दिल्ली में डीजल टैक्सियों पर रोक का मामला लोकसभा में उठा, सरकार से हस्तक्षेप की मांग

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दिल्ली में डीजल टैक्सियों के परिचालन पर रोक लगाए जाने का मामला आज लोकसभा में उठा और केंद्र सरकार से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करते हुए उच्चतम न्यायालय में अपील करने की मांग की गयी।
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सदन में शून्यकाल में यह मामला उठाते हुए भाजपा के रमेश बिधूड़ी ने उच्चतम न्यायालय के इस आदेश को दिल्ली सरकार की लापरवाही बताया और कहा कि पिछले तीन साल से यह मामला अदालत में लंबित था और उसके बावजूद राज्य सरकार डीजल टैक्सियों का पंजीकरण करती रही।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में 60 हजार टैक्सियां हैं जिनमें से 27 हजार पंजीकृत डीजल टैक्सियां हैं। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने प्रदूषण के आधार पर इन टैक्सियों के परिचालन पर रोक का जो आदेश जारी किया है वह दिल्ली सरकार की ऑड ईवन की नौटंकी का नतीजा है।

समाचार एजेंसी भाषा की खबर के अनुसार बिधूड़ी ने कहा कि आईआईटी दिल्ली ने भी अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि सर्वाधिक प्रदूषण पावर प्लांट से , इ’ट भट्ठों से और निर्माण गतिविधियों से होता है। उन्होंने बमि’घम यूनिवर्सिटी की एक रिपेार्ट का हवाला देते हुए कहा कि उसने भी कहा है कि वाहनों से केवल 14 से 18 फीसदी प्रदूषण होता है।

भाजपा सदस्य ने कहा कि आज दिल्ली में 27 हजार परिवार सड़कों पर हैं। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे और उच्चतम न्यायालय में पक्ष रखे।

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