पढ़ें, BJP में शामिल होते ही सारदा चिटफंड घोटाले के दो मुख्य आरोपियों मुकुल रॉय और हिमंत बिस्‍वा के खिलाफ कैसे सुस्त पड़ी सीबीआई

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सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार को सारदा चिटफंड मामले की जांच में सहयोग का निर्देश देते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के समक्ष शिलांग में पेश होने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन-सदस्यीय पीठ ने हालांकि स्पष्ट किया कि कुमार के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई फिलहाल नहीं की जाएगी, न ही उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। अब मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी।

(Indian Express File Photos)

दरअसल, राजीव कुमार से सारदा चिटफंड घोटाले में सीबीआई द्वारा पूछताछ करने की कोशिशों के खिलाफ रविवार (3 फरवरी) शाम से ही धरने पर बैठीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के बीच जबर्दस्त टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। पश्चिम बंगाल पुलिस और सीबीआई के बीच मचा घमासान अब ममता बनाम सीबीआई का रूप ले चुका है। मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने वालीं ममता का धरना आज (मंगलवार) तीसरे दिन भी जारी है।

हालांकि, सारदा चिटफंड घोटाले के मामले में कुछ ऐसे उदाहरण सामने आए जिनमें आरोपियों के भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल होते ही सीबीआई ने अपना शिकंजा ढीला कर दिया। सारदा घोटाले में आरोपियों पूर्व टीएमसी नेता मुकुल रॉय और असम के मंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा के बीजेपी में शामिल होते ही एक महीने के भीतर सीबीआई जांच की आंच कम हो गई। कथित घूसकांड में बिस्वा से जांच एजेंसी ने पूछताछ भी की थी और उनके घर पर छापेमारी भी हुई। लेकिन, आरोप-पत्र में उनका नाम नहीं था।

मुकुल रॉय से 2015 में हुई पूछताछ

अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मुकुल रॉय और हेमंत बिस्वा शर्मा के खिलाफ सीबीआई की जांच शुरू हुई। रॉय से 30 जनवरी 2015 को पूछताछ की गई। सारदा चिट-फंड घोटाले में मुकुल रॉय पर कंपनी के चेयरमैन सुदीप्त सेन के साथ कथित तौर पर मिलीभगत का आरोप था। उस दौरान सीबीआई ने सेन के ड्राइवर का बयान दर्ज किया था, जिसमें उसने बताया था कि कोलकाता से सेन को भगाने में कथित तौर पर रॉय ने मदद की थी।

सीबीआई ने टीएमसी के सांसद कुणाल घोष के आरोपों के आधार पर 2015 में मुकुल रॉय को पूछताछ के लिए तलब किया था। 2013 में सारदा ग्रुप की शिकायत के बाद घोष को धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र सहित कई गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया था। कंपनी के कर्मचारियों को सैलरी नहीं देने के बाद घोष पर धोखाधड़ी, चोरी और आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगा।

हेमंत शर्मा से भी हो चुकी है पूछताछ

अखबार के मुताबिक, गिरफ्तारी के महज एक घंटे के भीतर ही घोष ने सारदा घोटाले में मुकुल रॉय सहित 12 लोगों के नाम का जिक्र किया था। लेकिन इसके बाद रॉय ने बीजेपी से संपर्क साधा और आखिरकार 3 नवंबर 2017 को वह बीजेपी में शामिल हो गए। वहीं, हेमंत बिस्वा शर्मा से भी सीबीआई ने 26 नवंबर, 2014 को पूछताछ की थी। इसके ठीक दो महीने पहले ही सीबीआई ने गुवाहाटी स्थित उनकी पत्नी के न्यूज चैनल और उनके घर पर छापेमारी की थी।

आरोपों के मुताबिक, हेमंत शर्मा पर सारदा कंपनी से हर महीने 20 लाख रुपये लेने के आरोप लगे। हालांकि, जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की। 28 अगस्त, 2015 को असम में कांग्रेस के विधायक रहे हेमंत बिस्वा शर्मा भी बीजेपी में शामिल हो गए और उसके बाद से आज तक उन्हें भी सीबीआई ने पूछताछ के लिए नहीं बुलाया। बीजेपी में शामिल होने के बाद जिस प्रकार से एजेंसी इन दोनों आरोपियों के खिलाफ सुस्त पड़ गई, इसे लेकर तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं।

तीन दिन से ममता का धरना जारी

बता दें कि सीबीआई की एक टीम कोलकाता के पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से चिटफंड घोटाले के सिलसिले में पूछताछ करने के लिए रविवार को उनके आवास पर गई थी, लेकिन टीम को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई और उन्हें जीप में भरकर थाने ले जाया गया। टीम को थोड़े समय के लिए हिरासत में भी रखा गया। घटना के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रविवार की रात साढ़े आठ बजे से ही धरने पर बैठी हुई हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पर बंगाल में तख्तापलट करने का प्रयास करने के आरोप लगाए। वही, सीबीआई के मुताबिक आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार ने चिटफंड घोटाले की जांच में पश्चिम बंगाल पुलिस के विशेष जांच दल का नेतृत्व किया था और उनसे गायब दस्तावेजों तथा फाइलों के बारे में पूछताछ करने की जरूरत है। पेश होने के लिए एजेंसी की तरफ से जारी नोटिस का उन्होंने जवाब नहीं दिया है।

पढ़ें- सारदा और रोजवैली समूह भ्रष्टाचार की पूरी कहानी

कोलकाता पुलिस प्रमुख से पूछताछ की सीबीआई की नाकाम कोशिश के बाद जो राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल रहा है, उसका संबंध दो कथित पोंजी घोटालों से है। इसकी कहानी सारदा समूह और रोज वैली समूह से जुड़ा हुआ है। इसका खुलासा 2013 में हुआ था। दरअसल, इन दोनों कंपनियों ने लाखों निवेशकों से दशकों तक हजारों करोड़ रुपये वसूले और बदले में उन्हें बड़ी रकम की वापसी का वादा किया गया, लेकिन जब धन लौटाने की बारी आई तो भुगतान में खामियां होने लगी। जिसका असर राजनीतिक गलियारे तक देखने को मिला।

धन जमा करने वाली योजनाएं कथित तौर पर बिना किसी नियामक से मंजूरी के 2000 से पश्चिम बंगाल और अन्य पड़ोसी राज्यों में चल रही थी। लोगों के बीच यह योजना ‘चिटफंड’ के नाम से मशहूर थी। इस योजना के जरिए लाखों निवेशकों से हजारों करोड़ रुपये जमा किए गए। इन दोनों समूहों ने इस धन का निवेश यात्रा एवं पर्यटन, रियल्टी, हाउसिंग, रिजॉर्ट और होटल, मनोरंजन और मीडिया क्षेत्र में व्यापक तौर पर किया था। सारदा समूह 239 निजी कंपनियों का एक संघ था और ऐसा कहा जा रहा है कि अप्रैल, 2013 में डूबने से पहले इसने 17 लाख जमाकर्ताओं से 4000 करोड़ रुपये जमा किये थे।

15,000 करोड़ का है रोज वैली घोटाला

वहीं, रोज वैली के बारे में कहा जाता है कि इसने 15,000 करोड़ रुपये जमा किए थे। सारदा समूह से जुड़े सुदिप्तो सेन और रोज वैली से जुड़े गौतम कुंडु पर आरोप है कि वह पहले पश्चिम बंगाल की वाम मोर्च सरकार के करीब थे लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जैसे-जैसे राज्य में तृणमूल कांग्रेस की जमीन मजबूत हो गई, ये दोनों समूह इस पार्टी के नजदीक आ गई। हालांकि, इन दोनों समूहों की संपत्ति 2012 के अंत में चरमरानी शुरू हो गई और भुगतान में खामियों की शिकायतें भी मिलने लगी।

सारदा समूह अप्रैल 2013 में डूब गया और सुदिप्तो सेन अपने विश्वसनीय सहयोगी देबजानी मुखर्जी के साथ पश्चिम बंगाल छोड़कर फरार हो गए। इसके बाद सारदा समूह के हजारों कलेक्शन एजेंट तृणमूल कांग्रेस के कार्यालय के बाहर जमा हुए और सेन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सारदा समूह के खिलाफ पहले मामला विधान नगर पुलिस आयुक्तालय में दायर किया गया जिसका नेतृत्व राजीव कुमार कर रहे थे।

कुमार, 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी है। उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर तब सेन को 18 अप्रैल,2013 को देबजानी के साथ कश्मीर से गिरफ्तार किया। इसके बाद राज्य सरकार ने कुमार के नेतृत्व में एक एसआईटी गठित की।एसआईटी ने तृणमूल कांग्रेस से राज्यसभा के तत्कालीन सांसद और पत्रकार कुणाल घोष को सारदा चिटफंड घोटाले में कथित तौर पर शामिल होने के मामले में गिरफ्तार किया।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया सीबीआई जांच के आदेश

कांग्रेस नेता अब्दुल मनान द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका के बाद न्यायालय ने मई, 2014 में इस मामले में सीबीआई जांच का आदेश दे दिया। तृणमूल कांग्रेस के कई शीर्ष नेताओं और श्रीनजॉय बोस जैसे सांसदों को सीबीआई ने गिरफ्तार किया। सीबीआई ने रजत मजूमदार और तत्कालीन परिवहन मंत्री मदन मित्रा को भी गिरफ्तार किया। बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय जो कि तब तृणमूल कांग्रेस के महासचिव थे, उनसे भी सीबीआई ने 2015 में इस भ्रष्टाचार के मामले में पूछताछ की।

इसके बाद 2015 के मध्य में रोजवैली समूह के कुंडु को भी प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार कर लिया। इसके अलावा दिसंबर, 2016 और जनवरी 2017 में तृणमूल कांग्रेस के सांसद तापस पाल और सुदीप बंधोपाध्याय को भी रोजवैली मामले में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। पिछले कुछ महीनों में सीबीआई ने कुछ पेंटिग जब्त किए हैं, जिसके बारे में बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा बनाए गए हैं और चिटफंड मालिकों ने इन सभी को बड़ी कीमत देकर खरीदा था।

इस साल जनवरी में सीबीआई ने फिल्म प्रोड्यूसर श्रीकांत मोहता को भी रोजवैली चिटफंड मामले में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया। इसके बाद दो फरवरी को सीबीआई ने दावा किया कि कुमार ‘फरार’ चल रहे हैं और सारदा और रोजवैली पोंजी भ्रष्टाचार मामले में उनसे पूछताछ के लिए ‘उनकी तलाश’ की जा रही है। (इनपुट- भाषा/इंडियन एक्सप्रेस के साथ)

 

 

 

 

 

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