DDCA घोटाला: जेटली ने 6 AAP नेताओं के खिलाफ अभियोग जारी किया, कोर्ट में अगली सुनवाई Jan 5 को

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केंद्रीय गृहमंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को दिल्ली की एक अदालत में आम आदमी पार्टी (AAP)  के 6 नेताओं पर मानहानी का केस दर्ज कराया है।

इसमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, आशुतोश, संजय सिंह, कुमार विश्वास, राघव चड्डा और दीपक वाजपेयी के नाम हैं। इसका कारण इन नेताओं द्वारा पूर्व DDCA अध्यक्ष अरुण जेटली पर DDCA में हुए घोटाले में लिप्त होना बताया जाता है।

इस मामले की सुनवाई करते हुए पटियाला हाऊस कोर्ट ने आगामी 5 जनवरी की तारीख दी है, जिससे की शिकायत को रिकार्ड किया जा सके।

वहीं सोमवार को ही दिल्ली सरकार ने गोपाल सुब्रह्मनियम के नेतृत्व में DDCA में हुए अनियमितताओं की जांच के लिए एक आयोग गठित की है।

जबकि बीजेपी एमपी कीर्ति आजाद ने 1999-2013 के बीच 13 सालों तक DDCA के अध्यक्ष रहे जेटली पर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मेरे ऊपर भी जेटली को मानहानी का केस दर्ज कराना चाहिए क्योंकि वो मैं ही हूं जिसने इस मुद्दे को उछाला है।

आजाद ने ट्वीट कर कहा कि “मेरा नाम क्यों हटा दिया @arunjaitley# आप ने मेरे लेटर्स देखे थे, मुझ पर करो न केस, रजिस्टर्ड पोस्ट से मैं ने भेजे थे।”

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वहीं बीजेपी का एक धरा जेटली के समर्थन में ऊतर गया है। वहीं बीजेपी के निष्कासित एमपी राम जेठमलानी ने कहा, “निश्चित रूप से एक जांच होनी चाहिए।”

वहीं, केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा,  “अरुण जेटली जी के खिलाफ लगे आरोप आधारहीन हैं, और यह अच्छा हुआ कि मानहानी का केस दर्ज कराया गया है”।

इसके साथ ही राज्यवर्धन सिंह राठौर अन्य बीजेपी नेताओ ने ट्वीट कर कहा, “बीजेपी और अरुण जेटली जी किसी भी तरह के जांच से भयभीत नहीं है, जेटली जी के के उच्च स्तरिय राजनीति को सभी लोग जानते हैं।”

वहीं, जेटली के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि DDCA अध्यक्ष के तौर पर जेटली ने 13 सालों के अपने कार्यकाल में एक भी पैसा नहीं लिया है।

वहीं बीजेपी के वरिष्ठ नेता वेंकैया नायडू, स्मृति ईरानी, वी. के. मलहोत्रा भी जेटली के समर्थन में पटियाला हाऊस कोर्ट में मौजूद रहे।

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इसके साथ ही कांग्रेस द्वारा लोकसभा में पार्लियामेंट्री जांच की मांग को ठुकराते हुए जेटली ने कहा कि यह आरोप बिल्कुल बेबुनियाद है और आधारहीन है।

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जेटली के इस बयान से असहमत कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने लोकसभा से वॉकआऊट कर गया।

वहीं, लोकसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए कांग्रेस नेता के. सी वेनुगोपाल ने कहा कि जेटली DDCA में हुए अनियमितता को लेकर सजग थे और वह भी इस घोटाले में शामिल हैं।

इसलिए उन्होंने दोनों सदन के तरफ से एक साथ जांच की मांग की है।

वहीं, संसदीय कार्य राज्यमंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि कांग्रेस बेवजह वित्तमंत्री अरुण जेटली पर व्यक्तिगत हमला कर रहे हैं।

जेटली ने प्रश्न के जवाब में कहा कि दिल्ली के पास अपना कोई क्रिकेट का स्टेडियम नहीं था। जेटली ने कहा, “हम ने राष्ट्रीय राजधानी को एक प्रोपर स्टेडियम दिलवाया।

जेटली ने कहा कि DDCA ने 43 कॉरपोरेट के सहयोग से दिल्ली में फिरोजशाह कोटला मैदान बना। जहां दस साल के लिए एक लाख रुपये में टिकट बेचे गए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि DDCA ने बाकि के 35 करोड़ रुपये स्टेडियम में सीगनेज के लिए खर्च कर दिए।

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उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने बड़े स्टेडियम के लिए 50 करोड़ रुपये का ऑफर किया था।

जेटली ने कहा कि इंजिनियर्स इंडिया लिमिटेड को टेंडर दिया गया था जिसके द्वारा 57 करोड़ रुपये में से 43 करोड़ रुपये का कार्य किया गया।

जेटली ने कहा कि स्टेडियम पर पूरा खर्च 114 करोड़ रुपये रहा।

वहीं कांग्रेस को याद दिलाते हुए कहा कि जवाहरलाल स्टेडियम के पुननिर्माण में  900 करोड़ रुपये का खर्च किया और यूपीए सरकार के कार्यकाल में 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स में घोटाला हुआ।

इसके साथ ही जेटली ने कहा कि सिरियस फ्रॉड इनवेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) ने भी इस खर्च को गलत नहीं कहा है।

जेटली ने कहा यह आरोप बिल्कुल बेबुनियाद है, गलत है।

यही कारण रहा कि लोकसभा की कार्यवाही के साथ-साथ राज्यसभा की कार्यवाही भी बाधित हुई। क्योंकि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर अरुण जेटली का इस्तिफा मांग रहे हैं।

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