अब कोयले की आंच खुद मोदी सरकार पर, CAG ने 11 कोयला खानों की ऑनलाइन नीलामी पर खड़े किये सवाल

0

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक सफलता के पीछे उस समय की कांग्रेस सरकार में जारी भरष्टाचार के आरोपों का बड़ा हाथ था। भरष्टाचार के आरोपों में कोयला घोटाला भी शामिल था जिसे उजागर करने का श्रेय नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) को जाता है।

अब उसी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने भाजपा सरकार के कार्यकाल में पिछले साल कोयला ब्लॉकों की ऑन-लाइन नीलामी के पहले दो दौर में खामी निकाली है। उसका कहना है कि इनमें 11 ब्लॉकों के मामले में जिस तरह कंपनी समूहों ने अपनी संयुक्त उद्यम कंपनियों या समूह अनुषंगियों के जरिये एक से अधिक बोलियां पेश की थीं, उससे यह भरोसा नहीं होता कि इन दो दौर में प्रतिस्पर्धा का संभावित स्तर हासिल हो गया।
coal

Also Read:  'स्लमडॉग मिलियनेयर' के जमाल मलिक को डर लगता है बड़े बजट की फिल्में करने से

पीटीआई भाषा की खबर के अनुसार, इन दो चरणों में कुल 29 कोयला खानों की सफल नीलामी हुई थी। कोयला खानों की ऑनलाइन (ई) नीलामी पर कैग की संसद में पेश ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि इन नीलामियों में 11 कोयला ब्लॉक की में कंपनी समूहों ने अपनी अनुषंगी कंपनियों या संयुक्त उद्यमों के जरिये एक से अधिक बोलियां लगाईं। ऐसे में उसकी राय है कि हो सकता है इससे प्रतिस्पर्धा बाधित हुई हो।

Also Read:  दिल्ली: शराबी बाप ने मासूम बच्ची को पटक-पटक कर मार दिया, फिर नाले में फेंका

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘ऑडिट में यह भरोसा नहीं जगा कि पहले दो चारणों में 11 कोयला खानों की नीलामी में प्रतिस्पर्धा का संभावित स्तर हासिल हो गया होगा।’ इसके अनुसार ऐसे परिदृश्य में जबकि मानक टेंडर दस्तावेज (एसटीडी) के तहत संयुक्त उद्यम की भागीदारी की अनुमति दी जाती है और साथ ही ई नीलामी में भाग लेने वाली क्यूबी की संख्या सीमित की जाती है, तो ऑडिट में यह कहीं आश्वासन नहीं मिलता कि पहले दो चरणों में नीलाम हुई उक्त 11 कोयला खानों की बोली के दूसरे चरण में प्रतिस्पर्धा का संभातिव स्तर हासिल किया गया था। इसके अनुसार कोयला मंत्रालय ने नीलामी के तीसरे चराण में संयुक्त उद्यम भागीदारी संबंधी उपबंध में संशोधन किया था ताकि भागीदारी बढाई जा सके।

Also Read:  दिल्ली: 5 स्टार होटल में मैनेजर ने महिला सहकर्मी से की छेड़छाड़, जबरन निर्वस्त्र करने की कोशिश की

वहीं आधिकारिक सूत्रों ने इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया में कहा कि बस छह प्रतिशत क्यूबी ही संयुक्त उद्यम कंपनियां थी और सफल बोलीदाताओं में केवल एक ही संयुक्त उद्यम कंपनी थी, जो कि इस बात का स्पष्ट संकेत है कि उक्त प्रावधान से प्रतिस्पर्धा सीमित नहीं हुई। सूत्रों के अनुसार दिल्ली हाईकोर्ट ने नीलामी के इस प्रावधान को सही ठहराया था।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here