व्यापमं घोटाला: CBI ने CM शिवराज सिंह चौहान को दी क्लीनचिट, 490 आरोपियों के खिलाफ दाखिल किया आरोप-पत्र

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मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) घोटाले में शिवराज सरकार के लिए राहत भरी खबर आई है। दरअसल, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को क्लीनचिट दे दी है। इसी के साथ भोपाल की अदालत में मंगलवार (31 अक्टूबर) को घोटाले में 490 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की है। बता दें कि यह मामला प्रवेश परीक्षाओं और नौकरियों में भर्ती की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से संबंधित है।

File Photo: Reuters

सीबीआई ने कहा कि इस मामले में सबूतों से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई। भोपाल की विशेष अदालत में पेश किए गए आरोप-पत्र में जांच एजेंसी द्वारा कहा गया है कि उसने अपनी जांच में हार्ड डिस्क से किसी तरह की छेड़छाड़ होना नहीं पाया है। सीबीआई की ओर से आधिकारिक तौर पर दी गई जानकारी में बताया गया है कि वर्ष 2013 में व्यापमं द्वारा आयोजित पीएमटी परीक्षा में गड़बड़ी की जांच की जा रही है।

हिंदुस्तान में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में कुल 490 आरोपी हैं। इनमें तीन व्यापमं के अधिकारी, तीन गिरोहबाज, 17 दलाल, 297 सॉल्वर और फायदा पाने वाले छात्रों के अलावा 170 छात्रों के परिजन हैं। सीबीआई ने अपना आरोप-पत्र विशेष न्यायाधीश की अदालत में पेश करते हुए बताया कि उसने तमाम आरोपों की पड़ताल कर पुलिस द्वारा जब्त की गई हार्ड डिस्क का सीएफएसएल से परीक्षण कराया और अन्य जुटाए गए साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद पाया है कि हार्ड डिस्क से कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है।

बता दें कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और याचिकाकर्ता प्रशांत पाण्डेय ने आरोप लगाया था कि व्यापमं के अधिकारी नीतीश मोहिंदर के कम्प्यूटर हार्ड डिस्क के साथ छेड़खानी की गई है और 48 बार फाइल में से सीएम शब्द को निकाला गया है। प्रशांत पाण्डेय ने इसके लिए बतौर सबूत एक पेन ड्राइव भी सीबीआई को मुहैया कराई थी।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 9 जुलाई 2015 को सीबीआई को व्यापमं घोटाले की जांच के निर्देश दिए थे। सीबीआई ने जांच कर उन लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया, जिनके खिलाफ इंदौर के राजेंद्र नगर थाने में 2013 में प्रकरण दर्ज किए गए थे। इसमें वे लोग थे जो पीएमटी 2013 की परीक्षा में किसी न किसी तौर पर शामिल थे।

सीबीआई सूत्रों ने बताया कि उसने हार्ड डिस्क के साथ छेड़छाड़ के कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और व्हिसल ब्लोअर प्रशांत पांडेय के आरोप को खारिज कर दिया। हार्ड डिस्क को करोड़ों रुपये के भर्ती घोटाले में अहम सबूत माना जा रहा था। इसमें कहा गया है कि पांडेय ने अपने दावे के समर्थन में दिल्ली हाईकोर्ट और सीबीआई को दो पेन ड्राइव सौंपे थे। पांडे ने दावा किया था कि इंदौर पुलिस ने 2013 में बरामद हार्ड डिस्क में छेड़छाड की गई थी, ताकि रिकॉर्ड से सीएम शब्द हटाए जा सकें।

सीबीआई का कहना है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री (दिग्विजय सिंह) द्वारा हार्ड डिस्क से छेड़छाड़ को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के तहत भी जांच की। यह हार्ड डिस्क इंदौर पुलिस ने बरामद की थी। हार्ड डिस्क के अलावा पेन ड्राइव और एक निजी व्यक्ति की पेन ड्राइव का हैदराबाद की सेंटल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी से परीक्षण कराया गया, जिसमें पाया गया है कि हार्ड डिस्क से कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है। वहीं निजी व्यक्ति द्वारा पेश पेन ड्राइव में कई बातें झूठी हैं।

गौरतलब है कि व्यापमं घोटाला एसटीएफ फिर एसआईटी और अब सीबीआई के पास जांच में है। इस प्रकरण से जुड़े 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं दो हजार से ज्यादा लोग जेल जा चुके हैं। सीबीआई की चार्जशीट दायर किए जाने और उसमें हार्ड डिस्क से किसी तरह की छेड़छाड़ न होने का खुलासा किए जाने पर बीजेपी ने खुशी जाहिर की है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाए हैं।

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