मेट्रो के बढ़े हुए किराये से नौकरी करने वालों पर क्या फर्क पड़ा और इसका BJP कनेक्शन

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सरकार को सार्वजनिक परिवहन को अधिक किफायती बनाने पर जोर दे रही है लेकिन इसके विपरित दिल्ली मेट्रो के किराये में बहुत अधिक वृद्धि कर वह यात्रियों पर पड़ने वाले असर को बिल्कुल भी नहीं समझ सकी। बढ़े हुए किराये के कारण लोगों को अन्य परिवहन के वैकल्पिक तरीकों को खोजने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

इसके लिए बहुत सारे लोग ऐप आधारित कैब सेवाओं की पेशकश पर विचार कर रहे है जिसमें साझा सवारी की पेशकश दी जाती है। जबकि मेट्रो में सफर करने वाली 21 वर्षीय निशी गुप्ता कहती है कि सरकार अगर सरकार सार्वजनिक परिवहन के अन्य विकल्पों को चुनने के लिए लिए प्रोत्साहित करने की कोशिश कर रही है, तो फिर मेट्रो को अधिक महंगा क्यों बनाया जा रहा है।

नोएडा की एक कम्पनी में काम करने वाले इरशाद ने बताया कि केवल दिन के चक्कर में ही 120 रुपये उनके कार्ड से काट लिए गए जबकि पहले एक तरफ से 18 रूपये ही लगते थे, लेकिन किराया बढ़ जाने के बाद से 27 रुपये हो गए। जिसे बढ़ा कर एक चक्कर का 60 रुपये कर दिया गया यानी आने जाने का 120 रुपये हो गया। यह अतिरिक्त भार उनके लिए 36 रुपये से बढ़कर 120 रुपये प्रतिदिन हो गया। अब लम्बी दूरी पर 60 रुपये तक का एक तरफ का किराया हो जाने के बाद उन्होंने बस से आने जाने का फैसला लिया जबकि इसके लिए उन्हे आफिस पहंुचने में थोड़ी देरी जरूर होगी लेकिन इसके लिए वह अब घर से और पहले निकलने की सोच रहे है। आम आदमी के जीवन पर इसका बहुत अधिक असर पड़ा है लेकिन सरकार इस पर अभी भी चुप्पी बनाए है।

इसके अलावा आपको बता दे कि मेट्रो के बढ़े हुए किराए ने दिल्ली की 65% महिलाओं को अपनी सुरक्षा खतरे में डालकर सस्ते परिवहन विकल्प लेने को मजबूर होना पड़ेगा। बढ़े हुए किराए को लेकर दिल्ली मेट्रो के अधिकारी किसी की सुनने के लिए तैयार नहीं है। वे नहीं समझ रहे कि इस बढ़े हुए किराए का आम लोगों पर कितना फर्फ पड़ेगा जबकि एक सर्वे से यह बात सामने आई है कि मेट्रो का किराया बढ़ने की वजह से अब 68.23 प्रतिशत महिलाएं अब मेट्रो की जगह दूसरे परिवहन साधनों से यात्रा करने को मजबूर होंगी जो उनके लिए सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं होगा।

बता दे कि दो किलोमीटर तक के लिए 10 रुपये, दो से पांच किलोमीटर तक के लिए 20 रुपये, पांच से 12 किलोमीटर के लिए 30 रुपये, 12 से 21 किलोमीटर के लिए 40 रुपये, 21 से 32 किलोमीटर के लिए 50 रुपये और 32 किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा के लिए 60 रुपये।

दिल्ली मेट्रो के बढ़े हुए किराये के खिलाफ आम आदमी पार्टी ने तुग…

दिल्ली मेट्रो के बढ़े हुए किराये के खिलाफ आम आदमी पार्टी ने तुगलागाबाद मेट्रो स्टेशन पर किया प्रदर्शन

Posted by जनता का रिपोर्टर on Wednesday, October 11, 2017

दिल्ली मेट्रो के बढ़े किराये के खिलाफ बुधवार को आम आदमी पार्टी ने पूरी दिल्ली में ‘किराया सत्याग्रह’ की शुरुआत की। कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग मेट्रो स्टेशनों पर विरोध प्रदर्शन किया और लोगों से बातचीत की। पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं दिल्ली संयोजक गोपाल राय विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन पर मौजूद रहे, जहां उन्होंने न केवल विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया बल्कि मेट्रो में सफर करने वालों से बात भी की। 13 अक्तूबर को आम आदमी पार्टी केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय का घेराव करेगी।

आगे गोपाल राय ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार का शहरी विकास मंत्रालय ही दिल्ली मेट्रो को संभालता है और भाजपा सरकार के इशारे पर ही मेट्रो के किराए में बढ़ोतरी की गई है, भाजपा सरकार की बड़े कॉर्पोरेट के साथ साठगांठ है और अब मेट्रो का किराया बढ़ाकर ओला-उबर को फ़ायदा पहुंचाने की साज़िश केंद्र की भाजपा सरकार कर रही है।

अधिक मुनाफा कमाने के लालच में सरकार आम आदमियों पर किराये के रूप में जो अतिरिक्त बोझ डालती है उस पर सरकार की कारगुजारी की एक अच्छी मिसाल हमारे सामने एयरपोर्ट मेट्रो के रूप में दिखती है। पिछले दिनों एयरपोर्ट मेट्रो का घटा हुआ किराया सरकार की एक बड़ी विफलता को दर्शाता है।

नई दिल्ली से अगर आप एयरपोर्ट मेट्रो लेकर एयरपोर्ट तक जाते थे तो एक तरफ का किराया 150 रुपये था यानी की आने-जाने का 300 रुपये था लेकिन इतने महंगें किराये को लेकर कोई आम आदमी इस मेट्रो से सफर ही नहीं कर रहा था केवल वो लोग ही इस मेट्रो से आ जा रहे थे जिनको प्लेन पकड़ना था। जबकि द्वारका से सैंकड़ो छात्र प्रतिदिन मेट्रो का सफर करते है अपने महाविद्यालय तक पहुंचने के लिए लेकिन वह एयरपोर्ट मेट्रो नहीं लेते थे। बाद में सरकार ने इस बढ़े हुए किराये को 50 प्रतिशत से भी अधिक घटा दिया ताकि लोग इसमें सफर करे। इसके लिए बड़े विज्ञापन हर समय मेट्रो में बजते रहते है लेकिन एयरपोर्ट मेट्रो सुनसान पड़ी है लोग अभी भी उसमें सफर नहीं करते।

आगे गोपाल राय ने कहा कि जब केंद्र सरकार की तरफ से मेट्रो के नुकसान की बात कही गई तो दिल्लीवासियों को राहत देने के लिए दिल्ली सरकार ने अपने हिस्से के अनुसार सालाना 1500 करोड़ रुपये देने की पेशकश भी की थी। लेकिन केंद्र सरकार अपने हिस्से का पैसा देने के लिए तैयार ही नहीं है। इसी का नतीजा है कि मेट्रो का किराया बढ़ गया है। हम जनता के हक में इस बढ़े किराये के खिलाफ अपनी आवाज उठाएंगे। जनता को बताएंगे कि कैसे केंद्र की बीजेपी सरकार उनकी जेब काटने पर अमादा है।

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