आलोक वर्मा विवाद: कांग्रेस ने की सीवीसी चौधरी को तत्काल बर्खास्त करने की मांग, कहा- मोदी सरकार के हाथों की “क‍ठपुतली” की तरह किया काम

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सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को हटाए जाने को लेकर उ‍ठे विवादों के बीच कांग्रेस ने रविवार (13 जनवरी) को मुख्य सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) के.वी. चौधरी को तत्काल हटाने की मांग की। कांग्रेस ने उन्हें नरेंद्र मोदी सरकार की एक कठपुतली बताया और उनपर अनर्गल काम करने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उन्होंने सरकार के हाथों की “क‍ठपुतली” की तरह काम किया।

(PTI File Photo)

कांग्रेस मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने यहां कहा, “सीवीसी को बर्खास्त किया जाना चाहिए या इस्तीफा ले लेना चाहिए।” कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि राफेल मामले में जांच से बचने के लिये सीवीसी के वी चौधरी से “कठपुतली की तरह काम” करवाया जा रहा है। हालांकि, केंद्रीय सतर्कता आयोग या सरकार की तरफ से इस पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

सिंघवी ने आरोप लगाया, “सीवीसी सरकार के दूत और संदेशवाहक की तरह काम कर रहे हैं और अस्थाना (सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना) के लिये लॉबिंग कर रहे हैं। सीवीसी यह भूल गए कि उन्हें लोकहित में सजगता दिखानी है न कि राजनीतिक आकाओं के हाथों की ‘सजग’ कठपुतली होना है।” उन्होंने कहा, “तथ्य और आंकड़े तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं और यह कार्रवाई अनिवार्य रूप से सीवीसी को हटाने और उनकी बर्खास्तगी से शुरू होनी चाहिए।”

कांग्रेस नेता ने पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के एक स्पष्ट संदर्भ में कहा, “सवाल उठता है कि किसके इशारे पर सीवीसी काम कर रहे हैं? इस देश पर तानाशाही तरीके से शासन कर रहे दो शीर्ष लोगों के अलावा और किसी के इशारे पर नहीं।” सिंघवी ने कहा, “कठपुतली नचाने वाले ये आका सिर्फ कुछ छिपाने के लिए ये सब कर रहे हैं। राफेल जैसी कोई चीज छिपाने के लिए और सिर्फ राफेल के कारण ही वे सीवीसी को कठपुतली की तरह नचाने की कोशिश कर सकते हैं।”

आलोक वर्मा का सेवा से इस्तीफा

बता दें कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा ने शुक्रवार को सेवा से इस्तीफा दे दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने गुरूवार को उन्हें सीबीआई निदेशक के पद से हटा दिया था। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 1979 बैच के अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम एवं केंद्रशासित प्रदेश (एजीएमयूटी) कैडर के अधिकारी वर्मा का तबादला महानिदेशक दमकल सेवा, नागरिक सुरक्षा एवं गृह रक्षा के पद पर कर दिया गया था।

सीबीआई निदेशक के पद पर वर्मा का दो वर्षों का कार्यकाल आगामी 31 जनवरी को पूरा होने वाला था। लेकिन इससे 21 दिन पहले ही प्रधानमंत्री मोदी, लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए के सीकरी की समिति ने 2-1 के बहुमत से वर्मा को सीबीआई प्रमुख के पद से हटाने का फैसला किया। मोदी और न्यायमूर्ति सीकरी वर्मा को सीबीआई निदेशक पद से हटाने के पक्ष में थे जबकि खड़गे ने इसका विरोध किया।

 

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