उत्तर प्रदेश: पुलिस द्वारा पार्क में नमाज पर रोक लगने के बाद कांग्रेस नेता ने डीजीपी को लिखी चिट्ठी, उठाई संघ की शाखाओं पर पाबंदी लगाने की मांग

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नोएडा के पार्क में नमाज पढ़ने से उत्तर प्रदेश पुलिस ने रोक लगा दी है। इसके लिए पुलिस ने इलाके में स्थित सभी कंपनियों को नोटिस भेजा। नोटिस के मुताबिक, अगर नोएडा सेक्टर-58 के स्थित कंपनी के कर्मचारी नियमों का उल्लंघन करते पाए तो इसके लिए संस्थान को ही जिम्मेदार ठहराया जाएगा। वहीं, अब एक कांग्रेस नेता ने यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने पत्र लिखकर मांग की है कि सार्वजनिक जगहों पर बिना अनुमति के लगने वाली संघ की शाखाओं पर भी पूरे राज्य में पाबंदी लगाई जाए।

Hindutva
File Photo

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के विचार विभाग के नेता संपूर्णानंद ने अपने पत्र में लिखा है कि वे जिले-जिले जाकर बीजेपी सरकार को एक्सपोज करेंगे। कांग्रेस नेता ने कहा नोएडा में जो हुआ है, वो बेहद गंभीर मसला है। राज्य की कांग्रेस ईकाई के अध्यक्ष राज बब्बर से मशवरा लेने के बाद मैंने यह पत्र डीजीपी को लिखा है।

कांग्रेस नेता ने अपने पत्र में लिखा, मैंने डीजीपी को सूचित किया है कि यूपी पुलिस ने कंपनियों को नोटिस जारी किया है कि वे अपने कर्मचारियों को पब्लिक पार्क के बाहर या अंदर नमाज पढ़ने से मना करें। इसके लिए कांग्रेस नेता ने 2009 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया देते हुए कहा है कि सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं के अलावा पब्लिक पार्कों में भी संघ की शाखाएं बिना अनुमति के आयोजित की जाती हैं, जहां पर समाज को तोड़ने का संदेश फैलाया जाता है।

अपनी चिट्ठी में कांग्रेस नेता ने डीजीपी से आग्रह किया है कि इस संदर्भ में सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों को पुनः नोटिस भेजा जाए। उन्होंने कहा, ‘इस तरह की गतिविधियों पर तत्काल विराम लगाया जाए, जिससे प्रदेश आने वाले समय में किसी सामाजिक टकराव की दुर्घटनाओं से बच सके।

बता दें कि इससे पहले ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने यूपी पुलिस के इस फैसले पर पलटवार करते हुए कहा कि कांवड़ियों के लिए फूल बरसाने वाली पुलिस को हफ्ते में एक बार पढ़ी जाने वाली नमाज से दिक्कत हो रही है।

असदुद्दीन ओवैसी ने एक ट्वीट कर लिखा था कि, उत्तर प्रदेश की पुलिस ने कांवड़ियों के लिए फूल बरसाए थे, लेकिन हफ्ते में एक बार पढ़ी जाने वाली नमाज़ का मतलब शांति और सद्भाव बिगड़ सकता है। ये बिल्कुल वैसा हुआ कि आप मुसलमानों से कह रहे हो कि आप कुछ भी कर लो, लेकिन गलती तो आपकी ही होगी। इसके अलावा ओवैसी ने लिखा, इसके अलावा, कानून के अनुसार, कोई व्यक्ति कर्मचारी अगर व्यक्तिगत तौर पर कुछ करता है तो इसके लिए किसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को कैसे उत्तरदायी ठहरा जा सकता है?

बता दें कि नोएडा थाना सेक्टर- 58 के प्रभारी निरिक्षक पंकज राय ने मंगलवार को ‘जनता का रिपोर्टर’ से बात करते हुए कहा था कि, यह पार्क नोएडा अथॉरिटी के अंतर्गत आता है और पहले यहां 5 से 10 लोग नमाज पढ़ने आते थे जिससे लोगों को कोई दिक्कत नहीं थी। लेकिन कुछ दिनों बाद पार्क में आसपास की कंपनियों के करीब 200 कर्मचारी भी यहां पर नमाज पढ़ने पढ़ने के लिए आने लगे। जिसके बाद यहां घूमने वाले लोगों ने आपत्ति जताते हुए पुलिस में शिकायत कर दी, जिसके बाद हमने यह नोटिस जारी किया।

पंकज राय ने आगे कहा कि पार्क के आसपास मौजूद कंपनियों को इस बारे में सूचित कर दिया गया है। उनकी कंपनी में मौजूद मुस्लिम लोगों के लिए नमाज पढ़ने के लिए जगह दी जाए और उन्हें बता दिया जाएं कि खुले पार्क में नमाज़ अदा ना करें। यदि किसी कंपनी का कर्मचारी पार्क में नमाज पढ़ते हुए दिखा तो इसकी जिम्मेदारी कंपनी की होगी।

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