#RIPSiddhartha: जानें, कॉफी उगाने वाले के बेटे से वीजी सिद्धार्थ के ‘कॉफी किंग’ बनने तक का सफर

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‘कैफे कॉफी डे’ के संस्थापक वी.जी. सिद्धार्थ का शव कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में नेत्रावती नदी में बुधवार को बरामद हो गया। सिद्धार्थ सोमवार से लापता थे। उनका शव उल्लाल के निकट नदी किनारे आ गया था और स्थानीय मछुआरों ने उसे निकाला। मैंगलुरू के विधायक यू.टी. खादर ने बताया कि मित्रों और संबंधियों ने इस बात की पुष्टि की है कि शव सिद्धार्थ का ही है। बता दें कि वीजी सिद्धार्थ पूर्व विदेश मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता एसएम कृष्णा के दामाद हैं।

REUTERS/Shailesh Andrade/Files

‘कैफे कॉफी डे’ एंटरप्राइजेज के संस्थापक वीजी सिद्धार्थ ने कॉफी की दुकानें चलाने वाले वैश्विक ब्रांड स्टरबक्स के मुकाबले भारत में एक सफल ब्रांड कैफे कॉफी-डे खड़ा किया। उनकी ख्याति एक सफल उद्यमी की रही है। कॉफी बागान कारोबार में 140 साल से लगे परिवार में जन्मे सिद्धार्थ सेना में जाना चाहते थे लेकिन मैंगलोर विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में परास्नातक की डिग्री लेने के बाद उन्होंने मुंबई में निवेश बैंकर के रूप में काम करना शुरू किया।

2,500 करोड़ का हो गया कारोबार

1984 में सिद्धार्थ ने बैंगलोर में अपनी निवेश और वेंचर कैपिटल फर्म सिवन सिक्योरिटीज शुरू की। कंपनी के मुनाफे से उन्होंने कर्नाटक के चिकमंगलूर जिले में कॉफी के बागान खरीदे। इसी समय, उनकी दिलचस्पी अपने पारिवारिक कॉफी कारोबार में भी बढ़ी। 1993 में उन्होंने अमलगमेटेड बीन कंपनी (एबीसी) के नाम से अपनी कॉफी ट्रेडिंग कंपनी शुरू की थी। शुरुआत में कंपनी का सालाना कारोबार छह करोड़ रुपये का था। हालांकि धीरे-धीरे इसका कारोबार बढ़कर 2,500 करोड़ रुपये हो गया।

200 से अधिक शहरों में 1750 कैफे 

जर्मनी की कॉफी रेस्तरां की श्रृंखला चलाने वाली टीचीबो के मालिक के साथ बातचीत करके सिद्धार्थ इतना प्रभावित हुए उन्होंने देश में कैफे की श्रृंखला खोलने का फैसला किया। सिद्धार्थ ने कैफे कॉफी डे (सीसीडी) का पहला स्टोर 1994 में बेंगलुरू में खोला। यह अब भारत में कॉफी रेस्तरां की सबसे बड़ी श्रृंखला है। वियना और कुआलालंपुर सहित 200 से अधिक शहरों में इसके 1,750 कैफे हैं।

सोमवार से थे लापता

सिद्धार्थ सोमवार से लापता थे। बुधवार सुबह उनका शव कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में नेत्रावती नदी से बरामद हुआ। सोमवार शाम से उनकी अप्रत्याशित गुमशुदी के बाद उनका एक पत्र बरामद हुआ था। इस खत में उन्होंने लिखा था कि एक प्राइवेट इक्विटी निवेशक कंपनी की ओर से का उन पर शेयर वापस खरीदने का दबाव है। सिद्धार्थ का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), तटरक्षक, होमगार्ड, अग्निशमन विभाग एवं तटीय पुलिस की टीमों ने उस पुल के नीचे नेत्रावती नदी के पानी में तलाश की थी, जहां 60 वर्षीय सिद्धार्थ को आखिरी बार देखा गया था। (इनपुट- भाषा के साथ)

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