जशोदाबेन को मुद्दा बना रॉबर्ट वाड्रा मामलें का जवाब देगी कांग्रेस?

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संसद में मॉनसून सत्र के पहले चार दिन स्वाहा होने के बावजूद सरकार और विपक्षी कांग्रेस के नेता अब अगले हफ्ते की रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। एक तरफ सरकार प्रमोशन में कोटे, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को करप्शन और वाड्रा मामले में कांग्रेस को घेरने की तैयारी कर रही है वहीँ दूसरी ओर, अब कांग्रेस भी इस बात पर विचार कर रही है कि क्या जशोदाबेन का मामला उठाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जवाब दिया जाए। कांग्रेस इस कोशिश में भी है कि विपक्ष की एकता न सिर्फ बनी रहे बल्कि और मजबूत हो।

वही अब तक सरकार और विपक्ष के गतिरोध को तोड़ने के लिए बैकडोर चैनल से भी कोई बातचीत शुरू नहीं हो सकी है। माना जा रहा है कि बातचीत शुरू होने के आसार पर वाड्रा का मामला उठाना भारी पड़ गया। जिससे रही-सही संभावनाएं भी टूट गईं। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी में एक वर्ग चाहता है कि जिस तरह से बीजेपी ने वाड्रा का मामला उठाकर सभी सीमाएं तोड़ दी हैं, तो कांग्रेस को भी जशोदाबेन का मामला उठाना चाहिए। लेकिन कुछ अन्य कांग्रेसी नेताओं की राय है कि सीधे तौर पर जशोदाबेन के बारे में न भी कहा जाए, तो सिर्फ प्लेकार्ड पर ‘जशोदाबेन की आरटीआई का जवाब दो’ जैसा स्लोगन लिखकर संसद में दिखा दिया जाए। वाड्रा केस उठने से सोनिया गांधी आहत हैं, लेकिन पार्टी नहीं चाहती कि बीजेपी की तरह मर्यादा तोड़ी जाए। इस बारे में अंतिम फैसला सोमवार सुबह तक होगा, क्योंकि पार्टी यह देखना चाहेगी कि छुट्टी के दो दिनों में किस तरह के राजनीतिक डेवलपमेंट होती है

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बीजेपी सूत्रों का कहना है कि विपक्ष को कामकाज के लिए मजबूर करने की खातिर प्रमोशन में रिजर्वेशन मसले को संसद में लाने की कोशिश हो सकती है। इससे बीएसपी को साथ लाने में सरकार को मदद मिलेगी। अगर विपक्ष हंगामा करता है, तो सरकार दावा कर सकती है कि हम तो प्रमोशन में कोटे का मामला संसद में लाना चाहते हैं, लेकिन विपक्ष ही मसला उठाने नहीं दे रहा। इससे कांग्रेस ही नहीं अन्य विपक्षी दलों के अनुसूचित जाति व जनजाति के सांसद भी चाहेंगे कि चर्चा हो। इस सिलसिले में राजनाथ सिंह, अरुण जेटली और वेंकैया नायडू को रणनीति बनाने का जिम्मा दिया गया है। बीजेपी नेताओं को यह लगता है कि बिहार में अनुसूचित जाति के वोटर हैं। ऐसे में पार्टी को बिहार में भी इसका फायदा मिल सकता है। हालांकि इसे लेकर फाइनल फैसला एक-दो दिन में लिया जाएगा। 15वीं लोकसभा के वक्त बीएसपी नेता मायावती चाहती थीं कि इस मामले में बीजेपी उनका साथ दे, लेकिन उस वक्त बीजेपी ने ऐसा नहीं किया था।

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