विजय माल्या और ललित मोदी को भारत वापस लाने की कोशिशों पर कितना खर्च हुआ? CBI ने हिसाब देने से किया इनकार

0

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सूचना का आधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत खुलासों से मिली छूट का हवाला देते हुए भारत के भगौड़े कारोबारियों विजय माल्या और ललित मोदी को भारत वापस लाने की कोशिशों पर हुए खर्च का ब्योरा देने से इनकार कर दिया है। एक आरटीआई में इस दोनों कारोबारियों को वापस लाने की कोशिशों पर जवाब मांगा गया था।सीबीआई ने ये भी कहा कि मोदी-माल्या को इम्युनिटी (सुरक्षा) मिली हुई है। बता दें कि 2 मार्च, 2016 को शराब कारोबारी विजय माल्या लंदन चला गया था। इसके बाद उसे भगोड़ा घोषित किया गया। वहीं ललित मोदी पर भी मनी लॉन्ड्रिंग का केस चल रहा है। माल्या के खिलाफ भारत में कथित तौर पर लगभग 9000 करोड़ रुपए के कर्ज नहीं लौटाने के मामले है।

समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से आजतक में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पुणे के आरटीआई कार्यकर्ता विहार धुर्वे ने 9,000 करोड़ रुपये का बैंक लोन वापस न करने के आरोपों को लेकर भारत में वांछित माल्या और आईपीएल मनी लॉड्रिंग मामले में जांच का सामना कर रहे ललित मोदी को देश वापस लाने पर हुए खर्च का CBI से ब्योरा मांगा था।उन्होंने जानकारी मांगी थी कि दोनों को वापस लाने के लिए भारत सरकार ने कुल कितना कानूनी खर्च और यात्रा संबंधी खर्च किया है।

इस आरटीआई आवेदन को वित्त मंत्रालय ने सीबीआई के पास भेजा था। एजेंसी ने उसे इस तरह के मामलों की जांच करने वाले विशेष जांच दल के पास भेजा। आरटीआई आवेदन के जवाब में सीबीआई ने कहा कि उसे 2011 की एक सरकारी अधिसूचना के जरिए आरटीआई अधिनियम के तहत किसी भी तरह का खुलासा करने से छूट मिली हुई है।

अधिनियम की धारा 24 के तहत कुछ संगठनों को सूचना के अधिकार (आरटीआई ) कानून के तहत छूट मिली हुई है, लेकिन अधिनियम में साफ कहा गया है कि ये संगठन भी आरटीआई के तहत जवाबदेह हैं, बशर्ते वह सूचना भ्रष्टाचार एवं मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों से जुड़ी हो। दिल्ली हाईकोर्ट ने इससे पहले रेखांकित किया था कि धारा 24 के तहत सूचीबद्ध संगठन सूचना के ‘भ्रष्टाचार एवं मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों’ से जुड़े होने पर खुलासे से छूट का दावा नहीं कर सकते।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here