दलितों पर अत्याचार के मामले में उत्तर प्रदेश का रिर्काड शीर्ष पर, देखिए आंकड़े

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साल के शुरुआती महीनों मे दलित उत्पीड़न के सैकड़ों मामले सामने आए हैं। दलितों के साथ मध्य प्रदेश के दमोह में मारपीट का मामला हो या हरियाणा के फरीदाबाद में पंचायत चुनाव में वोट न देने पर दलितों की पिटाई का दबंगों ने कानून की धज्जियां उड़ाते हुए दलितों पर अत्याचार किया

लेकिन दलितों पर हुए हमलों का सही रिर्काड सामने आया है। साल 2015 में अनुसूचित जाति के समुदाय पर अत्याचार से जुड़े सबसे अधिक 8,358 मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए, जबकि राजस्थान में 6,998 और बिहार में 6,438 मामले दर्ज किए गए। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आज जारी आंकड़ों में यह खुलासा हुआ है।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि राष्ट्रीय स्तर पर हालांकि 2014 की तुलना में 2015 में अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों पर अत्याचार के मामलों में 4.4 प्रतिशत की कमी आई है। वर्ष 2015 में दलितों पर अत्याचार के 45,003 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2014 में यह संख्या 47,064 थी।

एनसीआरबी के आंकड़ों से पता चलता है कि केन्द्र शासित प्रदेशों में इस वर्ग में राष्ट्रीय राजधानी में सबसे अधिक 54 मामले दर्ज किए गए, जबकि पुदुचेरी में पांच, दमन और दीव में दो.दो और चंडीगढ़ में एक मामला दर्ज किया गया।

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