छत्तीसगढ़: मिड डे मील के तहत स्कूलों में बच्चों को अंडा परोसे जाने के सरकार के फैसले पर मचा बवाल, BJP ने किया विरोध तो कांग्रेस ने कुपोषण को दिया हवाला

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छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में मिड डे मील (मध्यान्ह भोजन) में अंडा परोसे जाने के फैसले पर बवाल बढ़ता जा रहा है।मध्याह्न भोजन योजना के तहत सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को अंडा वितरित करने के मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने गुरुवार (19 जुलाई) को विधानसभा में जमकर हंगामा किया और राज्य सरकार से इस कदम को वापस लेने की मांग की। बता दें कि बच्चों को अंडा मुहैया कराने के फैसले का विरोध शुरू हो गया है। वहीं, कांग्रेस सरकार का कहना है कि राज्य के बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए यह फैसला लिया गया है।

विधानसभा में गुरुवार को प्रश्नकाल के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ विधायक बृजमोहन अग्रवाल, शिवरतन शर्मा और अजय चंद्राकर ने मध्याह्न भोजन में अंडा वितरण का मुद्दा उठाया और काम रोककर चर्चा कराए जाने की मांग की। विधायक शिवरतन शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा मध्याह्न भोजन में अंडे परोसने के निर्णय के बाद राज्य में इसका विरोध हो रहा है। उन्होंने कहा कि स्कूलों को ज्ञान का मंदिर कहा जाता है। यहां अंडा वितरण के फैसले के बाद से शाकाहारी समाज नाराज है।

विधायक ने कहा कि राज्य के कबीर पंथी, राधा स्वामी, गायत्री परिवार, जैन समुदाय और अन्य शाकाहारी समुदाय इस निर्णय के खिलाफ हैं। वहीं, विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि इन समुदायों में इतनी नाराजगी है कि कबीर पंथ धर्म गुरु प्रकाश मुनि साहिब ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर रायपुर-बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरना दिया। अग्रवाल ने कहा कि धरना तब समाप्त किया गया, जब कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि उन्हें तीन दिनों के भीतर राज्य सरकार का इस संबंध में फैसला मिल जाएगा।

सरकार ने कुपोषण को दिया हवाला

विपक्ष के विधायकों के विरोध के बीच कांग्रेस विधायक मोहन मरकाम, बृहस्पति सिंह, अमरजीत भगत और अन्य विधायकों ने कहा कि राज्य सरकार बच्चों को प्रोटीन के रूप में अंडा उपलब्ध कराना चाहती है, क्योंकि राज्य में कुपोषण की दर लगभग 40 प्रतिशत है। सदन में कांग्रेस विधायकों द्वारा बार-बार टिप्पणी के बाद भाजपा विधायकों ने इस पर आपत्ति जताई और विधानसभा की कार्यवाही का बहिष्कार किया तथा वे सदन से बाहर चले गए। इसके बाद अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को 10 मिनट के लिए स्थगित कर दिया।

जब सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई तब अध्यक्ष चरणदास महंत ने कहा कि शून्यकाल के दौरान प्रत्येक सदस्य को बिना किसी हस्तक्षेप के मुद्दों को सामने रखने का अधिकार है। इसके बाद विधायक बृजमोहन अग्रवाल और भाजपा के अन्य विधायकों तथा जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के विधायक दल के नेता धर्मजीत सिंह ने इस मुद्दे को फिर उठाया और चर्चा की मांग की।

इसके बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि संबंधित विभाग के मंत्री जल्द ही इस मुद्दे पर एक बयान देंगे। बाद में जब स्कूल शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम ने इस मुद्दे पर अपना बयान दिया। भाजपा के सदस्यों ने यह कहते हुए इसका विरोध किया कि यह वक्तव्य राजनीति से प्रेरित है। भाजपा सदस्य इसके विरोध में आसन के पास पहुंच गए। इसके बाद अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया।

सहमति नहीं बनने पर घरों में पहुंचाने का आदेश

छत्तीसगढ़ के स्कूलों में मध्याह्न भोजन में अंडा परोसने के फैसले का विरोध होने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने कलेक्टरों से कहा है कि यदि स्कूलों में अंडा मुहैया कराने को लेकर सहमति नहीं बनें, तो मांसाहारी बच्चों के घरों में अंडा पहुंचाने की कोशिश की जाए। विवाद बढ़ने के बाद राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग ने मंगलवार को जिला कलेक्टरों को मध्याह्न भोजन के मेन्यू के संबंध में स्पष्टीकरण जारी किया है।

अधिकारियों ने बताया कि विभाग के जनवरी माह के एक पत्र में प्रोटीन और कैलोरी की पूर्ति के लिए छात्रों को मध्याह्न भोजन में सप्ताह में कम से कम दो दिन अंडा, दूध या समतुल्य पोषक मूल्य का खाद्य पदार्थ दिए जाने का उल्लेख और सुझाव है। चूंकि शाकाहारी परिवार के बच्चे भी सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन करते हैं, इसलिए स्कूल शिक्षा विभाग ने कलेक्टरों को स्पष्टीकरण जारी किया है। उन्होंने बताया कि इस स्पष्टीकरण के तहत स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव ने कलेक्टरों को निर्देश दिया है कि स्कूली स्तर पर आगामी दो सप्ताह में शाला विकास समिति एवं अभिभावकों की बैठक आयोजित कराई जाए।

इस बैठक में ऐसे छात्र-छात्राओं को चिह्नित किया जाए जो मध्याह्न भोजन में अंडा ग्रहण नहीं करना चाहते हैं। मध्याह्न भोजन तैयार करने के बाद अलग से अंडे उबालने या पकाने की व्यवस्था की जाए। जिन छात्र-छात्राओं को चिह्नित किया गया है, उन्हें मध्याह्न भोजन के समय पृथक पंक्ति में बैठाकर भोजन परोसा जाए। अधिकारियों ने बताया कि पत्र में कहा गया है कि जिन शालाओं में अंडा वितरण किया जाना हो, वहां शाकाहारी छात्र-छात्राओं के लिए अन्य प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ जैसे कि सुगंधित सोया दूध, सुगंधित दूध, प्रोटीन क्रंच, फोर्टिफाइड बिस्किट, फोर्टिफाइड सोयाबड़ी, सोया मूंगफली चिकी, सोया पापड़, फोर्टिफाइड दाल इत्यादि विकल्प की व्यवस्था की जाए। (इनपुट- भाषा के साथ)

 

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