नाग‍रिकता संशोधन कानून: पूर्वोत्तर राज्यों में हिंसक प्रदर्शन जारी, शिवसेना ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया

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शिवसेना ने शुक्रवार को केंद्र को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि नया नागरिकता कानून लाकर वह यह दिखाना चाहती है कि वह हिंदुओं की इकलौती तारणहार है। उसने कहा कि केंद्र के इस कदम से पूर्वोत्तर राज्यों में हिंसा चालू हो गई है, ऐसा दर्द देकर वह किस तरह की राजनीति करना चाहती है।

नाग‍रिकता संशोधन कानून
फोटो: सोशल मीडिया

विवादित नागरिकता (संशोधन) विधेयक (कैब) को लोकसभा और राज्यसभा से पारित होने के बाद गुरुवार रात को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी मंजूरी दे दी थी। इसके साथ ही विधेयक कानून में तब्दील हो गया है। इस कानून के अनुसार हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के जो सदस्य 31 दिसंबर 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हैं और जिन्हें उनके देश में धार्मिक उत्पीड़न का सामना पड़ा है, उन्हें गैरकानूनी प्रवासी नहीं माना जाएगा, बल्कि भारतीय नागरिकता दी जाएगी।

शिवसेना ने आरोप लगाया कि यह विधेयक केवल इसलिए लाया गया ताकि वह (केंद्र सरकार) साबित कर सके कि दुनियाभर में हिंदुओं के रक्षक केवल वे ही हैं। लेकिन सरकार के पास इसका कोई ठोस जवाब नहीं है कि अनुच्छेद 370 के लगभग सभी प्रावधानों को खत्म करने के बावजूद कश्मीरी पंडित कश्मीर क्यों नहीं लौट सके हैं।

दल ने कहा, ‘‘कश्मीर में हालात अभी भी सामान्य नहीं हैं।’’ उद्धव ठाकरे नीत दल ने विधेयक का लोकसभा में तो समर्थन किया था लेकिन राज्यसभा में मतदान ही नहीं किया। पार्टी ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में कहा, ‘‘पूर्वोत्तर के कई राज्यों में कोहराम मचा हुआ है, हिंसा ऊफान पर है। यह दर्द मोल लेकर सरकार कैसी राजनीति कर रही है।’’

राज्यसभा में विधेयक पर मतदान के दौरान शिवसेना के सांसदों के बर्हिगमन के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूछा था कि विधेयक को लेकर पार्टी का रुख रातोरात कैसे बदल गया।

बता दें कि, असम में विवादास्पद नागरिकता (संशोधन) विधेयक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज होने के बीच हजारों की संख्या में लोगों ने गुरुवार को गुवाहाटी में कर्फ्यू का उल्लंघन किया और सड़कों पर उतरे। राज्य में पुलिस गोलीबारी में दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। विरोध प्रदर्शन के चलते राज्य में यातायात सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं। ट्रेनों के साथ-साथ गुवाहाटी और डिब्रूगढ़ जाने वाली कई उड़ानें भी रद्द हुई हैं। (इंपुट: भाषा के साथ)

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