देवरिया यौन शोषण मामला: योगी सरकार ने मानी प्रशासन की लापरवाही, बच्ची ने बताई दर्दनाक कहानी, बोली- “4 बजे जाती थी, सुबह आती थी”

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उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में भी शेल्टर होम में बिहार के मुजफ्फरपुर जैसा मामला सामने आने के बाद सरकार से लेकर प्रशासनिक अमले तक के होश उड़ गए हैं। मामला सामने आने के बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिला अधिकारियों को बाल गृह और महिला संरक्षण गृह का व्यापक निरीक्षण करने का निर्देश दिया है। घटना के बाद देवरिया के जिलाधिकारी सुजीत कुमार को हटा दिया गया है। इसके अलावा डीपीओ प्रभात कुमार भी शामिल हैं। वहीं बाल कल्याण अधिकारी रेणुका कुमार से इस मामले पर रिपोर्ट तलब किया गया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर: HT

बता दें कि रविवार शाम बेतिया बिहार की एक बालिका बालिका गृह से भाग निकली जिसने पुलिस को आपबीती बताई। उसके बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की। हालांकि इस शेल्टर होम को भले ही सील कर दिया गया हो लेकिन सबसे हैरानी की बात यह है कि अभी भी लापता 18 लड़कियों का कोई सुराग नहीं है। शेल्टर चलाने वाले पति-पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया है। कानून की धज्जियां उड़ाते हुए साल 2017 में लाइसेंस रद्द होने और सीबीआई की जांच में गड़बड़ी के बावजूद भी ये शेल्टर होम अवैध तरीके से चल रहा था।

योगी सरकार ने मानी जिला प्रशासन की लापरवाही

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बच्चियों से कथित तौर पर जबरन वेश्यावृत्ति कराए जाने के खुलासे के बाद सवालों से घिरे बालिका संरक्षण गृह और स्थानीय प्रशासन के बीच सांठगांठ की ओर इशारा करते हुए मंगलवार (7 जुलाई) को कहा कि इस गृह को बंद करने के आदेश के बारे में शासन-प्रशासन को मालूम था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। प्रदेश की महिला एवं परिवार कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने संवाददाताओं को बताया कि देवरिया में हुई घटना की जांच के लिए गई उनके विभाग की प्रमुख सचिव रेणुका कुमार और अपर पुलिस महानिदेशक (महिला हेल्पलाइन) अंजू गुप्ता की टीम ने पड़ताल की कि जब महकमे ने जून 2017 में इसे बंद करने का नोटिस देकर जिलाधिकारी को जानकारी दी थी तो उसके बावजूद वहां किन हालात में बच्चों को भेजा गया।

समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक मंत्री ने कहा कि देवरिया के जिलाधिकारी को संरक्षण गृह बंद करने और उनमें रह रहे बच्चों को दूसरी जगह स्थानान्तरित करने के लिए कम से कम 15 नोटिस दिए गए। निदेशालय से पांच पत्र भेजे गए। निश्चित रूप से स्थानीय स्तर पर लापरवाही हुई है। उन्होंने कहा, ‘‘शासन और प्रशासन को साफ मालूम था कि इसे बंद कर दिया गया है। इस बात की जांच की गई है कि जिलाधिकारी को भेजे गये पत्रों पर कार्रवाई हुई या नहीं। जिला प्रोबेशन अधिकारी, जिला बाल संरक्षण अधिकारी के रिकार्ड की भी जांच की जा रही है कि उन्होंने इस मामले में कितनी गम्भीरता दिखायी। बहरहाल, यह लापरवाही थी या साठगांठ, इस बारे में जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता लगेगा। यह रिपोर्ट आज शाम मुख्यमंत्री के पास पहुंचेगी।’’

रीता ने बताया कि जांच टीम ने विस्तृत तफ्तीश की। उसने संरक्षण गृह में रहने वाले बच्चों के अलग-अलग बयान लिये। साथ ही सारे रिकार्ड की जांच की। रिकार्ड में और जो कुछ संस्था के लोग कह रहे हैं, उनमें कोई तालमेल नहीं मिल रहा है। जब इस संरक्षण गृह को बंद करने के आदेश दिये गये थे तब उसमें 28 बच्चे थे, मगर अब 23 हैं। इनमें 20 लड़कियां और तीन लड़के हैं। संस्था संचालक का कहना है कि उनके यहां 42 बच्चे थे। बाकी बच्चों का पता लगाया जा रहा है। अगले 24 से 48 घंटे में पता लग जाएगा। मंत्री ने कहा कि सरकार ने इस मामले का खुलासा होने के बाद तत्परता से बिल्कुल निष्पक्ष कार्रवाई की है। मैं आश्वस्त कराना चाहती हूं कि परोक्ष प्रत्यक्ष रूप से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

“चार बजे जाती थी, सुबह आती थी”

बच्चियों ने बातचीत में बताया है कि इनसे गलत कृत्य कराया जा रहा था। बच्चियों ने बताया कि दीदी लोगों को लेने के लिए रात में कार आती थी। जब वह लोग वापस आती थी बहुत रोते हुए आती, पूछने पर कुछ नहीं कहती। बच्चियों ने बताया कि उनसे बहुत काम लिया जाता था, पोछा भी लगाया जाता था। वहीं काम करने से इनकार करने पर उनको मारा पीटा जाता था। फिलहाल पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जांच कमेटी गठित कर दी गई है। सवाल इस बात का भी आखिर इन गाड़ियों में बैठाकर उस पीड़िता को कहां भेजा जाता था।

शेल्टर होम से किसी तरह भागकर दर्जनों बच्चियों को बचाने वाली बच्ची ने पुलिस को बताया कि मैं उस वक्त शेल्टर होम की पहली मंजिल पर थी जब वहां की इनचार्ज गिरिजा त्रिपाठी ने मुझे बुलाया और ग्राउंड फ्लोर की सफाई करने को कहा। बच्ची ने आगे बताया कि इसके बाद त्रिपाठी के पास एक फोन आया और वह बात करने लगीं। जिसके बाद मुझे इस दौरान भागने का मौका मिल गया। मैं बिना एक सेकंड गवाएं वहां से भागकर पुलिस स्टेशन पहुंच गईं।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, बच्ची ने पत्रकारों को बताया कि उससे बड़ी लड़कियों को शाम चार बजे के करीब मैडम जी (गिरिजा) के साथ कार से कहीं ले जाया जाता और वह अगले दिन सुबह ही वापस आती थीं। बच्ची ने बताया कि, “बड़ी मैम ले जाती थी। कभी सफेद, लाल, काली गाड़ी आती थी….चार बजे जाती थी…सुबह आती थी….दीदी सुबह कुछ नहीं कहती थी….उसकी आखं सूज आती थी।”

बहादुर बच्ची ने पुलिस को बताया कि अलग-अलग रंग जैसे लाल, काली और ग्रे कलर की कारें वहां आती थीं और देखने में महंगी लगती थीं। बच्ची ने बताया, ‘दीदी (बड़ी लड़कियां) जब वापस लौटती थीं तो हमें देखकर रोती थीं। छोटी बच्चियों को वहां फर्श की सफाई और दूसरे काम करने के लिए मजबूर किया जाता। अगर हम उनकी बात नहीं मानते तो अलग-अलग लोग हमारे साथ मारपीट करते थे।’

बच्ची की बहादुरी को सलाम

देवरिया के विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान में दर्जनों बच्चियों को नर्क की जिंदगी से आजादी दिलाने वाली बिहार प्रान्त के बेतिया की रहने वाली 10 साल की छोटी बच्ची की बहादुरी को हर कोई सलाम कर रहा है। इस बहादुर बच्ची ने हिम्मत दिखाते हुए खुद को मुक्त तो कराया ही अपने साथ ही दर्जनों लड़कियों को नारकीय जीवन से भी बचाया। रिपोर्ट के मुताबिक 42 में से 24 बच्चियों और महिलाओं को तो इस शेल्टर होम से बचा लिया गया है। हालांकि अभी तक बाकी बच्चियों की जानकारी नहीं मिल पाई है कि आखिर वह कहां और किस हालत में हैं।

ऐसे सामने आया मामला

दरअसल रविवार (5 अगस्त) शाम बेतिया बिहार की एक बालिका बालिका गृह से भाग निकली जिसने पुलिस को आपबीती बताई। जिसके बाद एसपी ने तत्काल कार्रवाई को निर्देश दिया। देर रात में ही फोर्स के साथ बालिका गृह में छापेमारी हुई। पुलिस कार्रवाई में 24 बच्चियों व महिलाओं को वहां से छुड़ाया गया। जबकि 18 बच्चियां अभी भी लापता हैं। वहीं संस्था की संचालिका, उसके पति और बेटे को गिरफ्तार कर लिया गया। एसपी रोहित पी कनय ने बताया कि बच्चियों की उम्र 15 से 18 साल है।

विपक्ष पर लगाया आरोप

रीता बहुगुणा जोशी ने प्रदेश की पूर्ववर्ती बसपा, सपा सरकारों पर देवरिया में लड़कियों से जबरन वेश्यावृत्ति कराये जाने के आरोप में घिरे बालिका संरक्षण गृह की संचालक संस्था को पोषित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि संस्था ‘मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान’ को वर्ष 2010 में सरकारी काम मिला था। उस वक्त प्रदेश में बसपा की सरकार थी। वर्ष 2010 से 2014 के बीच इस संस्था को बालिका बाल गृह, शिशु गृह, स्वधार गृह, अडॉप्शन होम वगैरह काम दे दिये गये। उस वक्त बसपा और सपा की सरकारें थीं।

मंत्री ने कहा कि चाइल्ड वर्किंग कमेटी को बाल गृहों की समीक्षा और मुआयने की जिम्मेदारी दी जाती है। ये सारी कमेटियां पिछली सपा सरकार के शासनकाल में गठित कर दी गयी थीं। सपा, बसपा के कार्यकाल में इतने गलत लोगों को इन समितियों में रखा गया था। हम 70 लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज सपा के लोग वहां पर धरना प्रदर्शन करने गये हैं। जिन लोगों ने खुद गलत काम किये वे लोग आज कह रहे हैं कि हम संवेदनहीन हैं। अगर हम संवेदनहीन होते तो क्या उस संरक्षण गृह की संचालक संस्था को नोटिस जारी करते? क्या हम उनके खिलाफ मुकदमा लिखवाते?

 

 

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