…तो क्या ‘बादल और रडार’ पर सही थी PM मोदी की थ्योरी? एयर मार्शल रघुनाथ नांबियार ने प्रधानमंत्री के बयान का किया समर्थन

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लोकसभा चुनाव के दौरान एक इंटरव्यू में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बालाकोट एयरस्ट्राइक के संदर्भ में कहा था कि बादल के कारण भारतीय लड़ाकू विमान पाकिस्तानी रडार की नजर में आने से बच सकते हैं, तब इस पर काफी विवाद हुआ था। पीएम मोदी ने न्यूज नेशन को दिए एक इंटरव्यू में बालाकोट एयर स्ट्राइक पर बात करते हुए दावा किया था कि उन्होंने तब सेना के बड़े अधिकारियों को सुझाया था कि बादलों की वजह से पाकिस्तान के रडार चकमा खा सकते हैं, जिससे हमारे लड़ाकू विमानों को मदद मिलेगी।

पीएम मोदी अपने रडार वाले बयान को लेकर लोकसभा चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर सुर्खियों में बने रहे। इसके अलावा वग सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स के साथ-साथ राजनीतिक दलों के भी निशाने पर रहे। लेकिन चुनाव समाप्ति के बाद सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की टिप्पणी से प्रधानमंत्री मोदी के कथन की सत्यता की पुष्टि होने लगी है।

कारगिल युद्ध में शहीद हुए स्क्वाड्रन लीडर आहुजा की याद में बठिंडा एयर बेस पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान एयर मार्शल रघुनाथ नांबियार ने कहा कि घने बादलों के कारण रडार विमान को पूरी तरह से डिटेक्ट नहीं कर पाते।

प्रधानमंत्री मोदी ने इंटरव्यू में कहा था कि जब बालाकोट एयर स्ट्राइक की योजना बन रही थी, तो मैंने विशेषज्ञों को सुझाव दिया था कि कि आसमान में छाए बादल और भारी बारिश हमें पाकिस्तानी रडार से बचने में मदद कर सकते हैं। हालांकि एयर मार्शल नांबियार के इस बयान से प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण का बचाव होता है, लेकिन वे एकमात्र ऐसे सैन्य अधिकारी नहीं हैं, जिन्होंने ऐसी बात कही है।

इसके कुछ पहले एक कार्यक्रम में पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में थल सेनाध्यक्ष जनरल विपिन रावत ने भी कहा था कि रडार अलग-अलग तकनीक पर काम करते हैं। इसके कई प्रकार होते हैं। कुछ रडार बादलों में विमानों को नहीं पकड़ पाते हैं, जबकि कुछ बादलों के रहते भी पकड़ लेते हैं।

क्या कहा था पीएम मोदी ने?

पुलवामा हमले के जवाब में भारतीय वायुसेना की ओर से पाकिस्तान के बालाकोट में किए गए हवाई हमले के बारे में मोदी ने कहा था, ‘‘हवाई हमले के दिन मौसम अच्छा नहीं था। विशेषज्ञों के मन में यह बात समा गई थी कि हमले का दिन बदला जाना चाहिए। लेकिन मैंने सुझाव दिया कि बादलों के कारण हमारे विमानों को रडार (पाकिस्तानी) की पकड़ में आने से बचने में मदद मिलेगी।’’

गौरतलब है कि पुलवामा के अवंतीपोरा में 14 फरवरी को आतंकियों ने सीआरपीएफ के काफिले पर हमला किया था। इसमें 44 जवान शहीद हो गए थे। जैश-ए-मोहम्मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। इसके बाद भारतीय वायु सेना ने 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में जैश के आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की थी। इसके एक दिन बाद 27 फरवरी को पाकिस्तान ने कश्मीर के पुंछ इलाके में बालाकोट जैसी एयर स्ट्राइक की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय वायुसेना की मुस्तैदी के चलते उसके सभी निशाने चूक गए थे।

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