लोकसभा चुनाव 2019: कैराना में दलितों को वोट डालने की नहीं दी गई अनुमति, मतदाताओं ने फूट-फूटकर रोते हुए सुनाई आपबीती

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दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का सबसे बड़ा महापर्व गुरुवार (11 अप्रैल) से शुरू हो गया है। लोकसभा चुनाव के पहले चरण में 20 राज्यों की 91 लोकसभा सीटों और चार राज्यों की विधानसभा सीटों पर गुरुवार सुबह सात बजे मतदान शुरू हो गया। 91 लोकसभा सीटों पर कुल 1279 उम्मीदवार मैदान में हैं। मतदान केंद्रो पर समय से पहले से ही लोगों की लाइन नजर आ रही थी। सुरक्षा के लिए पूरे चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं। आंध्र प्रदेश, सिक्किम, ओडिशा और अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा चुनावों के लिए भी गुरुवार को ही मतदान हो रहा है।

लोकसभा चुनाव के पहले चरण के तहत पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आठ सीटों के लिए गुरुवार दोपहर एक बजे तक करीब 38.78 फीसदी मतदान हुआ है। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, मतदान सुबह सात बजे शुरू हुआ। दोपहर एक बजे तक 38.78 फीसदी मतदान हुआ है।

दोपहर एक बजे तक 41.60 प्रतिशत मतदान सहारनपुर में हुआ, जबकि गाजियाबाद में 33.20 प्रतिशत, मुजफ्फरनगर में 37.60 प्रतिशत, बिजनौर में 40.80 प्रतिशत, कैराना में 39.80 प्रतिशत, मेरठ में 40.60 प्रतिशत, गौतमबुद्ध नगर में 38.60 प्रतिशत, बागपत में 38 प्रतिशत जबकि बिजनौर में 39.80 प्रतिशत मतदान हुआ।

इस बीच पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कैराना से हैरान करने वाली खबर आ रही है। कैराना में कुछ दलित मतदाताओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें वोट डालने की अनुमित नहीं दी गई। फर्स्टपोस्ट के मुताबिक, शामली नया बाजार के रहने वाले एक मतदाता ने रोते हुए बताया कि बूथ संख्या 46 पर जब वह वोट डालने पहुंचा तो उसे मतदान करने की अनुमति नहीं दी गई।

फर्स्ट पोस्ट के रिपोर्टर को मतदाता ने बताया कि, ‘मतदाता लिस्ट में नाम होने के बावजूद बूथ संख्या 46 पर दलित होने की वजह से उसे मतदान नहीं करने दिया गया।’ मतदाता ने आरोप लगाया कि, ‘दलित होने के कारण उनको वोट नहीं डालने दिया जा रहा है।’ ये सब बताते हुए कैमरे पर ही दलित व्यक्ति फूट फूटकर रोने लगा। मतदाता ने कहा कि पोल अधिकारियों ने कहा है कि दलित की वोट नहीं पड़ेगी। इस व्यक्ति के साथ उसकी पत्नी भी साथ में मौजूद थी। दोनों मतदाता अपने पोलिंग बूथ के बाहर मतदान पर्ची के साथ मौजूद थे।

इस वीडियो को शेयर करते हुए उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने नाराजगी व्यक्त की है। अखिलेश ने ट्वीट कर लिखा, “दलित भाइयों व बहनों को वोट डालने से रोकना जुर्म है और पाप भी: जुर्म, क्योंकि मतदान हर नागरिक का बुनियादी अधिकार है पाप, क्योंकि केवल मतदान ही लोगों के सब फ़र्क़ एक दिन के लिए मिटा देता है अब भाजपा के नेता खुलकर कह रहे हैं कि यह देश सबका नहीं है और लोगों में नफ़रत फैला रहे हैं।”

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हुए मतदान में प्रारंभ से ही लोगों का जोशो-खरोश देखने को मिल रहा है। मतदान शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है। वोट शाम छह बजे तक पड़ेंगे। पहले चरण में लगभग डेढ करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इनमें 82, 24, 000 पुरुष तथा 68, 39, 000 महिलाएं शामिल हैं। इस चरण के लिए कुल 6716 मतदान केंद्र और 16581 मतदेय स्थल बनाए गए हैं।

पहले चरण के चुनाव में केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह (गाजियाबाद) तथा महेश शर्मा (गौतम बुद्ध नगर) के साथ साथ रालोद प्रमुख अजित सिंह (मुजफ्फरनगर) और उनके बेटे जयंत चौधरी (बागपत) समेत कई दिग्गजों की किस्मत दांव पर लगी है।

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