…जब राफेल पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तंज कसते हुए कहा, ‘पहले CBI को अपना घर ठीक कर लेने दीजिए’

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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (31 अक्टूबर) को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से कहा कि वह फ्रांस से खरीदे जा रहे 36 राफेल लड़ाकू विमानों की कीमत की जानकारी उसे 10 दिन के भीतर सीलबंद लिफाफे में सौंपे। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने राफेल मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की।पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी, यशवंत सिन्हा और प्रशांत भूषण की ओर से राफेल मामले में एफआईआर दर्ज करने और जांच की मांग को लेकर याचिका दायर की गई है।

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राफेल पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में चल रहे घमासान को लेकर भी चिंता जाहिर की है। दरअसल, बुधवार को राफेल डील की सीबीआई जांच की मांग को लेकर दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी के अपने ‘घर की स्थिति’ ठीक कर लेने के बाद ही इस बारे में कोई फैसला लिया जा सकता है। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण की याचिका पर जवाब देते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई ने कहा, ‘पहले सीबीआई को अपना घर ठीक करने दें।’

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पीठ की यह टिप्पणी उस वक्त आई, जब वह राफेल मामले में वकील प्रशांत भूषण और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी तथा यशवंत सिन्हा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उन्होंने अपनी याचिका में मांग की थी कि राफेल सौदे की जांच अदालत की निगरानी में सीबीआई से कराई जाए। भूषण ने जब राफेल सौदे की जांच अदालत की निगरानी में सीबीआई से कराए जाने के सिलसिले में याचिका में किए गए अनुरोध का उल्लेख किया, तब प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘आपको इंतजार करना होगा।”

चीफ जस्टिस के नेतृत्व में जस्टिस यूयू ललित और केएम जोसेफ भी इस पीठ का हिस्सा थे। सर्वोच्च अदालत ने सीबीआई मामले से जुड़ी याचिकाओं पर भी रोक लगा दी है, जिसमें वर्मा और अस्थाना द्वारा दायर की गई याचिकाएं भी शामिल हैं। जब प्रशांत भूषण ने कहा कि राफेल सौदे की जांच सीबीआई से कराई जाए जो कोर्ट ने कहा कि आपको उसके लिए इंतजार करना होगा।

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आपको बता दें कि इस समय देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) खुद सवालों के घेरे में आ गई है। सीबीआई के दो सीनियर अधिकारी एक दूसरे के ऊपर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। सीबीआई में आतंरिक कलह के मद्देनजर मोदी सरकार ने अभूतपूर्व कदम उठाते हुए सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया है। वहीं, संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को तत्काल प्रभाव से अंतरिम निदेशक नियुक्त कर दिया है। ओडिशा कैडर के 1986 बैच के आईपीएस अधिकारी राव ने आधी रात को ही पदभार संभाल लिया।

 

 

 

 

 

 

 

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