यूपी: अवैध खनन मामले में अखिलेश यादव तक पहुंच सकती है जांच की आंच, पूर्व सीएम बोले- पूछताछ हुई तो CBI को दूंगा जवाब

0

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की टीमों ने शनिवार (5 को अवैध खनन मामले में आईएएस के वरिष्ठ अधिकारी के उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और दिल्ली स्थित आवास समेत 12 ठिकानों पर छापा मारा। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि ने समाजवादी पार्टी (सपा) शासन के दौरान बुंदेलखंड क्षेत्र में खनन घोटाले के सिलसिले में यूपी की चर्चित वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बी. चंद्रकला के आवास समेत 12 ठिकानों पर छापा मारा। इस बीच टीम ने वरिष्ठ अधिकारी के आवास से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं।

Akhilesh Yadav

पूर्ववर्ती सपा सरकार के शासनकाल में वर्ष 2012 से 2016 के बीच राज्य में हुए कथित खनन घोटाला मामले में सीबीआई ने शनिवार को बी. चंद्रकला के घर पर छापा मारा था। सीबीआई ने बुंदेलखण्ड में अवैध खनन के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर चंद्रकला समेत 11 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया था। वर्ष 2012-13 में खनन विभाग तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पास था।

लिहाजा माना जा रहा है कि सीबीआई इस मामले में उनसे भी पूछताछ कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की भूमिका की भी जांच किए जाने की संभावना जताई है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 2012 से जून 2013 तक खनन विभाग का अतिरिक्त प्रभार अखिलेश यादव के पास ही था। उनके मुताबिक, सीबीआई इस मामले में तत्कालीन खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को भी नोटिस भेज सकती है।

छापेमारी के बाद इस अवैध खनन मामले में यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख अखिलेश यादव की भूमिका की जांच के भी संकेत दिए। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि अखिलेश यादव सीबीआई के रडार पर हैं और उनसे पूछताछ की जा सकती है। समाजवादी पार्टी (सपा) की सरकार में खनन मंत्री रही गायत्री प्रजापति की भूमिका पहले से ही जांच के दायरे में है।

वर्ष 2011 के बाद के उत्तर प्रदेश के सभी खनन मंत्रियों से पूछताछ हो सकती है। वर्ष 2012-13 में खनन मंत्रालय तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पास ही था। सीबीआई ने बताया कि खनन घोटाले में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी बी. चन्द्रकला के अलावा आदिल खान, तत्कालीन खनन अधिकारी मोइनुद्दीन, सपा के विधान पार्षद रमेश मिश्रा और उनके भाई, खनन क्लर्क राम आश्रय प्रजापति, अंबिका तिवारी (हमीरपुर), संजय दीक्षित, खनन क्लर्क राम अवतार सिंह और उनके रिश्तेदार आरोपी हैं।

पूछताछ हुई तो CBI को दूंगा जवाब

अखिलेश यादव ने अपने कार्यकाल में हुए कथित अवैध खनन मामले पर सीबीआई की कार्यवाही के बाद खुद से पूछताछ की आशंका के बारे में रविवार को कहा कि वह सीबीआई को जवाब देने के लिए तैयार हैं, मगर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) यह याद रखे कि वह जिस संस्कृति को छोड़कर जा रही है, कल उसे भी उसका सामना करना पड़ेगा।

अखिलेश ने मीडियाकर्मियों से बातचीत में खुद पर सीबीआई जांच की आंच पड़ने की आशंका के सवाल पर कहा, ‘‘सपा इस कोशिश में है कि ज्यादा से ज्यादा लोकसभा सीटें जीते। जो हमें रोकना चाहते हैं, उनके पास सीबीआई है। एक बार कांग्रेस ने सीबीआई जांच करायी थी, तब भी पूछताछ हुई थी। अगर बीजेपी यह सब करा रही है और सीबीआई पूछताछ करेगी तो हम जवाब देंगे। मगर जनता बीजेपी को जवाब देने के लिए तैयार है।’’

उन्होंने कहा ‘‘आखिर सीबीआई छापेमारी क्यों कर रही है। जो पूछना है हमसे पूछ ले, लेकिन बीजेपी के लोग यह याद रखें कि जो संस्कृति वे छोड़कर जा रहे हैं, उसका कल उन्हें भी सामना करना पड़ेगा।’’ अखिलेश ने तंज भरे लहजे में कहा कि अब तो सीबीआई को बताना पड़ेगा कि हमने गठबंधन में कितनी-कितनी सीटें बांटी हैं।‘‘

पूर्व सीएम ने कहा कि मुझे खुशी है इस बात की कि कम से कम बीजेपी ने अपना रंग दिखा दिया। पहले कांग्रेस ने हमें सीबीआई से मिलने का मौका दिया था। इस बार भाजपा यह मौका दे रही है।’’ उन्होंने कहा कि बीजेपी ने राजनीतिक शिष्टाचार ही खत्म कर दिया। बीजेपी चाहती है कि जैसा उसका सियासी शिष्टाचार है, वैसा ही दूसरे दलों का भी हो जाए। मगर, हम अपना राजनीतिक शिष्टाचार नहीं बदलेंगे। अगर कांग्रेस चोर बोल रही है तो भाजपा चाहती है कि हम भी उसे चोर बोलें।

क्या है मामला?

दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर 2016 से खनन घोटाले की जांच चल रही है। आरोप है कि रोक के बावजूद अधिकारियों और मंत्रियों की मिलीभगत से रेत खनन के ठेके दिए गए। हाई कोर्ट ने सीबीआई को अवैध खनन घोटाले की जांच का निर्देश दिया है। न्यायालय ने सीबीआई को उत्तर प्रदेश के पांच जिलों- शामली, हमीरपुर, फतेहपुर, देवरिया और सिद्धार्थ नगर में अवैध रेत खनन के आरोपों की जांच का आदेश दिया।

वर्ष 2015 में अवैध रूप से जारी मौरंग खनन को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने 16 अक्टूबर 2015 को हमीरपुर में जारी किए गए सभी 60 मौरंग खनन के पट्टे अवैध घोषित करते हुए रद्द कर दिए थे।याचिकाकर्ता विजय द्विवेदी के मुताबिक, मौरंग खदानों पर पूरी तरह से रोक लगाने के बाद भी जिले में अवैध खनन खुलेआम किया गया। 28 जुलाई, 2016 को तमाम शिकायतें व याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अवैध खनन की जांच सीबीआई को सौंप दी थी।

‘लेडी दबंग’ IAS चंद्रकला भी घेरे में

सीबीआई ने शनिवार को हमेशा सोशल मीडिया पर छाई रहने वाली यूपी कैडर की 2008 बैच की सबसे चर्चित महिला आईएएस अधिकारी बी. चंद्रकला के लखनऊ स्थित उनके आवास समेत प्रदेश के अन्य जनपदों में भी छापेमारी की। छापे में घर की तलाशी के साथ-साथ सोफे, बेड और छतों की फाल सीलिंग खोल कर तलाशी ली गई। टीम ने घर से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किए हैं। बी. चंद्रकला पर हमीरपुर में जिलाधिकारी रहते हुए अवैध खनन व अपने चहेतों को खनन पट्टे देने का आरोप है।

अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली पूर्व की सपा सरकार में चंद्रकला की पोस्टिंग हमीरपुर में बतौर जिलाधिकारी हुई थी। उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने जुलाई 2012 के बाद हमीरपुर जिले में 50 मौरंग खनन के पट्टे कर दिए थे। उस दौरान हालांकि ई-निविदा के जरिए मौरंग के पट्टों को स्वीकृत करने का प्रावधान था। इसके बावजूद नियमों की अनदेखी करते हुए ऐसा किया गया। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दो साल पहले हाईकोर्ट ने बी.चंद्रकला द्वारा आवंटित सभी मौरंग खनन के पट्टों को खारिज कर दिया था।

कोर्ट ने उनके कार्यकाल के दौरान हुए खनन व पट्टों के आवंटन की सीबीआई जांच का आदेश दिया था। इसी क्रम में शनिवार की सुबह करीब आठ सीबीआई अधिकारियों ने चंद्रकला के लखनऊ में योजना भवन के समीप स्थित सफायर अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 101 में छापा मारा। सीबीआई ने इसके अलावा हमीरपुर, जलौन, बुलंदशहर आदि कई जगहों पर भी छापेमारी की है। इनमें हमीरपुर में समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष व एमएलसी रमेश मिश्रा व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष संजीव दीक्षित के आवास व कार्यालय भी शामिल हैं। (इन्पुट्स भाषा/वार्ता/आईएएनएस के साथ)

 

"
"

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here