय में पक्ष रखे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here