किसी कंप्यूटर को इंटरसेप्ट या निगरानी के लिए 10 एजेन्सियों को अधिकृत करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

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किसी भी कंप्यूटर प्रणाली को इंटरसेप्ट करने या उनकी निगरानी के लिये 10 केन्द्रीय एजेन्सियों को अधिकृत करने संबंधी सरकार की अधिसूचना को सोमवार को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गयी। समाचार एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा ने सरकार की 20 दिसंबर की अधिसूचना को चुनौती देते हुये सुप्रीम कोर्ट से इसे निरस्त करने का अनुरोध किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के साइबर एवं सूचना सुरक्षा प्रभाग द्वारा गुरुवार देर रात गृह सचिव राजीव गाबा के जरिए यह आदेश जारी किया गया। सरकार के इस आदेश पर विपक्षी पार्टियों ने नाराजगी जताई है।

सुप्रीम कोर्ट
फाइल फोटो

बता दें कि गृह मंत्रालय ने शुक्रवार (21 दिसंबर) को जारी बयान में कहा कि नया आदेश किसी सुरक्षा या कानून लागू कराने वाली एजेंसी को कोई नई शक्ति नहीं दे रहा। अधिकारियों ने बताया कि आदेश के मुताबिक, 10 केंद्रीय जांच और खुफिया एजेंसियों को अब सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत किसी कंप्यूटर में रखी गई जानकारी देखने, उन पर नजर रखने और उनका विश्लेषण करने का अधिकार होगा।

इन 10 एजेंसियों में खुफिया ब्यूरो (आईबी), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी), राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ), सिग्नल खुफिया निदेशालय (जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर और असम में सक्रिय) और दिल्ली पुलिस शामिल हैं।

गृह मंत्रालय द्वारा कंप्यूटर की निगरानी बाले आदेश पर केंद्र में एनडीए की सहयोगी और महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार में साथ देने वाली भड़की शिवसेना ने कहा है कि पीएम मोदी को देश में आपातकाल घोषित कर देना चाहिए। समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, शिवसेना नेता मनीषा कयांदे ने कहा, ‘इस तरह के नोटिफिकेशन जारी होने के बाद मोदी जी को देश में आपातकाल घोषित कर देना चाहिए।’ वहीं इस मामले को लेकर विपक्षी दलों ने भी मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला है।

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