अबकी बार ‘बेदिल सरकार’…क्या मोदी सरकार के दिल मे बच्चों के चिंता है?

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एक ऐसे दिन जब CBSE का पेपर लीक हो गया हो, जब गणित और अर्थशास्त्र का पेपर WhatsApp पर आ गया हो, देश के शिक्षा मंत्री प्रकाश जावड़ेकर बंगाल मे साम्प्रदायिक हिंसा पर प्रेस कांफ्रेस करते हैं। बच्चे रो रहे हैं…उनकी मेहनत और प्लानिंग बर्बाद हो गई, मगर ये नाकारा सरकार हमे अब लोगों को बांटने वाली सियासत के रास्ते पर चलाना चाहती है। गज़ब की प्राथमिकता है इस सरकार की…बच्चों के आंसू भी इनके लिए मायने नहीं रखते।

CBSE

 

यही हुआ था उस दिन जब LoC पर गोलाबारी मे 3 मासूम बच्चे मारे गए थे। उस दिन भी रक्षा मंत्री आई थीं, मगर प्राथमिकता थी राहुल गांधी पर हमला। देश को सूचना प्रसारण मंत्री भी मिला है, मैडम भी अपनी सारी ऊर्जा राहुल गांधी पर केंन्द्रित रखती हैं।

मगर क्या प्रकाश जावड़ेकर जी इस संवेदनहीनता को किसी भी सूरत मे जायज़ ठहरा सकते हैं? बच्चों के आंसू मायने रखते हैं आपके लिए? अगर बंगाल के दंगे मायने रखते हैं तो फिर बिहार पर खामोशी क्यों? और बिहार में तो हद ही हो गई है ना? वहां पर अब चार चार जिलों मे दंगे भड़क उठे हैं? ऐसे पहले तो कभी नही हुआ… बिहार तो दंगों सो अछूता था ना।

वहां पर तो आपके मंत्री खुलेआम अपनी ही सरकार यानि नीतीश सरकार की बखिया उधेड़ रहे हैं…भागलपुर से दंगे शूरू हुए, इसकी वजह तो मंत्री अश्विनी चौबे के होनहार बेटे अरिजीत थे, जिन्होने नियम कानून की धज्जियां उड़ाते हुए यात्रा कर डाली और नतीजा आपके सामने है। इसी तरह बंगाल मे भी जहां ममता बैनरजी सरकार की नाकामी है, ये भी तो देखिए कि आपके मंत्री कैसे कैसे बयान दे रहे हैं?

ये हर तरफ दंगें जैसे माहौल आपको बेशक सियासी फायदा पहुंचा दें, मगर आप एक आम भारतीय परिवार के लिए कैसा माहौल कायम कर रहे हैं…बताईये? और उसी परिवार मे बच्चे भी हैं…क्या उनकी चिंता है आपको? क्या देश मे अगर नियमित रूप से दंगे होते रहे, तो पेपर लीक तो दूर की बात, पेपर ही नहीं हो पाएंगे। क्या इसलिए शिक्षा मंत्री होते हुए भी आप जब देश के सामने आते हैं तो दंगों पर अपना आंशिक दर्द बयान करते हैं, ये नहीं बताते कि बिहार मे आपकी पार्टी के नेता खुलेआम भड़काऊ बयान दे रहे हैं?

क्या यही वजह है कि आप इस कदर उदासीन और बेपरवाह हो गए हैं कि CBSE पेपर लीक आपके लिए दोयम दर्जे की बात हो जाती है? मेरे बच्चे मेरा मज़हब हैं, मेरा जुनून हैं। लिहाज़ा मै उनके बारे में बहुत इमोशनल हूं। यही वजह है कि जब मैं ऐसी सरकार देखता हूं जिसके लिए मेरे बच्चे उसकी प्राथमिकता में दूसरे नम्बर पर हैं, तो मुझे हैरत ही नहीं गुस्सा भी आता है। बोर्ड की परीक्षा आसान बात नहीं जावड़ेकर साहब। आप भी जानते हैं।

कम से कम दो जगहों से खबर मिली है, मेरे जानकार हैं। पेपर लीक होने की वजह से उनके बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। सारी की सारी प्लानिंग चौपट हो गई है। भविष्य की रूपरेखा बिगड़ गई है इन बच्चों की। कम से कम आज देश के सामने आकर आपको सबसे पहले और सबसे पहले ही नहीं , सिर्फ इसी मुद्दे पर उन बच्चों का हौसला बढाना चाहिए था ….मगर अफसोस .इसीलिए कहना पड़ रहा है . अबकी बार बेदिल सरकार।

(ये लेख अभिसार शर्मा के फेसबुक वाल से लिया गया है)

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