मेट्रो में महिलाओं के मुफ्त सफर पर केजरीवाल सरकार के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिका खारिज, कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया

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दिल्ली हाई कोर्ट ने मेट्रो में महिलाओं के लिए मुफ्त सफर के आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिका बुधवार (10 जुलाई) को खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने याचिका को सुनने से यह कहकर इनकार कर दिया कि इसमें कोई दम नहीं है। पीठ ने याचिकाकर्ता पर भी 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। हाई कोर्ट ने कहा कि सरकार को यह तय करना है कि महिलाओं को किराया में छूट दी जाए या नहीं।

अदालत ने याचिकाकर्ता की उस अपील को भी खारिज कर दिया, जिसमें किराया कम करने और टिकट की कीमत मौजूदा छह स्लैब के बजाए इसे 15 स्लैब में करने का अनुरोध किया गया था। पीठ ने कहा, ‘‘किराया तय करना वैधानिक प्रावधान है और यह लागत समेत कई कारकों पर निर्भर करता है, जिसे एक जनहित याचिका में निर्धारित नहीं किया जा सकता।’’

गौरतलब है कि हाल ही में दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने घोषणा की थी कि मेट्रो और डीटीसी की बसों में महिलाओं का सफर मुफ्त किया जाएगा। केजरीवाल ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि अगले 2 से 3 महीने में यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि डीएमआरसी ने इस संदर्थ में उनकी सरकार को प्रस्ताव सौंपा है।

तीन जून को दिल्ली की आदमी पार्टी सरकार ने महिलाओं के लिए मेट्रो और डीटीसी में मुफ्त यात्रा का ऐलान किया था। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मीडिया से कहा था, “महिलाएं सभी डीटीसी बसों, क्लस्टर बसों और दिल्ली मेट्रो में मुफ्त यात्रा का लाभ पा सकती हैं। यह योजना महिलाओं के सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने के लिए है, जो परिवहन का सबसे सुरक्षित साधन माना जाता है।”

उन्होंने कहा कि योजना को दिल्ली सरकार द्वारा सब्सिडी दी जाएगी। सीएम केजरीवाल ने कहा कि हमने केंद्र सरकार से कहा था कि मेट्रो का किराया मत बढ़ाइए, लेकिन वे सहमत नहीं थे। हमने उनसे कहा कि हमारी 50-5- फीसदी की हिस्सेदारी है, इसलिए सब्सिडी का खर्चा भी 50-50 फीसदी उठाना चाहिए। वे इसपर भी सहमत नहीं हुए। दिल्ली सरकार इसका पूरा खर्चा खुद उठाएगी। हमें इसके लिए मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं है।

केजरीवाल के मुताबिक, दिल्ली मेट्रो ने आप सरकार को महिलाओं की मुफ्त यात्रा पर रिपोर्ट भेजी है और किराया निर्धारण समिति से मंजूरी लेने सहित जरूरी तैयारियों के लिए कम से कम आठ महीनों का समय मांगा है। केजरीवाल ने बताया था कि दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (डीएमआरसी) से उनकी सरकार को मिली रिपोर्ट में किराया छूट को वित्तपोषित करने के लिए 1566.64 करोड़ रुपये की सालाना जरूरत की बात कही गई है।

 

1 COMMENT

  1. कोर्ट की जबर्दस्ती की दादागिरी !! पेटिशन ख़ारिज करने का कोई लॉजिक होना चाहिए
    क्या गलत कहा इस व्यक्ति ने अपनी दरखास्त में। अगर दिल्ली सरकार के पास उतना सब पैसा है, मुफ्त में , एक वर्ग को टिकट देने के लिए, तो सारी जनता को ही कुछ बेनिफिट नही देती, मेट्रो के कराये में जनरल कटौती कर के

    लगता है कोर्ट्स भी अपने आकाओं के सामने झुकने में कुसीसीज गलत नहो समझते । पीआईएल पर तो जुर्माना और केसेस को डिले करने में जजस पर कोई पेनलटी नहीं ।।

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