बिहार: चमकी बुखार के कारण अब तक 93 बच्चो की मौत, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन की मौजूदगी में ही एक 5 साल की बच्ची ने तोड़ दिया दम

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बिहार में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी एईएस (चमकी बुखार) से मरने वाले बच्चों का आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक इस बिमारी की चपेट में आने से राज्य में अब तक 93 बच्चों की मौत हो चुकी है।

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समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, मुजफ्फरपुर में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी एईएस के कारण अब तक मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 93 हो गया है। मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि जान गंवाने वाले ज्यादातर बच्चों की उम्र दस साल से कम थी। बहरहाल, अधिकारियों का कहना है कि ज्यादातर बच्चे हाइपोग्लाइसेमिया से पीड़ित थे। हाइपोग्लाइसेमिया में रक्त शर्करा का स्तर बहुत कम हो जाता है और साथ इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन भी होता है।

एक जून के बाद से एसकेएमसीएच अस्पताल में 200 से ज्यादा बच्चों को भर्ती किया गया और केजरीवाल अस्पताल में 100 के करीब बच्चों को ले जाया गया। इन बच्चों को एईएस होने का संदेह था लेकिन ज्यादातर को हाइपोग्लाइसेमिया से पीड़ित पाया गया।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बच्चों की मौत पर दुख जताया है और इस भयानक स्थिति को देखते हुए मरने वालों के परिवार वालों के लिए 4-4 लाख रुपये के मुआवजे का एलान किया है। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि कुमार ने मुजफ्फरपुर में बच्चों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया और मृतक के परिजनों को अनुग्रह राशि के रूप में चार-चार लाख रुपये देने का आदेश दिया।

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ-साथ डॉक्टरों को भी बीमारी से निपटने के लिए हरसंभव उपाय करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने संदिग्ध एक्यूट इन्सैफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से पीड़ित बच्चों के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना की।

इसी बीच, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन रविवार को बिहार पहुंचे और अस्पताल का जायजा। मुजफ्फरपुर में हालत इतने भयानक हैं कि आज हालात का जायजा लेने पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री की मौजूदगी में ही एक पांच साल की बच्ची ने इस बीमारी से दम तोड़ दिया। डॉ हर्षवर्धन बिहार में एक्यूट इंसिफेलाइटिस सिंड्रोम या चमकी बुखार के बढ़ रहे मामलों की जानकारी लेने और मौजूदा हालात की समीक्षा करने के लिए आए हैं।

गौरतलब है कि बिहार के कई जिलों में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी एईएस का कहर जारी है। बिहार में इसे चमकी बुखार भी कहा जाता है। बच्चों की मौतों पर नीतीश सरकार घिरती हुई नजर आ रहीं है। चमकी बुखार के कहर के चलते अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। एईएस के प्रकोप से मरने वाले ज्यादातर बच्चे समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के हैं। (इंपुट: भाषा के साथ)

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