केरल के निलंबित डीजीपी जैकब थॉमस ने कहा- ‘जय श्री राम’ का नारा लगाना सामान्य बात है, RSS से संबद्ध होने में कोई बुराई नहीं

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केरल सतर्कता विभाग के निलंबित डीजीपी जैकब थॉमस ने शुक्रवार को कहा कि आरएसएस से संबद्ध होने में कोई बुराई नहीं है। उन्होंने कहा कि ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाना ‘‘सामान्य बात’’ है। थॉमस का पूर्ववर्ती कांग्रेस नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) की सरकार और मौजूदा माकपा के नेतृत्व वाली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के साथ टकराव हुआ था।

जैकब थॉमस
फाइल फोटो

उन्होंने कहा कि आरएसएस कोई राजनीतिक दल नहीं है बल्कि वह तो ‘‘राष्ट्र निर्माण’’ में शामिल सबसे बड़ा गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) है। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने 29 जुलाई को थॉमस की बहाली का आदेश दिया था। थॉमस को ओखी चक्रवात की स्थिति से निपटने को लेकर एलडीएफ सरकार के खिलाफ अपनी टिप्पणी के चलते दिसंबर 2017 में निलंबित कर दिया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘कल मैंने त्रिशूर में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘रामायण महोत्सव’ में हिस्सा लिया था। वहां मैंने उन मूल्यों की बात की थी जो भगवान राम के प्रतीक माने जाते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘राम एक ऐसे व्यक्ति जो सदियों पहले अवतरित हुए थे। लेकिन आज राम को कैसे पेश किया जा रहा है? वह किस बात का प्रतिनिधित्व करते हैं? वह एक आदर्श पुरूष हैं। वह मर्यादा पुरूष हैं।’’ थॉमस ने तिरुवनंतपुरम प्रेस क्लब की ओर से आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘केरल में कुछ समय से गलत चीजें हो रही हैं। जब गलत चीजें होती हैं तो राम को आना चाहिए और इसमें दखल देना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जय श्रीराम’ का नारा हर जगह एक आम बात है। वह संकल्प पुरूष हैं। वह नैतिकता और मूल्यों के पुरूष हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं जो कहना चाहता हूं वह यह कि आखिर हम ‘जय श्रीराम’ का नारा क्यों नहीं लगा सकते? अगर हम सेना के किसी कार्यक्रम में जाते हैं तो हम ‘जय हिंद’ या ‘जय श्रीराम’ कहते हैं, जो एक सामान्य बात है।’’ अदूर गोपालकृष्णन जैसी प्रख्यात हस्तियों द्वारा इसका विरोध किये जाने के बारे में पूछे जाने पर थॉमस ने कहा, ‘‘अदूर को अपने विचार रखने का हक है। तो उन्होंने वैसा ही किया।’’

अदूर गोपालकृष्णन ने कहा था कि ‘जय श्रीराम’ के नारे का इस्तेमाल ‘युद्ध घोष’ के समान किया जा रहा है। आरएसएस के कार्यक्रमों में बार-बार दिखने को लेकर भाजपा में शामिल होने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा एक राजनीतिक पार्टी है जबकि आरएसएस नहीं। यह एक एनजीओ है। भाजपा ने दो प्रधानमंत्री दिये हैं, जिन्हें जनता ने दोबारा चुना।’’ मेरे पास उस पार्टी के खिलाफ कुछ भी नहीं है। जो लोग उस पार्टी का विरोध करते हैं, उनके पास हो सकता है।पूर्व सतर्कता प्रमुख ने मीडियाकर्मियों से पूछा कि आरएसएस में शामिल होने में क्या बुराई है? (इंपुट: भाषा के साथ)

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