सीबीआई ने अपने ही स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के खिलाफ 3 करोड़ रुपये घूस लेने के आरोप में दर्ज कराया FIR, रॉ के सीनियर अधिकारी का भी नाम शामिल

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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एक हाई प्रोफाइल घोटाले को दबाने के लिए अपने ही नंबर दो के वरिष्ठ अधिकारी और विशेष निदेशक (स्पेशल डायरेक्टर) राकेश अस्थाना को आरोपी बनाया है। इस मामले में जांच एजेंसी ने राकेश अस्थाना के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की है। CBI ने अस्थाना पर दर्ज एफआईआर में मांस कारोबारी मोइन कुरैशी से 3 करोड़ रिश्वत लेने का आरोप लगाया है। इस केस के बाद राजनीतिक गलियारों में सनसनी फैल गई है। एफआईआर में अस्थाना के अलावा देश की इंटेलिजेंस एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के स्पेशल डायरेक्टर समंत कुमार गोयल का नाम भी शामिल है।

(Photo Source: Rakesh Asthana / Facebook)

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, एक अभूतपूर्व घटनाक्रम में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपने ही नंबर दो अधिकारी राकेश अस्थाना के खिलाफ तीन करोड़ रुपये की कथित तौर पर घूस लेने के मामले में एफआईआर दर्ज की है। खुद सीबीआई की तरफ से लेटर जारी कर इस खबर की पुष्टि की गई है।

अस्थाना पर आरोप है कि मीट कारोबारी मोईन कुरैशी से जुड़े एक मामले में क्लीनचिट देने के लिए उन्होंने कारोबारी सतीश सना से तीन करोड़ रुपए की रिश्वत ली। यह मुकदमा ऐसे समय में दर्ज किया गया है जब अस्थाना ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ 2 करोड़ रुपये भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं।

हैदराबाद के व्यापारी सतीश बाबू सना की शिकायत पर जांच एजेंसी ने विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ 15 अक्टूबर को मामला दर्ज किया था। सतीश के खिलाफ मीट कारोबारी मोइन कुरैशी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में 2017 से जांच चल रही है। इसकी निगरानी राकेश अस्थाना ही कर रहे हैं।

सतीश का आरोप है कि उसे क्लीनचिट देने के लिए अस्थाना ने कथित तौर पर तीन करोड़ रुपये घूस ली। सना का यह बयान सीआरपीसी की धारा 164 के अंतर्गत मैजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराया गया, जो कि कोर्ट में भी मान्य होगा। सीबीआई ने बिचौलिया समझे जाने वाले मनोज प्रसाद को भी 16 अक्टूबर को दुबई से लौटने पर गिरफ्तार किया था।

सरकारी सूत्रों के अनुसार राकेश अस्थाना ने 24 अगस्त को कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के 10 मामले गिनाए थे। यह भी आरोप लगाया था कि सतीश सना ने इस मामले में क्लीनचिट पाने के लिए सीबीआई प्रमुख को तीन करोड़ रुपये दिए। यह शिकायत केंद्रीय सतर्कता आयोग के पास भेजी गई जो मामले की जांच कर रहा है।

अस्थाना ने अपने ऊपर एफआईआर दर्ज होने के चार दिन बाद केंद्रीय सतर्कता आयुक्त को फिर पत्र लिखा कि वह सतीश सना को गिरफ्तार कर और पूछताछ करना चाहते हैं। इस संबंध में 20 सितंबर 2018 को निदेशक को प्रस्ताव भेजा गया था। इसमें उन्होंने 24 अगस्त को कैबिनेट सचिव को लिखी अपनी चिट्ठी का भी हवाला दिया था। अस्थाना का आरोप है कि सीबीआई निदेशक ने करीब चार दिनों तक फाइल अपने पास रखी और 24 सितंबर को उसे अभियोजन निदेशक (डीओपी) के पास भेज दिया।

अभियोजन निदेशक ने रिकार्ड में मौजूद सभी सबूत मांगे। इन सवालों के जवाब मिलने के बाद फिर 3 अक्टूबर को फाइल सीबीआई निदेशक के पास भेज दी गई लेकिन अब तक यह नहीं लौटी है। सूत्रों के अनुसार राकेश अस्थाना की अगुवाई वाली टीम ने ही मनी लांड्रिंग में फंसे सतीश सना के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर खोला। इसकी वजह से वह देश से भाग नहीं सका।

सूत्रों ने अस्थाना की बातों का हवाला देते हुए कहा कि सना से 1 अक्तूबर, 2018 को पूछताछ की गई थी। उसने बताया था कि वह एक नेता से मिला जिसने आलोक वर्मा से मुलाकात करने के बाद उसे आश्वासन दिया कि इस मामले में उसे क्लीनचिट दे दी जाएगी। गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी अस्थाना उस विशेष जांच दल (एसआईटी) की अगुवाई कर रहे हैं जो अगुस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे और विजय माल्या ऋण घोटाले की जांच कर रहा है। यह दल मोईन कुरैशी मामले की भी जांच कर रहा है।

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