पेड न्यूज मामला: चुनाव आयोग के फैसले पर हाईकोर्ट ने लगाई मुहर, तीन साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे शिवराज के मंत्री नरोत्तम मिश्रा

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पेड न्यूज के मामले में चनाव आयोग द्वारा तीन साल के लिए चुनाव लड़ने में अयोग्य ठहराए गए मध्यप्रदेश के जनसंपर्क और विधि विधायी मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को दिल्ली हाईकोर्ट ने झटका देते हुए शुक्रवार(14 जुलाई) को साफ कर दिया है कि उनकी अयोग्यता बनी रहेगी।

हाईकोर्ट की डबल बेंच ने चुनाव आयोग के अयोग्य करार देने के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले के साथ यह साफ हो गया है कि नरोत्तम मिश्रा राष्ट्रपति चुनाव में मतदान नहीं कर पाएंगे। अब उनकी अपील पर अब रोजाना बेंच सुनवाई करेगी।

बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव में वोट डालने की अनुमित के लिए मिश्रा ने जल्द से जल्द उनकी याचिका पर सुनवाई करने की मांग की थी। न्यायमूर्ति इंद्रमीत कौर की पीठ ने सभी तथ्यों का अध्ययन करने के बाद याचिका को निराधार पाया। साथ ही तीन साल तक चुनाव लड़ने से प्रतिबंध के आदेश को भी हाई कोर्ट ने बरकरार रखा है।

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हाई कोर्ट ने कहा कि जनप्रतिनिधि कानून के तहत चुनाव आयोग द्वारा आदेश पारित करने के दिन से ही मिश्रा को अयोग्य घोषित माना जाएगा। इस आदेश से आगामी चुनावों पर क्या असर पड़ेगा, इससे अदालत का कोई लेना देना नहीं है। अखबार में छपी पेड न्यूज आर्टिकल के बारे में उन्हें जानकारी नहीं थी और उसे ठुकराने व खंडन करने को लेकर कोई कदम नहीं उठाने की बात हाई कोर्ट के गले से नीचे नहीं उतरी।

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हाई कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग ने पाया है कि इन खबरों को छपवाने में परोक्ष रूप से मिश्रा का ही हाथ है। मिश्रा को इन खबरों के पीछे उनके व उनके किसी एजेंट का हाथ नहीं होने की बात साबित करनी होगी। इससे पहले बुधवार को नरोत्तम मिश्रा की अयोग्यता पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को मध्य प्रदेश से दिल्ली हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया था।

क्या है पूरा मामला?

बता दें कि मध्य प्रदेश के मंत्री नरोत्तम मिश्रा को चुनाव आयोग ने अयोग्य घोषित कर दिया है। उन पर 2008 के चुनाव के दौरान पेड न्यूज के आरोप लगाए गए थे। चुनाव आयोग ने उनके तीन साल के लिए चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में 2018 के दिसंबर में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं।

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वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में मिश्रा दतिया से निर्वाचित हुए थे। इस चुनाव में पैसे देकर खबर छपवाने और खर्च का सही ब्यौरा न देने का आरोप लगाते हुए उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी रहे राजेंद्र भारती ने चुनाव आयोग में वर्ष 2009 में शिकायत की थी, जिस पर चुनाव आयोग का 24 जून का फैसला आया। आयोग ने आरोपों को सही पाया और मिश्रा को तीन साल तक चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित कर दिया।

 

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