बाबरी मस्जिद विध्वंस मामला: कोर्ट ने आडवाणी, जोशी और उमा भारती समेत सभी आरोपियों को पेश होने का दिया आदेश

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बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने गुरुवार(25 मई) को भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) के सीनियर नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और केंद्रीय मंत्री उमा भारती समेत सभी आरोपियों को 30 मई को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। अब इस केस से जुड़े सभी आरोपियों को भी 30 मई को पेशी के लिए मौजूद रहना होगा।Babri Masjid

दरअसल, अदालत चाहती है कि आरोप तय होते वक्त सभी आरोपी कोर्ट में मौजूद रहें। कोर्ट ने आदेश देते हुए कहा कि अगली सुनवाई में इनके खिलाफ आरोप तय होंगे लिहाजा सभी आरोपियों को अगले हफ्ते सुनवाई में मौजूद रहना होगा। इसके साथ ही जज ने यह भी कहा कि किसी को पेशी से छूट नहीं दी जा सकती।

इससे पहले सीबीआई की विशेष अदालत ने 20 मई से राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील माने जाने वाले इस मामले की रोजाना सुनवाई शुरू की है और इस मामले में आरोपी पांच विश्व हिन्दू परिषद के नेताओं को जमानत दे दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने 19 अप्रैल को सीबीआई की विशेष अदालत को निर्देश दिया था कि वह इस मामले की सुनवाई एक महीने के अंदर शुरू करे तथा दो साल के अंदर अपना फैसला दे। सीबीआई अदालत ने पहले इस मामले में छह आरोपियों को समन जारी कर तलब किया था, जिसमे से राम बिलास वेदांती समेत पांच अदालत में हाजिर हुए और जमानत हासिल कर ली थी।

वेदांती के अलावा शनिवार (20 मई) को जो विहिप नेता अदालत में हाजिर हुए उनमें चंपत राय, बैकुंठ लाल शर्मा, मंहत नृत्य गोपाल दास और धर्मदास महाराज शामिल थे, जिन्हें सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायमूर्ति एस के यादव ने जमानत दे दी। साथ ही विशेष अदालत ने इस मामले में छठे आरोपी सतीश प्रधान को भी बुधवार(24 मई) को जमानत दे दी।

बता दें कि इससे पहले बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 19 अप्रैल को बड़ा फैसला दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) के सीनियर नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत 13 अन्य नेताओं पर आपराधिक साजिश का केस चलेगा।

 

 

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस मामले से जुड़े दो मुकदमे एक साथ चलाने के निर्देश दिए थे। इनमें से एक मामला लखनऊ में है, दूसरा रायबरेली में। कोर्ट ने कहा था कि दोनों मामलों की साझा सुनवाई रोजाना लखनऊ की कोर्ट में हो। साथ ही कोर्ट ने दो साल के भीतर दोनों मामले निपटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि फैसला आने तक जज का ट्रांसफर नहीं होना चाहिए।

 

 

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