देवरिया बालिका गृह यौन शोषण मामला: आखिर कहां और किस हालत में हैं 18 लड़कियां, दर्जनों बच्चियों को नारकीय जीवन से आजाद कराने वाली बहादुर बच्ची ने बताई दर्दनाक कहानी

0

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में भी शेल्टर होम में बिहार के मुजफ्फरपुर जैसा मामला सामने आने के बाद सरकार से लेकर प्रशासनिक अमले तक के होश उड़ गए हैं। मामला सामने आने के बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिला अधिकारियों को बाल गृह और महिला संरक्षण गृह का व्यापक निरीक्षण करने का निर्देश दिया है। घटना के बाद देवरिया के जिलाधिकारी सुजीत कुमार को हटा दिया गया है। इसके अलावा डीपीओ प्रभात कुमार भी शामिल हैं। वहीं बाल कल्याण अधिकारी रेणुका कुमार से इस मामले पर रिपोर्ट तलब किया गया है।

Photo: pti

बता दें कि रविवार शाम बेतिया बिहार की एक बालिका बालिका गृह से भाग निकली जिसने पुलिस को आपबीती बताई। उसके बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की। हालांकि इस शेल्टर होम को भले ही सील कर दिया गया हो लेकिन सबसे हैरानी की बात यह है कि अभी भी लापता 18 लड़कियों का कोई सुराग नहीं है। शेल्टर चलाने वाले पति-पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया है। कानून की धज्जियां उड़ाते हुए साल 2017 में लाइसेंस रद्द होने और सीबीआई की जांच में गड़बड़ी के बावजूद भी ये शेल्टर होम अवैध तरीके से चल रहा था।

रिपोर्ट के मुताबिक सदर कोतवाली क्षेत्र स्थित मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान द्वारा संचालित बाल गृह बालिका, बाल गृह शिशु और सुधार गृह की मान्यता पर शासन ने रोक लगा दिया था। इसके बाद भी संस्था में बालिकाओं, शिशुओ तथा महिलाओं को अवैध रूप से रखा जाता था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मां विन्ध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं सामाजिक सेवा संस्थान के नाम से चल रहे इस शेल्टर में अनियमितताओं को लेकर सीबीआई जांच चल रही थी। जिसके बाद इसका आर्थिक अनुदान बंद भी कर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद संचालिका हाईकोर्ट का धौंस दिखाकर संस्था को चला रही थी।

ऐसे सामने आया मामला

दरअसल रविवार (5 अगस्त) शाम बेतिया बिहार की एक बालिका बालिका गृह से भाग निकली जिसने पुलिस को आपबीती बताई। जिसके बाद एसपी ने तत्काल कार्रवाई को निर्देश दिया। देर रात में ही फोर्स के साथ बालिका गृह में छापेमारी हुई। पुलिस कार्रवाई में 24 बच्चियों व महिलाओं को वहां से छुड़ाया गया। जबकि 18 बच्चियां अभी भी लापता हैं। वहीं संस्था की संचालिका, उसके पति और बेटे को गिरफ्तार कर लिया गया। एसपी रोहित पी कनय ने बताया कि बच्चियों की उम्र 15 से 18 साल है।

रात में आती थी बड़ी-बड़ी कारें 

बच्चियों ने बातचीत में बताया है कि इनसे गलत कृत्य कराया जा रहा था। बच्चियों ने बताया कि दीदी लोगों को लेने के लिए रात में कार आती थी। जब वह लोग वापस आती थी बहुत रोते हुए आती, पूछने पर कुछ नहीं कहती। बच्चियों ने बताया कि उनसे बहुत काम लिया जाता था, पोछा भी लगाया जाता था। वहीं काम करने से इनकार करने पर उनको मारा पीटा जाता था। फिलहाल पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जांच कमेटी गठित कर दी गई है। सवाल इस बात का भी आखिर इन गाड़ियों में बैठाकर उस पीड़िता को कहां भेजा जाता था।

शेल्टर होम से किसी तरह भागकर दर्जनों बच्चियों को बचाने वाली बच्ची ने पुलिस को बताया कि मैं उस वक्त शेल्टर होम की पहली मंजिल पर थी जब वहां की इनचार्ज गिरिजा त्रिपाठी ने मुझे बुलाया और ग्राउंड फ्लोर की सफाई करने को कहा। बच्ची ने आगे बताया कि इसके बाद त्रिपाठी के पास एक फोन आया और वह बात करने लगीं। जिसके बाद मुझे इस दौरान भागने का मौका मिल गया। मैं बिना एक सेकंड गवाएं वहां से भागकर पुलिस स्टेशन पहुंच गईं।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, बच्ची ने पत्रकारों को बताया कि उससे बड़ी लड़कियों को शाम चार बजे के करीब मैडम जी (गिरिजा) के साथ कार से कहीं ले जाया जाता और वह अगले दिन सुबह ही वापस आती थीं। बच्ची ने बताया कि, “बड़ी मैम ले जाती थी। कभी सफेद, लाल, काली गाड़ी आती थी….चार बजे जाती थी…सुबह आती थी….दीदी सुबह कुछ नहीं कहती थी….उसकी आखं सूज आती थी।”

बहादुर बच्ची ने पुलिस को बताया कि अलग-अलग रंग जैसे लाल, काली और ग्रे कलर की कारें वहां आती थीं और देखने में महंगी लगती थीं। बच्ची ने बताया, ‘दीदी (बड़ी लड़कियां) जब वापस लौटती थीं तो हमें देखकर रोती थीं। छोटी बच्चियों को वहां फर्श की सफाई और दूसरे काम करने के लिए मजबूर किया जाता। अगर हम उनकी बात नहीं मानते तो अलग-अलग लोग हमारे साथ मारपीट करते थे।’

बच्ची की बहादुरी को सलाम

देवरिया के विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान में दर्जनों बच्चियों को नर्क की जिंदगी से आजादी दिलाने वाली बिहार प्रान्त के बेतिया की रहने वाली 10 साल की छोटी बच्ची की बहादुरी को हर कोई सलाम कर रहा है। इस बहादुर बच्ची ने हिम्मत दिखाते हुए खुद को मुक्त तो कराया ही अपने साथ ही दर्जनों लड़कियों को नारकीय जीवन से भी बचाया। रिपोर्ट के मुताबिक 42 में से 24 बच्चियों और महिलाओं को तो इस शेल्टर होम से बचा लिया गया है। हालांकि अभी तक बाकी बच्चियों की जानकारी नहीं मिल पाई है कि आखिर वह कहां और किस हालत में हैं।

जिलाधिकारी हटाए गए, तत्कालीन डीपीओ निलंबित

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देवरिया शहर स्थित बालिका एवं नारी संरक्षण गृह में लड़कियों से कथित रूप से वेश्यावृत्ति कराए जाने के सनसनीखेज खुलासे के बाद सख्त कार्रवाई करते हुए सोमवार को जिलाधिकारी को हटा दिया और तत्कालीन जिला प्रोबेशन अधिकारी (डीपीओ) को निलम्बित कर दिया।

प्रदेश की महिला एवं परिवार कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने इस मामले पर मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद संवाददाताओं को बताया कि योगी के आदेश पर देवरिया के जिलाधिकारी सुजीत कुमार को हटा दिया गया है। वह एक वर्ष से वहां के जिलाधिकारी थे। उन्हें उस संरक्षण गृह को बंद करने के लिये कई बार पत्र लिखे गये लेकिन उन्होंने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। जांच रिपोर्ट आने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।

उन्होंने बताया कि संरक्षण गृह को बंद करने का आदेश दिये जाने से छह महीने बाद तक देवरिया के डीपीओ रहे अभिषेक पाण्डेय को निलम्बित कर दिया गया है। उनके बाद दो अधिकारियों नीरज कुमार और अनूप सिंह को उनके विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। इन दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। रीता ने माना कि इस मामले में स्थानीय प्रशासनिक स्तर पर ढिलाई जरूर हुई है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने महिला एवं बाल कल्याण विभाग की अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार और अपर पुलिस महानिदेशक अंजू गुप्ता को हेलीकॉप्टर से मौके पर भेजा है। वे संरक्षण गृह से मुक्त करायी गयी सभी बच्चियों से अलग-अलग बात करके कल तक रिपोर्ट देंगी। उसके आधार पर कार्रवाई। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

मंत्री ने बताया कि बिहार के मुजफ्फरपुर काण्ड के बाद मुख्यमंत्री योगी ने गत तीन अगस्त को सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने यहां चल रहे समस्त संरक्षण गृहों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिये थे। मगर मुख्यमंत्री ने ऐसा ना होने पर नाराजगी जाहिर की है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने अब सभी जिलाधिकारियों को शासन को अपनी रिपोर्ट देने के लिये 12 घंटे की मोहलत दी है। मालूम हो कि मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान द्वारा देवरिया शहर कोतवाली क्षेत्र में संचालित बाल एवं महिला संरक्षण गृह में रहने वाली एक लड़की ने रविवार को महिला थाने पहुंचकर संरक्षण गृह में रह रही लड़कियों को कार से अक्सर बाहर ले जाये जाने और सुबह लौटने पर उनके रोने की बात बताई थी।

इस शिकायत पर पुलिस ने संबंधित संस्थान परिसर में छापा मारकर 24 लड़कियों को मुक्त कराया। साथ ही संस्थान परिसर को सील करते हुए वहां की अधीक्षका कंचनलता, संचालिका गिरिजा त्रिपाठी तथा उसके पति मोहन त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया। संरक्षण गृह में 42 लड़कियों का पंजीयन कराया गया है जिनमें से 18 अभी लापता हैं। उनकी तलाश की जा रही है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here