चंदा कोचर मामले में CBI ने दर्ज की FIR, मुंबई समेत चार ठिकानों पर छापेमारी

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केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने गुरुवार (24 जनवरी) को आईसीआईसीआई बैंक (ICICI) की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) चंदा कोचर के पति दीपक कोचर से जुड़े लोन केस में एफआईआर दर्ज की है।

चंदा कोचर

इसके साथ ही सीबीआई ने मुंबई और औरंगाबाद में वीडियोकॉन के मुख्यालयों के साथ चार अलग-अलग ठिकानों पर छापे भी मारे हैं। सूत्रों के अनुसार, सीबीआई को उम्मीद है कि छापेमारी में कुछ अहम सुराग हाथ लग सकते हैं। बता दें कि यह छापेमारी विडियोकॉन ग्रुप को 2012 में आईसीआईसीआई बैंक से मिले 3,250 करोड़ रुपये के लोन मामले के सिलसिले में हो रही है।

बता दें कि इससे पहले चंदा कोचर ने 4 अक्टूबर 2018 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। बैंक के बोर्ड ने समय से पूर्व पद छोड़ने की उनकी मांग को स्वीकार करने के बाद उनकी जगह संदीप बख्शी को अगला मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जिक्युटिव ऑफिसर नियुक्त किया।

क्या है मामला?

प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े बैंक आईसीआईसीआई की सीईओ और एमडी चंदा कोचर पर कथित तौर पर वित्तीय लेन-देन में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद या हितों के टकराव का सनसनीखेज आरोप है। आरोप है कि आईसीआईसीआई बैंक ने उस वीडियोकॉन कंपनी को 3,250 करोड़ रुपये का लोन दिया, जिसके मालिक वेणुगोपाल धूत के साथ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर के कारोबारी रिश्ते हैं। आरोप है कि वीडियोकॉन को 3,250 करोड़ का लोन दिलाने में कथित तौर पर चंदा कोचर ने मदद की थी।

सीबीआई इस बात की जांच कर रही है कि इस कर्ज में किसी तरह का लेनदेन तो नहीं हुआ है। एजेंसी के अधिकारियों ने कहा कि वे इस लेनदेन से संबंधित दस्तावेजों का अध्ययन कर रहे हैं। यदि किसी तरह की गड़बड़ी के प्रमाण मिलते हैं तो आईसीआईसीआई बैंक की प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी चंदा कोचर, उनके पति दीपक कोचर और अन्य लोगों को विस्तृत पूछताछ के लिए समन किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि 3,250 करोड़ रुपये के ऋण आवेदन की जांच करने वाले नोडल अधिकारियों से पूछताछ की है।

आरोप है कि इस मामले में वीडियोकान समूह और कोचर परिवार ने एक दूसरे को लाभ पहुंचाया। आरोपों के मुताबिक, कर्ज को मंजूरी के बदले वीडियोकान ने नुपॉवर रिन्यूवेबल्स में निवेश किया। इस कंपनी के मालिक चंदा कोचर के पति दीपक कोचर हैं। आईसीआईसीआई बैंक से वीडियोकान समूह की कई कंपनियों को करीब तीन हजार करोड़ रुपये का ऋण मिला। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बीएन श्रीकृष्णा इस मामले की जांच करेंगे। कई सरकारी एजेंसी भी इस मामले की जांच में जुटी हैं।

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