सदस्य सचिव की नियुक्ति पर एल जी नजीब जंग और मुख्यमंत्री केजरीवाल आमने सामने

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एल जी नजीब जंग द्वारा महिला आयोग कि सदस्य के तौर पर दलजीत कौर की नियुक्ति को असंवैधानिक करार करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने निरस्त कर दिया और उनकी जगह पीपी ढल्ल को इस पद की जिम्मेदारी देखने का काम दिया। केजरीवाल ने कहा कि महिला आयोग एक स्वायत्त संगठन है और उपराज्यपाल उसकी स्वायत्तता पर हमले कर रहे हैं।

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मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को कौर की नियुक्ति को निरस्त कर दिया। इस संबंध में उन्होंने उपराज्यपाल को पांच पेज का एक नोट भी लिखा है। ढल्ल की नियुक्ति की फाइल इस 19 अगस्त को उपराज्यपाल के पास भेजी थी।

इसमें उन्होंने संविधान और महिला आयोग के एक्ट का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि महिला आयोग में सदस्य सचिव नियुक्त करने का अधिकार चुनी हुई सरकार को है। पिछली पांच दिसंबर को उपराज्यपाल ने वह फाइल दिल्ली सरकार को लौटाते हुए यह टिप्पणी की कि ढल्ल के खिलाफ जांच चल रही है।

इस मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार एक पारदर्शी सरकार है। केजरीवाल के मुताबिक भाजपा के लोग शिकायतें कर रहे हैं और उपराज्यपाल व भ्रष्टाचार निरोधक शाखा तुरंत उसपर अमल कर देती है।

मीडिया रिर्पोट्स के अनुसार, जबकि इस पर दिल्ली महिला आयोग ने इस नियुक्ति को असंवैधानिक करार देते हुए दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग पर आरोप लगाया है कि सदस्य सचिव दिलराज कौर की नियुक्ति में एलजी कार्यालय के जरिये की गई जिसमें सरकार से कोई सलाह नहीं लिया गई।  स्वाति मालिवाल के मुताबिक एलजी बार-बार दिल्ली महिला आयोग में नियुक्तियां थोप रहे हैं, स्वाति मालीवाल ने इस मसले पर राष्ट्रपति से हस्तक्षेप कर तुरंत हालातों सुधार की मांग की है।

दिल्ली महिला आयोग का दावा है कि आयोग में बतौर सदस्य सचिव की नियुक्ति डीसीडब्ल्यू एक्ट के अनुसार दिल्ली सरकार की सलाह पर होती है। सरकार जिस नाम को प्रस्तावित करती है, उसी को सदस्य सचिव नियुक्त किया जाता है। इसके तहत आयोग में पहले पीपी ढल को सदस्य सचिव व सलाहकार नियुक्त किया गया था।

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने इस पर कहा कि उपराज्यपाल भाजपा के इशारे पर दिल्ली की चुनी हुई सरकार को पंगु बनाने में लगे हुए हैं। दिल्ली के विकास को भी रोक रहे हैं। केजरीवाल ने दिलराज कौर की नियुक्ति को अवैध करार देते हुए कहा कि पीपी ढल तब तक सदस्य सचिव व सलाहकार बनें रहेंगे जब तक उनकी फाइल पर कोई आखिरी फैसला नहीं हो जाता है।

जब उनका तय कार्यकाल पूरा हो गया तो आयोग ने फिर से उनकी नियुक्ति की फाइल उपराज्यपाल को भेजी थी। आयोग का कहना है कि उपराज्यपाल ने उस फाइल को दबाकर रख लिया और अलका दीवान को ढल की जगह नियुक्त कर दिया। उनके सेवानिवृत होने के बाद दिलराज कौर को नियुक्त कर दिया गया।

 

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