CBI Vs CBI मामला: कोर्ट ने सीबीआई को लगाई फटकार, पूछा- क्यों नहीं कराया राकेश अस्थाना का लाई डिटेक्टर टेस्ट?

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दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार (19 फरवरी) को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से पूछा कि एजेंसी के पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना का उसने मनोवैज्ञानिक एवं लाइ डिटेक्टर परीक्षण क्यों नहीं करवाया। मामले की अगली सुनवाई अब 28 फरवरी को होगी।

राकेश अस्थाना
फाइल फोटो

गौरतलब है कि रितखोरी के एक मामले में राकेश अस्थाना को हाल में क्लीन चिट दी गई। इसके साथ ही सीबीआई के विशेष न्यायाधीश संजीव अग्रवाल ने शुरुआत में जांच करने वाले अधिकारी अजय कुमार बस्सी को 28 फरवरी को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया। इस मामले में सीबीआई की जांच पर अदालत ने पिछले सप्ताह बुधवार को नाराजगी जाहिर की थी और पूछा था कि जिन आरोपियों की इसमें बड़ी भूमिका है वे खुले क्यों घूम रहे हैं जबकि जांच एजेंसी अपने खुद के डीएसपी को गिरफ्तार कर चुकी है।

सीबीआई ने अस्थाना और डीएसपी देवेन्द्र कुमार को 2018 में गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें जमानत दे दी गई थी। दोनों को मामले में आरोपी बनाने के पर्याप्त सबूत नहीं होने के कारण इनके नाम आरोपपत्र के कॉलम 12 में लिखे गए थे। सीबीआई ने हैदराबाद के कारोबारी सतीश सना की शिकायत के आधार पर अस्थाना के खिलाफ मामला दर्ज किया था। मीट कारोबारी मोइन कुरैशी के खिलाफ 2017 के मामले में सना पर भी जांच चल रही है।

सीबीआई ने घूसखोरी मामले में दुबई के कारोबारी और कथित बिचौलिये मनोज प्रसाद के खिलाफ दिल्ली की विशेष कोर्ट में चार्जशीट दायर की। इस मामले में सीबीआई के पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना का भी नाम शामिल था, लेकिन एजेंसी ने अस्थाना को क्लीन चिट दी थी। सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि कोई साक्ष्य नहीं है जो दिखाता है कि अस्थाना ने कभी धनशोधन मामले में शिकायतकर्ता सतीशबाबू को बचाने के लिए कोई रिश्वत मांगी या दी। यह घूसखोरी मामला विवादास्पद मीट निर्यातक मोइन कुरैशी से जुड़ा है। सीबीआई ने यह भी निष्कर्ष निकाला कि अस्थाना और प्रसाद के बीच कोई संबंध नहीं है। (इंपुट: भाषा के साथ)

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