नागेश्वर राव को CBI का अंतरिम निदेशक बनाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से अलग हुए CJI रंजन गोगोई

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देश की शीर्ष जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के भीतर जारी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है।
देश के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने सीबीआई के अंतरिम निदेशक के रूप में एम. नागेश्वर राव की नियुक्ति के खिलाफ कॉमन कॉज द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। CJI गोगोई ने कहा कि वे सीबीआई निदेशक की चयन समिति मे शामिल हैं, इसलिए वह मामले पर सुनवाई नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि यह याचिका दूसरी पीठ सुनेगी।

(Reuters FILE Photo)

मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि वह नए सीबीआई निदेशक की नियुक्ति के लिए 24 जनवरी 2019 को उच्च स्तरीय समिति की बैठक में भाग ले रहे हैं, इसलिए वे इस मामले में सुनवाई के लिए पीठ का हिस्सा नहीं हो सकते हैं। इस मामले में याचिका पर बुधवार को जस्टिस एके सीकरी की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा विचार किया जाएगा। बता दें कि सीबीआई निदेशक के चयन के लिए हाई पावर कमेटी की बैठक 24 जनवरी को होनी है जिसमें प्रधानमंत्री, CJI और नेता विपक्ष हिस्सा लेंगे।

आपको बता दें कि एम नागेश्वर राव की केंद्रीय जांच ब्यूरो के अंतरिम निदेशक के रूप में नियुक्ति को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘कामन काज’ ने यह जनहित याचिका दायर की है और इसमें जांच ब्यूरो के अंतरिम निदेशक के रूप में एम नागेश्वर राव की नियुक्ति निरस्त करने का अनुरोध किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के माध्यम से दायर इस याचिका में दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान कानून, 1946 की धारा 4 ए के तहत लोकपाल और लोकायुक्त कानून, 2013 में किए गए संशोधन में प्रतिपादित प्रक्रिया के अनुसार केंद्र को जांच ब्यूरो का नियमित निदेशक नियुक्त करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

गौरतलब है कि सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा ने हाल ही में सेवा से इस्तीफा दे दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने उन्हें सीबीआई निदेशक के पद से हटा दिया था। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 1979 बैच के अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम एवं केंद्रशासित प्रदेश (एजीएमयूटी) कैडर के अधिकारी वर्मा का तबादला महानिदेशक दमकल सेवा, नागरिक सुरक्षा एवं गृह रक्षा के पद पर कर दिया गया था।

सीबीआई निदेशक के पद पर वर्मा का दो वर्षों का कार्यकाल आगामी 31 जनवरी को पूरा होने वाला था। लेकिन इससे 21 दिन पहले ही प्रधानमंत्री मोदी, लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए के सीकरी की समिति ने 2-1 के बहुमत से वर्मा को सीबीआई प्रमुख के पद से हटाने का फैसला किया। पीएम मोदी और न्यायमूर्ति सीकरी वर्मा को सीबीआई निदेशक पद से हटाने के पक्ष में थे जबकि खड़गे ने इसका विरोध किया। इसके बाद सरकार ने सीबीआई के नागेश्वर राव को एक बार फिर अंतरिम निदेशक नियुक्त कर दिया।

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