सुप्रीम कोर्ट ने फिर कहा- CJI ही ‘मास्टर ऑफ रोस्टर’, मुकदमों के आवंटन प्रक्रिया में बदलाव की मांग वाली याचिका खारिज

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (6 जुलाई) को जजों को केस आवंटित करने की प्रक्रिया में बदलाव की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर साफ कर दिया कि देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) ही ‘मास्टर ऑफ रोस्टर’ हैं। सीजेआई की भूमिका समकक्षों के बीच प्रमुख की होती है और उन पर मामलों को आवंटित करने का विशिष्ट दायित्व होता है।

(PTI File Photo)

जस्टिस ए.के. सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की बैंच ने पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मुकदमों के आवंटन (रोस्टर) के लिए मुख्य न्यायाधीश ही अधिकृत हैं। बैंच ने कहा कि इस बात पर कोई मतभेद नहीं है कि मुख्य न्यायाधीश मास्टर ऑफ रोस्टर होते हैं और मामलों को विभिन्न पीठों को आवंटित करने का उनके पास अधिकार होता है।

यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के पूर्व वरिष्ठ वकील और पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण ने दाखिल की थी। शांति भूषण की तरफ से उनके बेटे और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने जिरह की थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि पहले के कई फैसलों में यह साफ किया जा चुका है कि चीफ जस्टिस ही ‘मास्टर ऑफ रोस्टर’ हैं। उन्हें ही जजों को केस आवंटित करने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि याचिका में रखी गई मांग अव्यवहारिक हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश, सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश होने की वजह से अदालत के प्रशासन का नेतृत्व करने का अधिकार रखते हैं जिसमें मामलों का आवंटन करना भी शामिल है। दो जजों की बैंच ने अलग-अलग लेकिन एक समान राय रखते हुए कहा कि मुख्य न्यायाधीश के पास मामलों को आवंटित करने तथा बैंच को नामित करने का विशेषाधिकार है।

जस्टिस सीकरी ने कहा कि लोगों के मन में न्यायपालिका का क्षरण होना न्यायिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि कोई भी तंत्र पुख्ता नहीं होता और न्यायापालिका की कार्यप्रणाली में भी सुधार की हमेशा गुंजाइश होती है। गौरतलब है कि पिछले आठ महीने में सुप्रीम कोर्ट ने तीसरी बार इस बात की पुष्टि की है।

 

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