VIP मूवमेंट के कारण 13 फ्लाइट्स डायवर्ट: आम जनता भुगत रही है PM मोदी के चुनावी अभियान की सजा

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दिल्ली इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शनिवार (5 नवंबर) की शाम यात्रियों के लिए मुसीबत भरी रही। वीवीआईपी मूवमेंट के चलते कई फ्लाइट्स में देरी हुई तो कुछ को डायवर्ट करना पड़ा। फ्लाइट्स में देरी होने की वजह से एयरपोर्ट पर इंतजार करने वाले यात्रियों की संख्या भी काफी बढ़ती गई और दिल्ली एअरपोर्ट में अफरा-तफरी का माहौल हो गया है।न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक फ्लाइट्स में डिले होने का कारण वीआईपी चार्टर प्लेन की लैंडिंग बताया जा रहा है। वीआईपी चार्टर प्लेन की लैंडिग की वजह से शाम साढ़े पांच से सवा छह बजे के बीच दो अंतर्राष्ट्रीय और 11 घरेलू उड़ानों को डायवर्ट किया गया।

इसके बाद सिलसिलेवार तरीके से 50 से ज्यादा फ्लाइट इससे प्रभावित हुईं। लगभग हर फ्लाइट में डेढ़ घंटे से भी ज्यादा की देरी हुई। जेट एअरवेज के ऑफिशियल ट्वीटर हैंडल से ट्वीट कर इसकी जानकारी दी गई। जेट एअरवेज ने ट्वीट कर लिखा, वीवीआईपी मूवमेंट की वजह से हमारी कुछ फ्लाइट के टाइमिंग पर असर पड़ा है।

इसके अलावा स्पाइस जेट की तरफ से भी इस बात की जानकारी दी गई है।

आखिर किस VIP की वजह से लोगों को हुई परेशानी?

शनिवार रात एयरपोर्ट पर इस बात लेकर चर्चा जोरों पर था कि आखिर वह VIP कौन था, जिसकी वजह से हजारों मुसाफिरों को परेशानियों का सामना करना पड़ा और एयरलाइन्सों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना। नाम न बताने की शर्त पर एयरपोर्ट के एक अधिकारी ने ‘जनता का रिपोर्टर’ से बातचीत में कहा कि वह वीआईआई कोई और नहीं बल्कि देश के ‘शहंशाह’ थे।

अधिकारी ने कहा कि मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहता हूं, लेकिन मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि वह वीआईपी देश के शहंशाह (सम्राट) थे, जिनकी वजह से कई फ्लाइट्स में देरी हुई है। बता दें कि संयोग से हिमाचल प्रदेश में चुनावी रैलियों को संबोधित करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आने वाली फ्लाइट का समय इसी के आसपास था। हिमाचल प्रदेश के रैट जिले में प्रधानमंत्री का भाषण करीब 4.30 बजे समाप्त हुआ था।

‘जनता का रिपोर्टर’ से बातचीत में एक पायलट ने कहा कि प्रधानमंत्री या वीआईपी लोगों की उड़ान की वजह से पहले भी फ्लाइट्स रद्द या देरी होती थी, इसमें कुछ नया नहीं है। लेकिन जिस प्रकार से शनिवार को एयरपोर्ट पर कर्फ्यू जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई, वैसे हालात पहले नहीं होते थे। उन्होंने कहा कि शनिवार को लोगों ने जो देखा वह वीवीआईपी मूवमेंट की वजह से कर्फ्यू जैसे हालात हो गए थे।

उन्होंने बताया कि अधिकांश उड़ानों को 45 से 60 मिनट तक देरी से उड़ान भरना पड़ा। घंटों तक हजारों यात्री एयरपोर्ट और आसमान में चक्कर लगाते रहे, क्योंकि किसी भी विमान उस दौरान ना ही उतरने की इजाजत दी गई थी और ना उड़ान भरने की। पायलट ने बताया कि दिल्ली एयरपोर्ट पर अगर फ्लाइट उड़ान भरने में देरी करती है तो इसका असर देश भर के हजारों उड़ानों पर पड़ता है।

सुरक्षा से खिलवाड़

एक अन्य पायलट ने कहा कि इस प्रकार से अनावश्यक यातायात प्रभावित करना हजारों लोगों की सुरक्षा से खिलवाड़ करना है। उन्होंने कहा कि मान लीजिए किसी विमान को दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरना है और उसे अचानक कहा जाए कि आप यहां लैंड न कर किसी अन्य एयरपोर्ट पर चले जाइए।

पायलट ने कहा कि इस स्थिति में अगर विमान में ईंधन ना हो तो उस स्थिति पायलट क्या करेगा। उन्होंने बताया कि एयरलाइन्स विमान में ईंधर उसी हिसाब से भरवाती हैं। पायलट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम है। इसके अलावा एयरलाइन्सों और यात्रियों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।

विशेषज्ञों का कहना है विमानों की ऐसी देरी खराब मौसम की स्थिति या एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री और किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष के विमान के आगमन के चलते होता। हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान हवाई अड्डे पर होने वाली विलंब इतनी लंबी अवधि तक नहीं होती थी।

करोड़ों की चपत

बीजेपी के सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अन्य प्रधानमंत्रियों के मुकाबले अधिक खतरा है। जिस वजह से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल द्वारा पीएम मोदी की सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। अधिकारियों के मुताबिक पीएम की फ्लाइट के लैंड होने के करीब 30 मिनट पहले ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल किसी भी फ्लाइट को उतरने या उड़ने की अनुमति नहीं देता है।

इस दौरान हजारों की संख्या यात्री आसमान में ही चक्कर लगाते रहते हैं। प्रधानमंत्री की रैली की वजह से आसमान और जमीन दोनों तरफ लोगों का बहुमूल्य समय बर्बाद होता है। इस दौरान अगर निर्धारित समय में पीएम नहीं पहुंचे तो और भी समय नष्ट हो सकता है।

एक अनुमान के मुताबिक, पीएम की फ्लाइट लैंड होने के दौरान करीब 30 मिनट तक सभी विमानों को आसमान में चक्कर लगाते पड़ते हैं, जिस वजह से हर विमान को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। उस दौरान अगर दिल्ली में 20 फ्लाइट उड़ान या लैंड नहीं करते हैं तो 30 मिनट के हिसाब से पांच घंटे बर्बाद होता है।

तो एक वीआईपी की सेवा में आम करदाताओं का करीब 100 घंटे बर्बाद हो जाता है। अगर इन बर्बादियों को रुपये में तब्दील करें तो सरकार को करोड़ों रुपये की चपत लगती है। एक पूर्व वायुसेना अधिकारी ना कहना है भारत से उलट अमेरिका में राष्ट्रपति सार्वजनिक एयरपोर्ट का इस्तेमाल नहीं करते हैं, क्योंकि लोगों के समय का महत्व वहां समझा जाता है।

 

 

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