बाबरी मस्जिद विध्वंस मामला: आडवाणी, जोशी, उमा समेत सभी 12 आरोपियों पर आपराधिक साजिश का आरोप तय

0
अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत अन्य सभी 12 आरोपियों पर आपराधित साजिश के तहत आरोप तय हो गया गया है। CBI कोर्ट ने आडवाणी समेत अन्य 12 आरोपियों की आरोप खत्म करने की मांग करने वाली अर्जी को खारिज कर दी। अब इन सभी के खिलाफ आपराधिक साजिश का केस चलेगा।
Babri case
मंगलवार(30 मई) को विशेष सीबीआई अदालत ने आरोपियों के खिलाफ धारा 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत आरोप तय किए। इससे पहले कोर्ट ने सभी आरोपियों को 20 हजार के निजी मुचलके पर जमानत दे दी थी, हालांकि सभी आरोपियों ने अदालत से आरोपों को खारिज करने का आग्रह किया था, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। आरोपियों का कहना था कि मस्जिद गिराए जाने में उनकी कोई भूमिका नहीं है।
https://youtu.be/29YCvdZ7x2Y
बीजेपी के इन तीन बड़े नेताओं के अलावा विनय कटियार, विहिप नेता विष्णु हरि डालमिया और हिंदुत्ववादी नेता साध्वी ऋतंभरा शामिल हैं। इससे पहले बीजेपी नेता आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत सभी आरोपी सीबीआई की विशेष अदालत के सामने पेश हुए। सीबीआई के स्पेशल जज एस के यादव ने बीजेपी नेता समेत सभी आरोपियों को अदालत में व्यक्तिगत रुप से पेश होने का आदेश दिया था।

बता दें कि इससे पहले बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 19 अप्रैल को बड़ा फैसला दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि बीजेपी के सीनियर नेता लालकृष्ण आडवाणी(89), मुरली मनोहर जोशी(83) और उमा भारती(58) समेत 13 अन्य नेताओं पर आपराधिक साजिश का केस चलेगा।

साथ ही कोर्ट ने मामले की सुनवाई रोजाना कराने और दो साल में सुनवाई समाप्त करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस मामले से जुड़े दो मुकदमे एक साथ चलाने के निर्देश दिए हैं। इनमें से एक मामला लखनऊ में है, दूसरा रायबरेली में।
इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि फैसला आने तक जज का ट्रांसफर नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बीजेपी नेता कल्याण सिंह जब तक राज्यपाल के पद पर हैं, उनके खिलाफ मुकदमा नहीं चल सकता। बता दें कि राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, उसी समय ढांचा ढहाया गया था।

क्या है पूरा मामला

6 दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद गिराने को लेकर दो मामले दर्ज किए गए थे। एक मामला (केस नंबर 197) कार सेवकों के खिलाफ था, जबकि दूसरा मामला (केस नंबर 198) मंच पर मौजूद नेताओं के खिलाफ। केस नंबर 197 के लिए हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से इजाजत लेकर ट्रायल के लिए लखनऊ में दो स्पेशल कोर्ट बनाए गए, जबकि 198 का मामला रायबरेली में चलाया गया।

केस नंबर 197 की जांच सीबीआई को दी गई, जबकि 198 की जांच यूपी सीआईडी ने की थी। केस नंबर 198 के तहत रायबरेली में चल रहे मामले में नेताओं पर धारा 120 B नहीं लगाई गई थी लेकिन बाद में आपराधिक साजिश की धारा जोड़ने की कोर्ट में अर्जी लगाई। कोर्ट ने इसकी इजाजत दे दी।

हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा गया कि रायबरेली केस को भी लखनऊ लाया जाए। हाई कोर्ट ने मना कर दिया और कहा कि यह केस ट्रांसफर नहीं हो सकता, क्योंकि नियम के तहत 198 के लिए चीफ जस्टिस से मंजूरी नहीं ली गई। इसके बाद रायबरेली में चल रहे मामले में आडवाणी समेत अन्य नेताओं पर साजिश का आरोप हटा दिया गया।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 20 मई 2010 के आदेश में ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराया। इस फैसले को सीबीआई ने 2011 में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। चुनौती देने में आठ महीने की देरी की गई। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 19 अप्रैल 2017 को सीबीआई अदालत से कहा था कि वह मामले में आरोपियों के खिलाफ साजिश के आरोप भी जोडे़।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here