कांग्रेस ने सलमान खुर्शीद के बयान से किया किनारा

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कांग्रेस ने वरिष्ठ पार्टी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद के उस बयान से असहमति जताई है जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा है कि कांग्रेस के दामन पर मुसलमानों के खून के दाग हैं।

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फाइल फोटो- सलमान खुर्शीद

समाचार एजेंसी भाषा की ख़बर के मुताबिक, कांग्रेस प्रवक्ता पीएल पूनिया ने मंगलवार(24 अप्रैल) को संवाददाताओं से कहा कि, ‘सलमान खुर्शीद पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं, लेकिन जो बयान उन्होंने दिया है उससे कांग्रेस की असहमति है।’ उन्होंने आगे कहा कि, ‘मोदी सरकार में समाज को बांटने की जो राजनीति हो रही है उसमें नेताओं को इस तरह के आधारहीन बयान नहीं देने चाहिए।’ यह पूछे जाने पर कि क्या खुर्शीद पर कोई करवाई होगी, पूनिया ने कुछ नहीं कहा।

बता दें कि, अलीगढ़ मुस्लिम विश्‍वविद्यालय के एक कार्यक्रम में सलमान खुर्शीद ने एक सवाल के जवाब में माना कि कांग्रेस के दामन पर मुसलमानों के खून के धब्‍बे हैं। उन्होंने कहा, ‘हमारे दामन पर खून के धब्‍बे हैं। इसी वजह से आप हमसे कह रहे हैं कि अगर कोई आप पर वार करे तो उसे बढ़कर रोकना नहीं चाहिए? तुम समझो कि ये धब्‍बे हम पर लगे हैं तुम पर ना लगे। तुम वार इन पर करोगे और धब्‍बे तुम्‍हारे ऊपर लगेंगे। हमारे इतिहास से सीखो और समझो और अपनी हालत ऐसा न करो कि 10 साल बाद यूनिवर्सिटी आओ तो तुमसे ऐसे सवाल पूछने वाला कोई न मिले।’

सलमान खुर्शीद बोले- कांग्रेस के दामन पर लगे हैं मुसलमानों के खून के दाग

अलीगढ़ मुस्लिम विश्‍वविद्यालय के एक कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता सलमान खुर्शीद ने एक सवाल के जवाब में माना कि कांग्रेस के दामन पर मुसलमानों के खून के धब्‍बे हैं। उन्होंने कहा, 'हमारे दामन पर खून के धब्‍बे हैं। इसी वजह से आप हमसे कह रहे हैं कि अगर कोई आप पर वार करे तो उसे बढ़कर रोकना नहीं चाहिए ? तुम समझो कि ये धब्‍बे हम पर लगे हैं तुम पर ना लगे। तुम वार इन पर करोगे और धब्‍बे तुम्‍हारे ऊपर लगेंगे। हमारे इतिहास से सीखो और समझो और अपनी हालत ऐसा न करो कि 10 साल बाद यूनिवर्सिटी आओ तो तुमसे ऐसे सवाल पूछने वाला कोई न मिले।'

Posted by जनता का रिपोर्टर on Tuesday, 24 April 2018

ग़ौरतलब है कि, बीते कुछ दिनों में यह दूसरा मौका है जब सलमान खुर्शीद कांग्रेस पार्टी की लाइन से अलग दिखाई दिए हैं। इससे पहले भारत के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के ख़िलाफ राज्य सभा में महाभियोग प्रस्ताव पेश करने के पार्टी के रुख़ से भी उन्होंने ख़ुद को अलग कर लिया था। उन्होंने इस बाबत उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू को दी गई अर्ज़ी पर दस्तख़त करने से भी कथित तौर पर इंकार कर दिया था।

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