CBI रिश्वत मामला: करोड़ों रुपये घूस लेने सनसनीखेज आरोपों पर मोदी के मंत्री हरिभाई चौधरी ने दी सफाई

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सीबीआई में जारी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। सीबीआई को लेकर चल रहा विवाद सोमवार (19 नवंबर) को DIG रैंक के वरिष्ठ अधिकारी मनीष कुमार सिन्हा द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल तथा केंद्रीय मंत्री हरिभाई पार्थिभाई चौधरी और केंद्रीय सतर्कता आयुक्त के वी चौधरी का नाम लिए जाने के बाद और गहरा गया। सिन्हा ने इन पर सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ जांच में कथित हस्तक्षेप के प्रयास करने के आरोप लगाए।

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मनीष कुमार सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि CBI के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के मामले में शिकायतकर्ता हैदराबाद व्यवसायी सतीश बाबू सना ने पूछताछ के दौरान बताया था कि कोयला और खान राज्य मंत्री हरिभाई चौधरी को संबंधित मामलों में कथित मदद के लिए कुछ करोड़ रुपये दिए गए थे। यह लेन देन जून 2018 के पहले पखवाड़े में हुआ था।

इस बीच केंद्रीय मंत्री हरिभाई चौधरी ने सोमवार को सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारी एम के सिन्हा द्वारा उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को ‘‘आधारहीन और दुर्भावनापूर्ण’’ बताते हुए कहा कि यदि ये आरोप साबित हो जाते है तो वह राजनीति छोड़ देंगे। केंद्रीय मंत्री ने एक बयान में कहा कि वह व्यवसायी को नहीं जानते है। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे खिलाफ बिल्कुल झूठे और आधारहीन आरोप लगाए गए हैं। मैं न तो सतीश बाबू सना को जानता हूं, और न ही मैं उससे मिला हूं…।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे आज विभिन्न मीडिया रिपोर्टों से पता चला कि माननीय सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया गया है जिसमें इस मामले का उल्लेख किया गया है। मैं मेरी छवि को धूमिल करने के इस दुर्भावनापूर्ण प्रयास की निंदा करता हूं। मैं इस मामले में किसी भी जांच का स्वागत करूंगा और कानून को अपना काम करना चाहिए। यदि मैं दोषी साबित हो जाता हूं तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा।’’

अजित डोभाल पर भी लगा गंभीर आरोप

आपको बता दें कि सीबीआई के डीआईजी एमके सिन्हा मीट कारोबारी मोइन कुरैशी केस में सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना पर 2.95 करोड़ घूस लेने के आरोपों की जांच कर रहे थे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में कई सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। याचिका में उनका तबादला नागपुर किए जाने के आदेश को खारिज करने के बारे में तुरंत सुनवाई करने का आरोप लगाया गया है। सिन्हा का आरोप है कि इस जांच में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने दो मौकों पर तलाशी अभियान रोकने के निर्देश दिए थे।

सिन्हा के मुताबिक, 17 अक्टूबर को राकेश अस्थाना के खिलाफ घूस के आरोपों में FIR की बात जब NSA को पता चली, तो उसी रात उन्होंने अस्थाना से बात की। अस्थाना ने NSA से गिरफ्तारी से बचाने को कहा था। 20 अक्टूबर को जब अस्थाना खेमे के डिप्टी एसपी देवेंद्र कुमार के ठिकानों पर तलाशी ली गई, तो सीबीआई चीफ का फोन आया और NSA के निर्देश पर जांच रोकने को कहा गया था। इसके अलावा सिन्हा ने केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (CVC) पर भी दखल के आरोप लगाए।

 

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