यूपी: गाजीपुर में PM मोदी की रैली से लौट रहे पुलिसकर्मियों पर पथराव, कांस्टेबल की मौत, एक महीने के अंदर ‘योगी राज’ में 2 जवानों की हो चुकी है हत्या

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हाल ही में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में भीड़ हिंसा में एक पुलिस अधिकारी की मौत के कुछ दिन बाद ही अब यूपी के गाजीपुर में भी ऐसी ही एक दर्दनाक घटना घटी है। शनिवार को निषाद पार्टी और एसबीएसपी से ताल्लुक रखने वाले प्रदर्शनकारियों के एक समूह द्वारा किए गए हमले में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई। पुलिसवालों पर यह हमला उस वक्त हुआ जब वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली से ड्यूटी कर लौट रहे थे। मारे गए कांस्टेबल का नाम सुरेश वत्स है। वहीं दो पुलिसवाले घायल बताए जा रहे हैं।

सुरेश वत्स नाम का ये कांस्टेबल स्थानीय नोनहारा पुलिस स्टेशन पर तैनात था। शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी की रैली स्थल पर उसकी ड्यूटी लगी थी। सुरेश वत्स और उनकी टीम जब वापस लौट रही थी तो रास्ते में निषाद समुदाय के लोग आरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस टीम ने लोगों को रास्ते से हटाने की कोशिश की, तो भीड़ ने पत्थर फेंकना शुरू कर दिया, जिसमें कांस्टेबल सुनील वत्स की मौत हो गई। आपको बता दें कि इससे पहले 3 दिसंबर को बुलंदशहर में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या कर दी गई थी।

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गाजीपुर में रैली थी और वहां से लौट रही गाड़ियों पर शनिवार शाम को भीड़ द्वारा पथराव किया गया। इस पथराव में घायल पुलिसकर्मी सुरेश कुमार वत्स की मौत हो गई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक घटना गाजीपुर जिले के गाजीपुर कठवा मोड़ के पास की है, जहां कुछ निषाद पार्टी के लोग प्रर्दशन कर रहे थे जब उन्होंने भीड़ को समझाने की कोशिश की तो वो उग्र हो गई। इस दौरान पुलिस पर पथराव कर दिया और पथराव इतना भीषण था कि पुलिस कांन्सेटबल सुरेश वत्स की मौत हो गई।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मृतक सिपाही के परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने का ऐलान किया गया है। मृतक जवान मुकेश वत्स की पत्नी को 40 लाख रुपये और उनके माता-पिता को 10 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। मुकेश की पत्नी को असाधारण पेंशन और परिवार के एक सदस्य को मृतक आश्रित के तौर पर सरकारी नौकरी देने का भी ऐलान किया गया है।

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिपाही मुकेश वत्स की मौत पर शोक व्यक्त किया है। साथी ही उन्होंने गाजीपुर के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि घटना के दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। आपको बता दें कि योगी राज में सुरेश वत्स हाल के वक्त में भीड़तंत्र का निशाना बने दूसरे पुलिसवाले हैं। उनसे पहले 3 दिसंबर को बुलंदशहर में भीड़ को शांत कराने पहुंचे इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की भी सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

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