मध्य प्रदेश: कमलनाथ सरकार ने कर्मचारियों के ‘वंदे मातरम’ गाने पर लगाई रोक, शिवराज सिंह चौहान ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण

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मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने कर्मचारियों के वंदे मातरम गाने पर रोक लगा दी है। सरकार ने फैसला लिया है कि हर महीने की पहली तारीख को राज्‍य सचिवालय में वंदे मातरम नहीं गाया जाएगा। बता दें कि सूबे की शिवराज सरकार ने इस परंपरा की शुरुआत की थी। इसके तहत मंत्रालय के सभी कर्मचारी महीने की पहली तारीख को परिसर में इकट्ठा होकर एकसाथ राष्ट्रगीत मिलकर ‘वंदे मातरम’ गान करते थे। इससे पहले भी वंदे मातरम को लेकर सियासत होती रही है।

Photo: Indian Express

सूत्रों के मुताबिक, कर्मचारियों के वंदे मातरम गाने पर रोक लगाते हुए कमलनाथ सरकार की तरफ से कहा गया है कि वे जनता के कल्याण के कामों पर ध्यान दें। इस आदेश के बाद नए साल के पहले दिन मंत्रालय के सामने पुलिस बैंड की मौजूदगी में सामूहिक तौर राष्ट्रगीत गायन नहीं हुआ, जबकि मौसम की परवाह किए बिना हर महीने की पहली तारीख को यह आयोजन दिसंबर 2018 तक होता रहा है।

कमलनाथ सरकार के एक मंत्री का कहना है कि इसे न गाने का कोई सवाल ही नहीं है जबकि खुद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि हर महीने की एक तारीख को मंत्रालय में वंदे मातरम गाने की अनिवार्यता को फिलहाल अभी बंद करने का निर्णय लिया गया है। कमलनाथ के इस फेरबदल को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नाराजगी जाहिर की है।

शिवराज ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण

ट्विटर पर शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा, ‘अगर कांग्रेस को राष्ट्रगीत के शब्द नहीं आते हैं या राष्ट्रगीत के गायन में शर्म आती है तो मुझे बता दें। हर महीने की पहली तारीख को वल्लभ भवन के प्रांगण में जनता के साथ वंदेमातरम मैं गाऊंगा।’

उन्होंने आगे कहा, ‘वंदे मातरम् के कारण लोगों के हृदय में प्रज्वलित देशभक्ति की भावनाओं में नई ऊर्जा का संचार होता था। अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस की सरकार ने यह परंपरा आज तोड़ दी। आज पहली तारीख को वंदे मातरम् नहीं गाया गया!’

एक अन्य ट्वीट में शिवराज ने कहा, ‘कांग्रेस शायद यह भूल गई है कि सरकारें आती हैं, जाती हैं लेकिन देश और देशभक्ति से ऊपर कुछ नहीं है। मैं मांग करता हूं कि वंदेमातरम का गान हमेशा की तरह हर कैबिनेट की मीटिंग से पहले और हर महीने की पहली तारीख को हमेशा की तरह वल्लभ भवन के प्रांगण में हो।’

दरअसल, मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार में वंदे मातरम् का गान हर सप्ताह कैबिनेट मीटिंग से पहले सभी मंत्रियों द्वारा किया जाता था और हर महीने की पहली तारीख को वल्लभ भवन (सचिवालय) के प्रांगण में वंदे मातरम गान में सभी कर्मचारी और अधिकारी गण उपस्थित रहते थे। लेकिन इस बार साल 2019 के पहले कामकाजी दिन पर राष्ट्रगीत नहीं गाया गया।

भाजपा सरकार में मंत्री रहे उमा शंकर गुप्ता ने कहा, ‘जिस वंदे मातरम को लेकर आजादी की लड़ाई लड़ी गई उससे कांग्रेस को परहेज है तो मानसिकता समझ लीजि। कामतानाथ जी के दर्शन करने से लेकर जनेऊ पहन लेने की जनता को दिखाने की प्रवृत्ति साफ होती जा रही है। सूर्य नमस्कार को दुनिया अपना रही है। यह योग है। उस पर पाबंदी लगा रहे हैं। नकारात्मक भावना से राजनैतिक विद्वेष से की शुरुआत कांग्रेस अपने पैर में कुल्हाड़ी मार रही है’।

कमलनाथ का पलटवार

वंदे मातरम नहीं गाने पर शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर हमला बोला तो इसके तुरंत बाद कमलनाथ ने भी पलटवार कर दिया। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि ‘इस आदेश को नए रूप में लागू किया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने पूछा कि जो वंदे मातरम नहीं गाते क्या वो राष्ट्रभक्त नहीं हैं?’ कमलनाथ ने कहा है कि हर महीने की 1 तारीख को मंत्रालय में वंदे मातरम गाने की अनिवार्यता को फिलहाल अभी बंद करने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय ना किसी एजेंडे के तहत लिया गया है और न ही हमारा वंदे मातरम को लेकर कोई विरोध है। वंदे मातरम हमारे दिल की गहराइयों में बसा है।

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