भारत की खराब रेलवे प्रणाली पर चीनी मीडिया ने चिंता जताते हुए कहा- भारत को तत्काल सुधार की ज़रूरत

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चीन के आधिकारिक मीडिया ने मंगलवार को कहा कि भारत को अपनी रेलवे प्रणाली में तत्काल सुधार करने की जरूरत है और चीन इसके लिए आवश्यक सहायता मुहैया करा सकता है।

इसने 140 से अधिक लोगों की जान लेने वाली रेल दुर्घटना के बाद भारत के रेलवे नेटवर्क का सही रखरखाव न होने पर चिंता जताई।

शिन्हुआ समाचार एजंसी ने एक लेख में कहा कि रविवार को कानपुर में इंदौर-पटना एक्सप्रेस के पटरी से उतरने की घटना ने देश के रेल नेटवर्क के घटिया रखरखाव के बारे में चिंताएं एक बार फिर पैदा हो गई हैं। भारत को तत्काल सुधार करने की जरूरत है और चीन आवश्यक सहायता उपलब्ध करा सकता है।

रेलवे
Photo courtesy: indian express

सरकार संचालित ग्लोबल टाइम्स की वेबसाइट पर एक लेख में कहा गया कि इंदौर-पटना एक्सप्रेस के पटरी से उतरने के बाद भारत और चीन अवसंरचना में सहयोग को तेज करना चाहेंगे और चीन भारत के रेलवे में सुधार के लिए सीधी सहायता उपलब्ध करा सकता है।

इसने कहा कि हालांकि चीनी नेतृत्व वाले एशिया अवसंरचना निवेश बैंक में भारत दूसरी सबसे बड़ी भागीदारी और मतदान का अधिकार रखता है, जो इसे एशिया में अवसंचरना में सुधार के लिए बैंक के प्रयासों से लाभ उठाने की अनुमति दे सकता है।

यदि भारत और अधिक चीनी उद्यमियों को सरकार संचालित रेल नेटवर्क में निवेश की अनुमति देता है तो चीनी बैंक भारत को रियायती दरों पर ऋण उपलब्ध करा सकते हैं।

भाषा की खबर के अनुसार, लेख में कहा गया कि चीन और भारत के लिए रेल प्रौद्योगिकी में भी सहयोग करने की संभावना है। चीन की प्रौद्योगिकी यहां तक कि कुछ विकसित देशों से भी ज्यादा आध्ुानिक है और लागत कम है। विश्व बैंक की 2014 की रिपोर्ट में कहा गया कि चीनी रेलवे के टिकट की कीमत अन्य देशों के मुकाबले एक चौथाई है।

लेख में कहा गया कि चीन की मदद से दक्षिण एशियाई देश को अपने रेलवे में सुधार में मदद की संभावना है, लेकिन द्विपक्षीय सहयोग के लिए रेल नेटवर्क में चीनी निवेश के प्रति एक खुला रवैया रखना पूर्व शर्त है।

2010 के बाद अपने सबसे भीषण ट्रेन हादसे के बाद उम्मीद है कि भारत अपने रेलवे के लिए अधिक सुरक्षा हासिल कर सकता है। चीन के साथ भारत पहले ही रेलवे के विकास के लिए कई सहयोगात्मक समझौते कर चुका है।

भारत के इंजीनियर चीन में प्रशिक्षण ले रहे हैं और चीन अपने द्वारा विकसित एक विश्वविद्यालय के समान ही एक रेल विश्वविद्यालय स्थापित करने में भारत के साथ सहयोग कर रहा है।

तेज गति की ट्रेन के अलावा, भारत और चीन बंगलुरु होते हुए चेन्नई से मैसूर तक गति बढ़ाने के लिए आवश्यक तकनीकी इनपुट की पहचान करने के लिए सहयोग करने पर सहमत हुए हैं।

चीन चेन्नई से नई दिल्ली तक हाई स्पीड रेल लाइन बनाने के लिए भी संभाव्यता अध्ययन कर रहा है। जापान को अमदाबाद से मुंबई तक हाई स्पीड रेल लाइन बनाने के लिए पहली बुलेट ट्रेन परियोजना मिली है।

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