निपाह वायरस से जूझ रहे केरल में लोगों का इलाज करने जाएंगे गोरखपुर के डॉ कफील खान, मुख्यमंत्री ने किया स्वागत

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केरल में निपाह वायरस से अब तक 10 लोगों की मौत हो गई है, जबकि दर्जनों अन्य लोगों को निगरानी में रखा गया है। मंगलवार (22 मई) को केरल में निपाह वायरस से मरने वालों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। मंगलवार को कोझिकोड में दो व्यक्तियों की मौत हुई है, जिनके निपाह वायरस से संक्रमित होने का संदेह है। कोझिकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में इन दोनों मरीजों का इलाज चल रहा था।

(AFP)

मृतकों के सैंपल को जांच के लिए भेज दिया गया है। जांच के नतीजे सामने आने के बाद ही इनके वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि होगी। बता दें कि निपाह वायरस पशुओं से मनुष्य में फैलता है। इससे पशु और मनुष्य दोनों गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं। इस विषाणु के स्वाभाविक वाहक फ्रूट बैट (चमगादड़) हैं। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने बताया कि एक चमगादड़ मृतकों के घर के कुएं में पाया गया था। उसे अब बंद कर दिया गया है।

लोगों को बचाते-बचाते खुद को नहीं बचा पाईं नर्स लिनी

इस बीच लोगों का इलाज करने वाली एक नर्सिंग सहायक लिनी की सोमवार सुबह मौत हो गई। हालांकि, इस बात की पुष्टि होनी अभी बाकी है कि क्या वह विषाणु से संक्रमित थी। केरल के पर्यटन मंत्री ने लिनी के प्रति संवेदना जाहिर करते हुए फेसबुक पर उनका खत शेयर किया है जो वायरल हो रहा है। निपाह वायरस से पीड़ित शख्स की इलाज करते हुए नर्स लिनी भी खुद इसकी चपेट में आ गईं। जब उन्हें लगा कि जीवन शेष नहीं है तो उन्होंने एक और त्याग किया। लिनी ने अपने पति के नाम खत लिखा और मरते दम तक मासूम बच्चों समेत अपने पूरे परिवार को खुद से दूर रखा ताकि वह जिनसे प्यार करती हैं वे भी इस डेडली वायरस के संपर्क में न आ जाएं।

उन्होंने लिखा है, “मैं बस जा ही रही हूं… मुझे नहीं लगता, मैं आपको देख पाऊंगी… माफ कीजिएगा… हमारे बच्चों का ध्यान रखिएगा…” नर्स लिनी ने अपने पति के लिए यह गुडबाय नोट लिखा था जो निपाह वायरस का चौथा शिकार बनीं। उनका दाह संस्कार भी आनन-फानन में कर दिया गया, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके, और इसी कारण वह अपने परिवार को देख भी नहीं पाई। 31-वर्षीय लिनी की सात और दो साल की दो बच्चे हैं। लिनी का यह नोट सोशल मीडिया पर काफी शेयर किया जा रहा है, और पढ़ने वालों की आंखों को नम कर रहा है।

केरल में जाएंगे डॉ कफील खान

इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर के बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में पिछले साल अगस्त महीने में हुई 60 से अधिक नवजात बच्चों की मौत के बाद चर्चा में आए डॉ कफील खान निपाह वायरस से जूझ रहे लोगों का इलाज करने केरल जाएंगे। डॉ कफील ने फेसबुक पर इस बारे में लिखा था कि वो कालीकट मेडिकल कॉलेज में काम करना चाहते हैं। उन्होंने इसके लिए केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन से इजाजत मांगी थी। जिसके बाद केरल के सीएम ने उनका स्वागत किया है।

कफील ने फेसबुक पर लिखा था कि केरल में जिस तरह से निपाह वायरस से मौत के मामले सामने आए हैं, वो सोने नहीं दे रहे हैं। उन्होंने लिखा था कि केरल के सीएम से उनकी दरख्वास्त है कि वो मुझे कालीकट मेडिकल कॉलेज आकर मरीजों की सेवा करने का मौका दें। कफील ने केरल में निपाह के इंफेक्शन के बाद दम तोड़ने वाली नर्स लिनि को भी श्रद्धांजलि दी थी और कहा कि सिस्टर लिनी एक प्रेरणा हैं और मैं एक भी एक अच्छी वजह के लिए अपने जीवन की कुर्बानी तक देने को तैयार हूं। अल्लाह मुझे मानवता की सेवा करने के लिए ताकत, ज्ञान और खूबी दें।

कफील की पोस्ट के कुछ घंटे बाद केरल के मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बहुत खुश होगी, अगर डॉ कफील यहां आकर काम करेंगे। केरल के सीएम ऑफिस के फेसबुक अकाउंट से कहा गया है कि डॉ कफील ने निपाह वायरस से प्रभावित क्षेत्र में काम करने की इजाजत मांगी है। इस क्षेत्र में काम करना आसान नहीं है, लेकिन कफील समाज के लिए सेवाएं देना चाहते हैं तो केरल की सरकार उनका बहुत स्वागत करती है। वे उसके लिए केरल स्वास्थ्य सेवा के निदेशक या कालीकट मेडिकल कॉलेज के सुपरिडेंटेंट को अपने अनुरोध से अवगत करवा सकते हैं।

बता दें कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ऑक्सीजन कांड मामले में आठ महीने से जेल में बंद डॉ कफील खान को हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद पिछले महीने 25 अप्रैल को वह जिला जेल से रिहा हो गए। अगस्त, 2017 में एक हफ्ते के भीतर अस्पताल में 60 से अधिक बच्चों, ज्यादातर शिशुओं की मौत हो गई थी। आरोप था कि ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं होना हादसे की वजह बना। हालांकि योगी सरकार ने इससे इनकार कर दिया था कि ऑक्सीजन की कमी मौतों का कारण बनी थी। इस घटना के दौरान कफील तब चर्चा में आए थे जब मीडिया में उन्हें बच्चों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचाते हुए दिखाया गया था। हालांकि बाद में इसी मामले उन्हें आरोपी भी बनाया गया और उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था।

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  1. गोरखपुर सीएम योगी का “गृह ज़िला” नहीं है। इस भूल को सुधारें, बग़ैर रिसर्च के पोस्ट न करें।

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