शिलांग हिंसा: तीसरे दिन भी हालात तनावपूर्ण, सेना ने 500 से ज्यादा लोगों को बचाया, आज 7 घंटे के लिए कर्फ्यू में दी गई ढील लेकिन इंटरनेट सेवाओं पर रोक जारी

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मेघालय की राजधानी शिलांग में गुरुवार (31 मई) को एक बस खलासी (ड्राइवर का सहायक) के साथ स्थानीय लोगों की मारपीट के चलके भड़की हिंसा ने पूरे शहर को अपनी चपेट में ले लिया है। हिंसा के तीन दिन बीत जाने के बाद भी शहर का तनाव कायम है। हालांकि शिलांग के कर्फ्यू प्रभावित क्षेत्रों में रविवार को सुबह 8 बजे से लेकर 3 बजे तक सात घंटे के लिए इसमें ढील दी गई है, लेकिन प्रतिबंध जारी रहेंगे। हालांकि इलाके में दोपहर 3 बजे दोबारा कर्फ्यू लगा दिया गया है।

PHOTO: PTI

ईस्ट खासी हिल्स जिले के प्रभारी उपायुक्त पीटर एस.दखार ने बताया, “लुमडिंगजरी पुलिस थाने और कैंटोनमेंट बीट हाउस क्षेत्रों में रविवार को सुबह आठ बजे से दोपहर तीन बजे तक कर्फ्यू में ढील दी गई है ताकि इस दौरान लोग अपनी जरूरत का सामान ला सकें।” दखार ने कहा कि मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर रोक जारी रहेगी। इसके अलावा जिले में सभी पेट्रोल पंपों से खुले जेरीकन, बोतलों और अन्य कंटेनरों में पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर भी रोक है

इससे पहले, शनिवार को शहर के विभिन्न इलाकों में हिंसक झड़पें हुईं। शनिवार को शिलांग के कुछ हिस्सों में रात भर चली हिंसा के दौरान उग्र भीड़ ने एक दुकान और एक मकान को आग के हवाले कर दिया और कम से कम पांच वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया। इस हिंसा में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी घायल हो गया। ड्यूटी पर मौजूद एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस अधीक्षक (शहर) स्टीफन रिंजा पर एक रॉड से वार किया गया जिसके बाद उन्हें शिलांग सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया।

हिंसा में पुलिसकर्मी समेत कम से कम 10 लोग घायल हो गए जिसके बाद इलाके में कथित तौर पर अवैध रूप से रह रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग उठने लगी। वहीं शहर के अशांत मोटफ्रन इलाके में पत्थरबाजों ने राज्य पुलिसकर्मियों पर हमला किया। अधिकारी ने बताया कि दंगाईयों को हटाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए लेकिन दूसरे हिस्से के लोगों ने इसे पुलिस की गोलीबारी समझ लिया।

NDTV के मुताबिक इन सबके बीच सेना ने 500 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला और कैंट इलाके में पहुंचाया है। रक्षा विभाग के प्रवक्ता रत्नाकर सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने सेना से आग्रह किया कि प्रभावित इलाकों में फ्लैग मार्च करें। अभी तक सेना ने प्रभावित इलाकों से 500 लोगों को बाहर सुरक्षित निकाला है इनमें 200 महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि बचाए गए लोगों को भोजन और पानी दिया गया है और सेना की छावनी में ही रखा गया है। वहीं सेना की छावनी में 101 एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल डी एस आहूजा ने प्रभावित लोगों से मुलाकात की।

समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक पूर्वी खासी हिल्स के जिला अधिकारियों ने बताया कि कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे शहर में शुक्रवार रात 10 बजे से सुबह के पांच बजे तक कर्फ्यू लगाया गया। उन्होंने बताया कि तीन स्थानीय लड़कों के साथ हुई मारपीट में शामिल एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके साथियों की तलाश की जा रही है। अफवाहों को रोकने के लिए पूरे शहर में इंटरनेट सेवाओं को आज भी निलंबित रखा गया है। हालात को ध्यान में रखते हुए सेना को सतर्क कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की है। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने और शिलांग में स्थिति सामान्य बनाने की अपील की। इस बीच खासी छात्र संघ (केएसयू), फेडरेशन ऑफ खासी जयंतिया एंड गारो पीपुल (एफकेजेजीपी) और हनीट्रेप यूथ काउंसिल ने स्थानीय लड़कों के साथ मारपीट में शामिल लोगों को सजा दिलाने और थेम मेटोर में अवैध रूप से रह रहे लोगों को हटाने की मांग की।

जानिए, कैसे शुरू हुआ विवाद?

ABP न्यूज के मुताबिक विवाद की मूल वजह है बड़ा बाजार इलाके में कथित तौर पर एक निजी ट्रेवलर की बस चलाने वाले एक खासी समुदाय के ड्राइवर ने पंजाबी मूल की एक लड़की के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की। उसके बाद लड़की के जानने वालों ने उस लड़के की बुरी तरह से पिटाई कर दी। उस वक्त मामला पुलिस में पहुंचा तो शांत हो गया लेकिन रात होते होते आगजनी और तोड़फोड़ शुरू हो गई। शिलॉन्ग के 101 या कहें आर्मी कैंट इलाके के आसपास तकरीबन 200 पंजाबी परिवार रहते हैं, जिन्हें सुरक्षा की दृष्टि से आर्मी कैंट में ठहराया गया है।

वहीं समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक गुरुवार को थेम मेटोर इलाके में स्थानीय लोगों के एक समूह ने बस के एक सहायक से मारपीट की थी जिसके बाद झड़प शुरू हो गई। अधिकारियों ने बताया कि इस झड़प ने तब और उग्र रूप ले लिया जब सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैलाई गई कि घायल सहायक की मौत हो गई जिससे थेम मेटोर में बस चालकों का समूह इकट्ठा हो गया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। बस सहायक और तीन अन्य घायलों को अस्पताल ले जाया गया और प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

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